भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी हफ्ते की शुरुआत IT सेक्टर के नाम रही. बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी इसी सेक्टर में देखने को मिली. Infosys के शेयर करीब 3% तक चढ़ गए, जबकि TCS, HCL Technologies और Tech Mahindra में भी करीब 2% तक की तेजी दर्ज की गई. इसके साथ ही Nifty IT Index भी 2% से ज्यादा मजबूत हुआ. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अचानक IT शेयरों में यह तेजी क्यों आई. क्या कंपनियों के कारोबार में कोई बड़ा सुधार हुआ है, AI को लेकर बनी चिंताएं कम हो गई हैं या फिर विदेशी निवेशकों का नजरिया बदलने लगा है.
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इन सवालों का जवाब सिर्फ कंपनियों के नतीजों में नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम, ब्याज दरों की उम्मीदों और विदेशी ब्रोकरेज Jefferies की बदली हुई राय में छिपा है.
अमेरिका-ईरान तनाव कम होने से बदला माहौल
पिछले कुछ दिनों से वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर थी. निवेशकों को आशंका थी कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं. तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता और ऐसी स्थिति में अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ब्याज दरें बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकता था.
हालांकि वीकेंड में दोनों देशों की ओर से तनाव कम करने के संकेत मिले. इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई. इससे बाजार को यह उम्मीद बनने लगी कि महंगाई पर दबाव कम रहेगा और Federal Reserve पहले की तुलना में ज्यादा सख्त रुख नहीं अपनाएगा.
Fed की उम्मीदों का सबसे ज्यादा फायदा IT सेक्टर को क्यों मिला
सवाल यह भी है कि अगर तेल की कीमतें गिरीं तो इसका फायदा सिर्फ IT सेक्टर को ही सबसे ज्यादा क्यों मिला.
दरअसल, IT कंपनियों की वैल्यूएशन भविष्य की कमाई पर काफी हद तक निर्भर करती है. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो भविष्य में मिलने वाली कमाई की मौजूदा वैल्यू कम हो जाती है. इसलिए टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर ब्याज दरों में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं.
यही वजह रही कि जैसे ही बाजार को लगा कि Federal Reserve का रुख नरम पड़ सकता है, सबसे पहले खरीदारी IT शेयरों में देखने को मिली.
Jefferies ने बदल दिया IT सेक्टर पर अपना नजरिया
हालांकि सोमवार की तेजी के पीछे सिर्फ ब्याज दरों की उम्मीदें ही जिम्मेदार नहीं थीं. एक बड़ा कारण वैश्विक ब्रोकरेज Jefferies की नई रिपोर्ट भी रही.
Jefferies लंबे समय से भारतीय IT सेक्टर पर Underweight रुख रखे हुए थी. यानी उसकी राय थी कि निवेशकों को इस सेक्टर में कम निवेश करना चाहिए. अब पहली बार उसने इस रुख को बदलते हुए IT सेक्टर से Underweight टैग हटा दिया और उसे Neutral कर दिया. इसके साथ ही उसने Infosys को अपने Model Portfolio में भी शामिल किया.
इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि Jefferies ने IT सेक्टर में लंबी तेजी की घोषणा कर दी है. बल्कि उसका मानना है कि सेक्टर का सबसे खराब दौर अब शायद पीछे छूट चुका है.
बड़ी गिरावट के बाद सस्ते हुए IT शेयर
Jefferies के मुताबिक पूरे साल 2026 के दौरान Nifty IT Index करीब 38% तक टूट चुका है. वहीं Infosys, TCS, HCL Technologies और Wipro जैसे बड़े IT शेयर अपने दो साल के उच्च स्तर से 35% से 50% तक नीचे आ चुके हैं.
इतनी बड़ी गिरावट के बाद इन कंपनियों की वैल्यूएशन पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आकर्षक दिखाई देने लगी है. यही वजह है कि अब इस सेक्टर को दोबारा देखने की जरूरत महसूस की जा रही है.
AI Trade का असर भी पड़ रहा है कम
Jefferies ने अपने नजरिए में बदलाव की दूसरी बड़ी वजह AI Trade को बताया है.
पिछले करीब डेढ़ साल के दौरान वैश्विक निवेशकों ने AI से जुड़ी कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया. Nvidia, Taiwan, South Korea और AI Ecosystem से जुड़ी कंपनियों में पैसा जाने के कारण भारत जैसे बाजारों से विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा बाहर चला गया. इसका असर भारतीय IT सेक्टर पर भी पड़ा.
अब स्थिति बदलती नजर आ रही है. AI पर हो रहे भारी निवेश और उससे मिलने वाले संभावित रिटर्न को लेकर सवाल उठने लगे हैं. ऐसे में Jefferies का मानना है कि AI Trade की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है. यदि ऐसा होता है तो भारत जैसे Emerging Markets दोबारा विदेशी निवेशकों के रडार पर आ सकते हैं.
विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटने के संकेत
बाजार के आंकड़े भी इसी दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं.
पिछले पांच हफ्तों के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 3 अरब डॉलर की शुद्ध खरीदारी की है. इसके उलट इससे पहले लगातार चार महीनों तक करीब 29 अरब डॉलर की बिकवाली देखने को मिली थी.
यानी लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे हैं.
क्या अब IT सेक्टर में Bull Market शुरू हो गया
हालांकि इन सभी सकारात्मक संकेतों के बावजूद Jefferies पूरी तरह आशावादी नहीं है.
ब्रोकरेज का मानना है कि FY26 से FY28 के दौरान IT कंपनियों की Revenue Growth Low to Mid Single Digit के दायरे में रह सकती है. दूसरी तरफ Infosys भी हाल ही में अपनी Growth Guidance घटा चुकी है.
यानी कारोबार से जुड़ी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं. इसलिए मौजूदा तेजी को Long Term Bull Market नहीं बल्कि Tactical Recovery या Relief Rally के रूप में देखा जा रहा है.
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर
आने वाले समय में IT सेक्टर की दिशा कई वैश्विक संकेत तय करेंगे.
अगर Federal Reserve का रुख नरम रहता है, कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, AI पर निवेश पूरी तरह नहीं रुकता और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, तो IT सेक्टर बाकी बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.
हालांकि अगर वैश्विक आर्थिक हालात कमजोर होते हैं या IT कंपनियों की ग्रोथ उम्मीद से कम रहती है, तो इस सेक्टर पर फिर दबाव भी लौट सकता है.
सोमवार की तेजी को सिर्फ Infosys, TCS या दूसरे IT शेयरों की एक दिन की बढ़त के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसके पीछे वैश्विक ब्याज दरों की बदलती उम्मीदें, अमेरिका-ईरान तनाव में कमी, AI Trade को लेकर बदलता नजरिया और Jefferies जैसी बड़ी ब्रोकरेज का बदला हुआ रुख जैसे कई बड़े संकेत छिपे हैं.
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