Gold Silver Price Crash Update: ग्लोबल मार्केट में पिछले कुछ समय से सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्डतोड़ तेजी देखने को मिल रही थी, लेकिन हाल ही में आई भारी गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है. ऑल-टाइम हाई छूने के बाद कीमती धातुओं में आए इस तेज करेक्शन के बीच, दुनिया के दिग्गज ब्रोकरेज हाउस और ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन (JPMorgan) ने सोने और चांदी की कीमतों को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट और भविष्यवाणी जारी की है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद कमोडिटी मार्केट में हलचल तेज हो गई है और निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे गेम कैसे पलटने वाला है.
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हमारी सहयोगी वेबसाइट Biz Tak की वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, जेपी मॉर्गन ने साल 2026 के लिए सोने के औसत प्राइस टारगेट में कुछ कटौती की है. बैंक ने इसके पीछे शॉर्ट-टर्म (कम अवधि) में मांग की रफ्तार धीमी होने को मुख्य वजह बताया है. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि जेपी मॉर्गन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में क्या बड़े दावे किए हैं और आने वाले महीनों में सोने-चांदी की चाल कैसी रहने वाली है.
जेपी मॉर्गन ने क्यों घटाई सोने की अनुमानित कीमत?
ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन ने साल 2026 के लिए अपने पहले के गोल्ड प्राइस फोरकास्ट को $5,708 प्रति औंस से घटाकर $5,243 प्रति औंस कर दिया है. विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल शॉर्ट-टर्म में निवेशकों की दिलचस्पी सोने की तरफ थोड़ी ठंडी पड़ी है, जिसके चलते मांग में सुस्ती देखी जा रही है.
इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें थोड़ी धूमिल हुई हैं, बल्कि ऊर्जा आधारित महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरें ऊंची रहने या बढ़ने की आशंका बढ़ गई है. जब भी ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो बिना ब्याज वाले सोने में निवेशकों का कनविक्शन (विश्वास) थोड़ा कम हो जाता है.
गिरावट सिर्फ एक 'पॉज' है, स्ट्रक्चरल बदलाव नहीं
भले ही जेपी मॉर्गन ने अपने औसत टारगेट में थोड़ी कटौती की है, लेकिन उसने साफ किया है कि सोने में आई यह गिरावट केवल एक ठहराव (Pause) है, न कि बाजार का रुख बदलना. बैंक का लॉन्ग-टर्म बुलिश (तेजी का) नजरिया अभी भी बरकरार है. जेपी मॉर्गन का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ते राजकोषीय जोखिम, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Fracturing) और अमेरिकी नीतियों की अनिश्चितता के चलते सोने में लॉन्ग-टर्म की तेजी को कोई खतरा नहीं है. बैंक के मुताबिक, साल के अंत तक सोना एक बार फिर रफ्तार पकड़कर $6,000 प्रति औंस के स्तर को छू सकता है.
ईरान संकट और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर टिकी नजरें
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोने की कीमतों में अगली बड़ी रिकवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि मिडिल ईस्ट (खासकर ईरान संकट) में क्या मोड़ आता है. जेपी मॉर्गन के विश्लेषक जून महीने में 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के संभावित रूप से दोबारा खुलने की उम्मीद कर रहे हैं. यदि यह संकट सुलझता है, तो महंगाई का जोखिम कम होगा, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड की मजबूती कमजोर पड़ेगी. ऐसा होने पर सोने में फिर से शानदार रिकवरी आएगी और यह $4,900 से $5,100 प्रति औंस के रेजिस्टेंस लेवल को पार कर सकता है.
चांदी को लेकर क्या है आउटलुक?
चांदी की बात करें तो जनवरी में $121.64 प्रति औंस का ऐतिहासिक शिखर छूने के बाद, इसमें भी अच्छा-खासा करेक्शन देखा गया है. हालांकि, जेपी मॉर्गन को उम्मीद है कि साल 2026 के लिए चांदी का औसत भाव $81 प्रति औंस के आसपास रह सकता है, जो कि पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है. अन्य बैंकों जैसे गोल्डमैन सैक्स और सिटीग्रुप का मानना है कि ग्रीन एनर्जी और सोलर इंडस्ट्री में भारी इस्तेमाल के चलते चांदी की फिजिकल डिमांड बनी रहेगी, जिससे आने वाले महीनों में चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा वोलेटिलिटी और बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है.
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