अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है. अब बैंक अकाउंट, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी और अन्य बड़े वित्तीय लेनदेन पर विभाग की पैनी नजर रहेगी. अगर ITR में दी गई जानकारी और विभाग के रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो टैक्स नोटिस मिलने की संभावना बढ़ सकती है.
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AIS और Form 26AS का मिलान जरूरी
नए नियमों के तहत अब Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS में मौजूद जानकारी का ITR से मिलान बेहद अहम हो गया है. अगर दोनों में कोई अंतर पाया जाता है या आय छिपाई जाती है, तो विभाग स्वत: जांच या नोटिस की कार्रवाई कर सकता है.
किन लेनदेन पर रहेगी नजर?
इनकम टैक्स विभाग अब कई तरह के वित्तीय लेनदेन पर डिजिटल तरीके से नजर रख रहा है. इनमें शामिल हैं:
- बैंक खाते में बड़ी रकम का लेनदेन
- म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश
- प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री
- बड़े क्रेडिट कार्ड भुगतान
- महंगी गाड़ियों की खरीद
- विदेशी यात्रा पर खर्च
इन सभी की जानकारी अलग-अलग संस्थानों से सीधे टैक्स विभाग तक पहुंचती है और AIS में दर्ज होती है.
गलत जानकारी देने पर हो सकती है कार्रवाई
अगर ITR में दिखाई गई आय और AIS के डेटा में अंतर मिलता है, तो टैक्सपेयर्स को जांच का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे मामलों में गलती सुधारने के लिए सीमित समय में रिवाइज्ड ITR दाखिल करने का मौका मिल सकता है. लेकिन जानबूझकर गलत जानकारी देने या फर्जी डिडक्शन का दावा करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
ईमानदार टैक्सपेयर्स को घबराने की जरूरत नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था टैक्स चोरी रोकने और सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गई है. जो लोग अपनी आय और निवेश की सही जानकारी देते हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, ITR दाखिल करने से पहले AIS और Form 26AS की जानकारी जरूर जांच लें ताकि किसी तरह का मिसमैच न रहे.
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