रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. कंपनी का शुद्ध मुनाफा पिछले साल के मुकाबले 13.7 फीसदी बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, कारोबार से होने वाली आमदनी में 11.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. खास बात यह है कि 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद ये कंपनी के पहले तिमाही नतीजे हैं.
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कमाई और मुनाफे में कितनी बढ़ोतरी?
जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान जियो प्लेटफॉर्म्स को कारोबार से 40,475 करोड़ रुपये की आमदनी हुई. एक साल पहले इसी तिमाही में यह रकम 36,332 करोड़ रुपये थी. यानी कंपनी की आमदनी में 11.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, कंपनी का शुद्ध मुनाफा 7,375 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,387 करोड़ रुपये हो गया. इस तरह मुनाफे में 13.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. कंपनी की कुल आय भी 12.1 फीसदी बढ़कर 41,453 करोड़ रुपये रही. प्रति शेयर कमाई यानी EPS भी बढ़कर 9.38 रुपये हो गई, जो पिछले साल सितंबर तिमाही में 8.25 रुपये थी. EPS का मतलब है कि कंपनी ने हर शेयर पर कितना मुनाफा कमाया.
सितंबर तिमाही के नतीजे
| सितंबर 2026 | सितंबर 2025 | बदलाव | |
| ऑपरेशंस से आमदनी | ₹40,475 करोड़ | ₹36,332 करोड़ | +11.4% |
| कुल आय | ₹41,453 करोड़ | ₹36,986 करोड़ | +12.1% |
| टैक्स से पहले मुनाफा | ₹11,259 करोड़ | ₹9,937 करोड़ | +13.3% |
| शुद्ध मुनाफा | ₹8,387 करोड़ | ₹7,375 करोड़ | +13.7% |
| ARPU | ₹219 | ₹211 | +3.5% |
पिछली तिमाही के मुकाबले भी बेहतर प्रदर्शन
अगर जून 2026 की तिमाही से तुलना करें तो जियो प्लेटफॉर्म्स की आमदनी में 3.3 फीसदी और शुद्ध मुनाफे में करीब 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यानी कंपनी ने सालाना आधार पर ही नहीं, बल्कि पिछली तिमाही के मुकाबले भी बेहतर प्रदर्शन किया है. अप्रैल से सितंबर 2026 के छह महीनों में कंपनी की आमदनी 79,648 करोड़ रुपये रही. यह पिछले साल की इसी अवधि से 11.6 फीसदी ज्यादा है. इस दौरान शुद्ध मुनाफा 11.5 फीसदी बढ़कर 16,151 करोड़ रुपये पहुंच गया.
ARPU की रफ़्तार धीमी
कंपनी की ग्राहक संख्या और डेटा खपत में तो तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके मुकाबले ARPU यानी एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर की रफ़्तार सुस्त रही है। सितंबर तिमाही में ARPU में महज़ 3.5% की मामूली बढ़त दर्ज की गई है, जिसके साथ ये ₹211 से बढ़कर ₹219 प्रति माह पर पहुंच गया. इस धीमी रफ़्तार से ये साफ ज़ाहिर होता है कि कंपनी की ज्यादतर कमाई नए ग्राहकों के जुड़ने और डेटा के ज़्यादा इस्तेमाल से आ रही है, जबकि टैरिफ में बढ़ोतरी का योगदान इसमें कम रहा है.
खर्च बढ़ा, फाइनेंस कॉस्ट में सबसे तेज उछाल
कंपनी की कमाई बढ़ी है, लेकिन खर्च भी बढ़ा है. सितंबर तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का कुल खर्च 11.6 फीसदी बढ़कर 30,194 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान सबसे ज्यादा बढ़ोतरी फाइनेंस कॉस्ट में हुई. ये करीब 40 फीसदी बढ़कर 3,009 करोड़ रुपये पहुंच गई. फाइनेंस कॉस्ट का मतलब है कर्ज पर चुकाया जाने वाला ब्याज और उससे जुड़े खर्च. इसके अलावा डेप्रिसिएशन यानी संपत्तियों की कीमत में समय के साथ होने वाली कमी का लेखा-जोखा 14 फीसदी बढ़कर 7,611 करोड़ रुपये रहा.
कंपनी पर कितना कर्ज है?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने बैंक कर्ज में कमी की है. मार्च 2026 में कंपनी पर लंबी और छोटी अवधि का कुल बैंक कर्ज 70,781 करोड़ रुपये था. सितंबर 2026 तक यह घटकर 58,943 करोड़ रुपये रह गया. हालांकि, बैंक कर्ज के अलावा कंपनी पर स्पेक्ट्रम की किस्तों का भुगतान भी बाकी है. सितंबर के अंत तक स्पेक्ट्रम से जुड़ी यह देनदारी करीब 1.02 लाख करोड़ रुपये थी. यानी बैंक कर्ज घटने के बावजूद कंपनी पर स्पेक्ट्रम भुगतान की बड़ी जिम्मेदारी बनी हुई है.
कैश की स्थिति कैसी है?
कंपनी के कारोबार से अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 41,702 करोड़ रुपये का नकद आया. एक साल पहले इसी अवधि में ये रकम 39,436 करोड़ रुपये थी. वहीं, नेटवर्क और स्पेक्ट्रम जैसी संपत्तियों पर कंपनी का खर्च घटा है. इस तरह के निवेश को कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत खर्च कहा जाता है. छह महीने में यह खर्च घटकर 10,637 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 20,693 करोड़ रुपये था. सितंबर 2026 के अंत में जियो प्लेटफॉर्म्स के पास 16,815 करोड़ रुपये का कैश था. कंपनी की कुल संपत्ति 6.23 लाख करोड़ रुपये बताई गई है.
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