Policybazaar और दूसरे insurance distributors पर IRDAI के proposed commission rules का असर बाजार में दिख चुका है. PB Fintech के शेयर में एक दिन में करीब 36 फीसदी की गिरावट आई. लेकिन इस प्रस्ताव का असर सिर्फ insurance distributors तक सीमित नहीं रह सकता. बैंकों की insurance से होने वाली fee income भी इसके दायरे में आ सकती है.
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दरअसल, बड़े बैंक भी insurance policies बेचकर कमाई करते हैं. यही business broadly bancassurance कहलाता है. और Macquarie के analysis के मुताबिक, बड़े private banks में Axis Bank और HDFC Bank इस income के लिहाज से ज्यादा exposed हैं.
बैंक insurance बेचकर कैसे कमाते हैं?
मान लीजिए आप बैंक से loan लेने जाते हैं. बैंक आपको loan के साथ life या health insurance policy का option भी देता है. Policy का premium insurance company को जाता है, जबकि policy distribute करने के बदले बैंक को fee या commission मिल सकता है.
यानी बैंक की कमाई सिर्फ loan के interest तक सीमित नहीं रहती. Insurance distribution भी उसकी fee income का एक हिस्सा बन जाता है.
यहीं IRDAI के नए proposal की अहमियत सामने आती है.
Commission कम हुई तो बैंक की fee income पर दबाव
IRDAI ने insurance distributors के लिए commission को product, distribution channel और दूसरे factors के आधार पर सीमित करने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही credit-linked insurance products और loan के साथ insurance की compulsory bundling को लेकर भी बदलाव प्रस्तावित हैं.
इसे आसान उदाहरण से समझें. अगर किसी policy को बेचने पर बैंक को पहले ₹100 की commission मिलती थी और नई व्यवस्था में यह ₹70 हो जाती है, तो उसी policy से मिलने वाली fee income ₹30 कम हो जाएगी.
लेकिन बड़े बैंक के लिए असली सवाल है कि इस income का उसके कुल profit में कितना योगदान है?
Axis Bank में insurance income का वजन ज्यादा
Macquarie के analysis के मुताबिक FY26 में Axis Bank की insurance fee income उसकी कुल revenue का करीब 2.4 फीसदी थी. पहली नजर में यह हिस्सा छोटा लग सकता है.
लेकिन Profit Before Tax यानी PBT की बात करें तो insurance fee income का contribution करीब 12.5 फीसदी था. यानी revenue में insurance का हिस्सा सीमित है, लेकिन profit में इसका वजन काफी ज्यादा है.
HDFC Bank भी क्यों चर्चा में है?
HDFC Bank में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है. FY26 में insurance fee income कुल revenue का करीब 1.9 फीसदी थी, जबकि PBT में इसका contribution करीब 7.3 फीसदी रहा.
यानी Axis Bank की तुलना में exposure अलग हो सकता है, लेकिन HDFC Bank के लिए भी insurance distribution एक ऐसी fee income stream है, जिस पर proposed changes का असर नजर रखना जरूरी होगा.
हर बैंक पर असर एक जैसा नहीं होगा
यही वजह है कि सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कौन-सा बैंक insurance बेचता है. यह देखना जरूरी है कि उसकी कमाई में insurance fee income का योगदान कितना है.
Macquarie के आंकड़ों के मुताबिक FY26 में PBT contribution करीब:
- Axis Bank: 12.5 फीसदी
- HDFC Bank: 7.3 फीसदी
- Kotak Mahindra Bank: 5.8 फीसदी
- SBI: 2.6 फीसदी
- ICICI Bank: 0.6 फीसदी
इससे साफ होता है कि proposed commission changes का संभावित असर सभी बैंकों पर एक जैसा नहीं होगा.
सिर्फ commission ही नहीं, bundling rules भी अहम
IRDAI के proposal में loan के साथ insurance को compulsory तरीके से जोड़ने पर भी रोक का प्रस्ताव है. इससे उन distribution models पर असर पड़ सकता है, जहां loan disbursal के समय credit-linked insurance बेचा जाता है. Regulator ने bank और NBFC staff के लिए volume-linked या reward-linked insurance incentives पर भी restrictions प्रस्तावित की हैं.
हालांकि अभी इसे final rule नहीं माना जा सकता. यह consultation-stage proposal है और commission limits समेत कई provisions में बदलाव संभव है.
Investors को अब क्या देखना चाहिए?
अगर ये rules आगे लागू होते हैं, तो bank results में सिर्फ loan growth, NIM और NPA देखना पर्याप्त नहीं होगा. Insurance fee income भी एक महत्वपूर्ण metric बन सकती है.
खासकर Axis Bank और HDFC Bank जैसे lenders के मामले में यह देखना होगा कि commission income में संभावित कमी कितनी होती है और बैंक इसे दूसरी fee income, operating efficiency या दूसरे तरीकों से कितना offset कर पाते हैं.
यानी IRDAI का यह proposal सिर्फ insurance distributors की कहानी नहीं है. Bancassurance के जरिए कमाई करने वाले banks के लिए भी इसके असर को समझना जरूरी है.
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