जापान ने ब्याज दर पर लिया बड़ा फैसला, भारत के शेयर बाजार में मचेगा हाहाकार? जान लीजिए क्या है पूरा मामला

सौरभ दीक्षित

• 12:22 PM • 18 Sep 2026

बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दर 1.25 फीसदी कर दी है. येन कैरी ट्रेड बदलने पर भारत के शेयर बाजार, विदेशी निवेश के रुख और रुपये की चाल पर असर दिख सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

नीति बोर्ड में फैसला 7-2 वोट से, दो सदस्य विरोध में रहे

अगस्त में हेडलाइन महंगाई 1.9 फीसदी और कोर महंगाई 1.7 रही

कमजोर येन से तेल, गैस और आयातित सामान महंगे पड़ रहे हैं

जापान के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ जापान ने अपनी पॉलिसी ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है. इसके बाद दर 1.25 प्रतिशत हो गई है. इस फैसले पर सिर्फ जापान ही नहीं, भारत समेत दूसरे बाजारों की भी नजर है.

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इसकी बड़ी वजह येन कैरी ट्रेड है. आसान भाषा में कहें तो जापान में कम ब्याज पर लिया गया पैसा दूसरे बाजारों में लगाया जाता रहा है. अब जापान में ब्याज दर बढ़ने और येन में मजबूती आने की आशंका से इस पैसे की दिशा बदल सकती है.

जापान ने ब्याज दर क्यों बढ़ाई.

बैंक ऑफ जापान को महंगाई को लेकर चिंता है. जापान का लक्ष्य 2 प्रतिशत के आसपास महंगाई को स्थिर रखना है. अगस्त में वहां हेडलाइन महंगाई 1.9 प्रतिशत और कोर महंगाई 1.7 प्रतिशत रही.

बैंक का मानना है कि अगर अभी सावधानी नहीं बरती गई तो आगे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. कमजोर येन भी चिंता की वजह है, क्योंकि इससे तेल, गैस, कच्चा माल और दूसरी बाहर से आने वाली चीजें महंगी पड़ती हैं. इससे बाहर से आने वाली महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है.

फैसले पर बोर्ड में क्या राय रही.

यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं हुआ. बैंक ऑफ जापान के नीति बोर्ड में 7-2 से मतदान हुआ.

बहुमत ने ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया.दो सदस्यों ने इसका विरोध किया.विरोध करने वाले सदस्यों का तर्क था कि कोर महंगाई अभी 2 प्रतिशत से नीचे है और जापान की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत नहीं दिख रही कि तुरंत दर बढ़ाई जाए.

दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान का कहना है कि 2 प्रतिशत के आसपास महंगाई को स्थिर रखना जरूरी है. इसी वजह से उसने अभी कदम उठाया.

31 साल वाली चर्चा में सही बात क्या है.

कई जगह यह कहा जा रहा है कि जापान ने 31 साल बाद ब्याज दर बढ़ाई है. लेकिन तकनीकी तौर पर यह बात पूरी तरह सही नहीं है.

जापान मार्च 2024 से अपनी बहुत ढीली ब्याज दर नीति को सामान्य करने की शुरुआत कर चुका था. सही बात यह है कि 1.25 प्रतिशत की पॉलिसी दर अप्रैल 1995 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है. इस बार बढ़ोतरी पिछली बढ़ोतरी के करीब 3 महीने बाद हुई, जबकि इससे पहले दो बढ़ोतरी के बीच करीब 6 महीने का अंतर था. इससे यह संकेत मिलता है कि बैंक महंगाई को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार को इस फैसले की पहले से उम्मीद थी.

येन कैरी ट्रेड का भारत से क्या संबंध है.

जब जापान में ब्याज दरें बहुत कम होती हैं, तब वहां से सस्ता कर्ज लेकर निवेशक दूसरे बाजारों में पैसा लगाते हैं. इसे येन कैरी ट्रेड कहा जाता है. लेकिन दर बढ़ने पर जापान से कर्ज लेना महंगा हो जाता है और इस तरीके का फायदा कम हो सकता है.

अगर इसके साथ येन मजबूत होता है, तो पहले लिया गया कर्ज चुकाना भी महंगा पड़ सकता है. ऐसे में कुछ निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर जापान की तरफ लौट सकते हैं. इसी प्रक्रिया को येन कैरी ट्रेड की अनवाइंडिंग कहा जाता है.

भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ सकता है.

अगर बड़े विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालते हैं, तो शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. विदेशी निवेश के रुख पर असर पड़ सकता है और रुपये में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव दिख सकता है.

शेयर market में तेज हलचल बढ़ सकती है.विदेशी निवेश के आने-जाने की रफ्तार बदल सकती है.रुपये में दबाव या तेजी, दोनों तरह की चाल दिख सकती है.

हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि जापान की दर बढ़ने के बाद भारत से पैसा तय रूप से निकल ही जाएगा. आगे का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि जापान आगे क्या रुख अपनाता है, येन कितना मजबूत होता है और दुनिया के बड़े निवेशक अपने निवेश में कितना बदलाव करते हैं.

फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि जापान ने महंगाई और कमजोर येन की चिंता के बीच अपनी पॉलिसी दर 1.25 प्रतिशत कर दी है. अब बाजार की नजर 3 चीजों पर रहेगी, येन की चाल, विदेशी निवेश का रुख और रुपये की स्थिति. अगर येन कैरी ट्रेड में बड़े पैमाने पर अनवाइंडिंग होती है, तो उसका असर भारत समेत दूसरे उभरते बाजारों में भी दिख सकता है.