बीमा सेक्टर में रेगुलेटरी बदलाव की खबर के बाद गुरुवार को इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. PB Fintech का शेयर 10% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंच गया. वहीं SBI Life Insurance, HDFC Life Insurance और ICICI Lombard General Insurance समेत कई बीमा कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे.इस गिरावट की बड़ी वजह इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी IRDAI का बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए नए नियमों का प्रस्ताव है. रेगुलेटर ने बीमा वेबसाइट्स पर ग्राहकों को गुमराह करने वाले 'डार्क पैटर्न' पर रोक लगाने के साथ-साथ बीमा कंपनियों के खर्च और कमीशन से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है.
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सबसे पहले समझिए 'डार्क पैटर्न' क्या है?
IRDAI के मुताबिक, बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की वेबसाइट पर कई बार ग्राहक को किसी प्रोडक्ट की पूरी जानकारी या उसकी कीमत देखने से पहले अपना मोबाइल नंबर, ईमेल या दूसरी निजी जानकारी देनी पड़ती है.IRDAI इसे 'डार्क पैटर्न' की श्रेणी में रख रहा है. नए प्रस्ताव के तहत ग्राहक को बिना अपनी निजी जानकारी दिए ही बीमा प्रोडक्ट की फीचर, कीमत और क्वालिटी से जुड़ी जानकारी मिलनी चाहिए.यानी अगर कोई ग्राहक सिर्फ यह जानना चाहता है कि किसी बीमा पॉलिसी की कीमत कितनी है, तो उसे इसके लिए पहले अपना फोन नंबर या दूसरी जानकारी देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.
कमीशन पर फिर लगेगी सीमा
IRDAI के प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा इंश्योरेंस कमीशन को दोबारा सीमित करना है. 2023 में प्रोडक्ट्स लेवल कमिशन कैप हटाकर कंपनियों को अपने बोर्ड की मंज़ूरी वाले EoM फ्रेमवर्क के भीतर कमीशन तय करने की ज्यादा आजादी दी गई थी. अब IRDAI ने फिर से प्रोडक्ट और सेगमेंट के हिसाब से कमिशन कैप लाने का प्रस्ताव रखा है. रेगुलेटर के मुताबिक, कमीशन तय करते समय प्रोडक्ट की जटिलता, उसे बेचने और सर्विस देने में लगने वाली मेहनत, बिजनेस सेगमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल को ध्यान में रखा जाएगा.
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी व्यक्ति ने ₹1 लाख सालाना प्रीमियम वाली 10 साल या उससे ज्यादा अवधि की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली.
नए प्रस्ताव के तहत पहले साल एजेंट को अधिकतम 25% यानी ₹25,000 और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी अधिकतम 20% यानी ₹20,000 कमीशन मिल सकेगा.वहीं छोटी अवधि की कुछ लाइफ पॉलिसीज में सीमा इससे भी कम होगी. मसलन, 5 साल तक की प्रीमियम पेइंग टर्म वाली व्यक्तिगत नॉन-लिंक्ड या लिंक्ड पॉलिसी में एजेंट के लिए पहले साल का प्रस्तावित कमीशन कैप 6.25% और दूसरी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए 5% है. यानी IRDAI अब हर बीमा प्रोडक्ट पर एक जैसा कमीशन रखने के बजाय किस प्रोडक्ट को बेचने में कितनी मेहनत और सर्विस की जरूरत है, उसके हिसाब से सीमा तय करना चाहता है.
टर्म इंश्योरेंस पहले साल कमीशन की नई सीमा
टर्म इंश्योरेंस में IRDAI ने पहले साल मिलने वाले कमीशन की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत एजेंट को अधिकतम 30% और डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी को 25% कमीशन मिल सकेगा. वहीं पॉलिसी के रिन्यूअल पर यह सीमा क्रमश 10% और 7.5% रखने का प्रस्ताव है. इसे एक उदाहरण से समझें. अगर किसी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का सालाना प्रीमियम 20,000 रुपये है, तो प्रस्तावित नियम के तहत पहले साल एजेंट को अधिकतम 6,000 रुपये और डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी को अधिकतम 5,000 रुपये कमीशन मिल सकेगा. रिन्यूअल के समय यह अधिकतम कमीशन एजेंट के लिए 2,000 रुपये और डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी के लिए 1,500 रुपये होगा.
हेल्थ इंश्योरेंस कमीशन पर भी कैप का प्रस्ताव
Individual health insurance में भी IRDAI ने कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है. पहले साल एजेंट या एसोसिएट के लिए अधिकतम 20% और डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी के लिए 15% कमीशन प्रस्तावित है. वहीं रिन्यूअल के समय यह सीमा क्रमशः 10% और 5% होगी.उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ग्राहक का सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम 20,000 रुपये है, तो पहले साल एजेंट या एसोसिएट को अधिकतम 4,000 रुपये और डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी को अधिकतम 3,000 रुपये कमीशन मिल सकेगा. रिन्यूअल पर यह रकम क्रमशः 2,000 रुपये और 1,000 रुपये होगी.
General Insurance में भी बदलाव
General insurance में भी कमीशन स्ट्रक्चर में बदलाव का प्रस्ताव है. खास तौर पर motor third-party insurance में डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी के लिए कमीशन शून्य रखने का प्रस्ताव है, जबकि एजेंट और एसोसिएट के लिए 2.5% कमीशन प्रस्तावित किया गया है.वहीं नई गाड़ी की motor own-damage, personal accident और legal liability कवर वाली पॉलिसियों में डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी के लिए 5% और एजेंट या एसोसिएट के लिए 10% कमीशन की सीमा प्रस्तावित है.यानी IRDAI का प्रस्ताव लागू होने पर अलग-अलग तरह की इंश्योरेंस पॉलिसियों में कमीशन एक जैसा नहीं रहेगा. कमीशन की सीमा पॉलिसी के प्रकार, अवधि और उसे बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के आधार पर तय होगी.
बीमा कंपनियों के खर्च पर भी लगाम
IRDAI ने बीमा कंपनियों के Expense of Management यानी EoM को भी तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा है.जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के मामले में EoM की गणना को ग्रॉस रिटन प्रीमियम यानी GWP से हटाकर घरेलू ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम यानी GDPI से जोड़ने का प्रस्ताव है.इसके साथ ही EoM की सीमा को अगले पांच वर्षों में धीरे-धीरे GWP के 30% से घटाकर GDPI के 20% तक लाने का प्रस्ताव है.EoM में बीमा कंपनियों के कमीशन, डिस्ट्रीब्यूशन और दूसरे ऑपरेशनल खर्च शामिल होते हैं.
ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?
IRDAI के प्रस्ताव लागू होने पर ग्राहक के लिए बीमा खरीदने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हो सकती है.
- ग्राहक को पॉलिसी खरीदने से पहले
- प्रोडक्ट की फीचर की जानकारी मिलेगी
- कीमत की जानकारी मिल सकेगी
- क्वालिटी से जुड़ी जानकारी देख सकेगा
- इसके लिए पहले निजी जानकारी देना जरूरी नहीं होगा
- कुछ पॉलिसी में कमीशन की जानकारी भी मिलेगी
इसके अलावा रेगुलेटर ने मिस-सेलिंग रोकने के लिए भी सख्त प्रावधानों का प्रस्ताव दिया है.
बीमा बेचने से पहले ग्राहक की जरूरत समझनी होगी
IRDAI ने 'suitability' को लागू करने योग्य जिम्मेदारी बनाने का प्रस्ताव रखा है. खास तौर पर कुछ लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियों की बिक्री में ग्राहक की जरूरत और पॉलिसी की उपयुक्तता का रिकॉर्ड रखना होगा.इसके लिए ऑडिट ट्रेल बनाए रखने का भी प्रस्ताव है.इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक को सिर्फ बिक्री का लक्ष्य पूरा करने के लिए ऐसी पॉलिसी न बेची जाए, जो उसकी जरूरत के मुताबिक न हो.
IRDAI ने डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में भी बदलाव सुझाया
रेगुलेटर ने मौजूदा जटिल डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रक्चर की जगह तीन व्यापक कैटेगरी बनाने का प्रस्ताव रखा है:
- बीमा वितरण संस्थाएं (IDEs)
- बीमा बेचने वाला व्यक्ति (IDPs)
- मार्केट इंफ्रा इंस्टीट्यूशन (MIIs)
इसके अलावा बैंकों द्वारा बेची जाने वाली पॉलिसियों, एजेंट्स को दिए जाने वाले इंसेंटिव और बीमा प्रोडक्ट्स की अनिवार्य बंडलिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है.मसलन, किसी लोन के साथ जबरन बीमा प्रोडक्ट जोड़ने जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का प्रस्ताव है.
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