JPMorgan का Nifty पर बड़ा दांव, 27,000 का लक्ष्य बरकरार, इन सेक्टरों और शेयरों पर भरोसा

NewsTak Web

• 12:45 PM • 18 Aug 2026

बाजार में गिरावट के बीच जेपीमॉर्गन ने निफ्टी 50 के लिए 27,000 का लक्ष्य दोहराया है. जून तिमाही की मजबूत कमाई, बैंकिंग, घरेलू मांग और बेहतर अनुमान से आगे तेजी की उम्मीद बनी है.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

जून तिमाही में कंपनियों की आय और मुनाफा दोनों मजबूत रहे

करीब 58 प्रतिशत कंपनियों ने अनुमान से बेहतर नतीजे देकर भरोसा बढ़ाया

बैंकिंग, इंडस्ट्रियल और उपभोक्ता खर्च वाले हिस्सों ने कमाई को सहारा दिया

शेयर बाजार में लगातार गिरावट के बीच निवेशकों के लिए राहत की खबर आई है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने Nifty 50 के लिए 27,000 का लक्ष्य बरकरार रखा है. यानी मौजूदा स्तर से बाजार में अच्छी तेजी की गुंजाइश अभी भी ब्रोकरेज को दिखाई दे रही है.JPMorgan का यह भरोसा सिर्फ बाजार की उम्मीदों पर आधारित नहीं है. ब्रोकरेज के मुताबिक भारतीय कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं. FY27 की शुरुआत में कंपनियों की कमाई में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है और अब earnings growth कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई सेक्टरों में दिखाई दे रही है.

Read more!

निफ्टी के 3 संभावित अनुमान

  • Base Case में Nifty 27,000 तक जा सकता है
  • Bull Case में Nifty 30,000 तक जा सकता है
  • Bear Case में Nifty 20,500 तक टूट सकता है

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 27,000 कोई गारंटी नहीं है. ये ब्रोकरेज का मुख्य अनुमान है. अगर कमाई की रफ्तार और घरेलू अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर रहती है, तो 30,000 तक का स्तर भी संभव माना गया है. वहीं, कच्चे तेल में तेज उछाल, भू-राजनीतिक तनाव या कमाई में बड़ा झटका आने पर बाजार दबाव में आ सकता है.

जून तिमाही के नतीजों से भरोसा

जेपीमॉर्गन के मुताबिक, MSCI India इंडेक्स की कंपनियों की जून तिमाही में आय करीब 19 प्रतिशत बढ़ी. मुनाफा करीब 16 प्रतिशत बढ़ा. रिपोर्ट के अनुसार, जून 2024 के बाद यह सबसे मजबूत कमाई बढ़त रही.ब्रोकरेज ने कहा कि करीब 58 प्रतिशत कंपनियों ने उसके मुनाफे के अनुमान से बेहतर नतीजे दिए. यही बात इस रिपोर्ट को अहम बनाती है, क्योंकि मजबूती सिर्फ कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं दिख रही है. अलग-अलग सेक्टरों की कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे कमाई का चक्र मजबूत होने का संकेत मिला है.

किन सेक्टरों ने दी सबसे ज्यादा ताकत

रिपोर्ट के मुताबिक, कमाई बढ़त अब ज्यादा फैली हुई दिख रही है. इसमें खास तौर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियां, औद्योगिक कंपनियां और जरूरत से ऊपर खर्च वाली उपभोक्ता कंपनियां आगे रहीं. दूसरी तरफ, ऊर्जा सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा.जेपीमॉर्गन का कहना है कि बाजार की कमाई की कहानी अब सिर्फ कुछ बड़े सेक्टरों पर निर्भर नहीं है. यही वजह है कि ब्रोकरेज का नजरिया अभी भी सकारात्मक बना हुआ है.

कमाई के आगे के अनुमान भी सुधरे

ब्रोकरेज के मुताबिक, पिछले एक महीने में कारोबारी साल 2027 के लिए साझा कमाई अनुमान में करीब 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. यह बदलाव कुछ बड़ी कंपनियों के अनुमान बढ़ने से आया है.

  • HDFC Bank 
  • Indusind Bank
  • AxisS Bank
  • Bharti Airtel 
  • Hindalco

शेयर बाजार सिर्फ आज के मुनाफे पर नहीं चलता. निवेशक आगे की कमाई भी देखते हैं. जब आने वाले समय के कमाई अनुमान बढ़ते हैं, तो शेयर के भाव को सहारा मिलता है.

घरेलू मांग पर भरोसा

जेपीमॉर्गन का मानना है कि घरेलू मांग से जुड़ी कंपनियां आगे कमाई बढ़त को सहारा दे सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक बढ़त को लेकर चिंता जरूर है, लेकिन भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था इन झटकों को कुछ हद तक संभाल सकती है.ब्रोकरेज को उम्मीद है कि पूरे वित्त वर्ष 27 में कमाई की रफ्तार पहली तिमाही के मुकाबले और तेज हो सकती है. अगर ऐसा होता है, तो बाजार के लिए यह एक मजबूत सहारा बन सकता है.

जेपीमॉर्गन को कौन से सेक्टर ज्यादा पसंद हैं.

  •  बैंकिंग और वित्तीय कंपनियां, जेपीमॉर्गन को यहां कमाई बढ़त मजबूत रहने की उम्मीद है. एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसी कंपनियों के कमाई अनुमान में सुधार का भी जिक्र किया गया है
  • औद्योगिक कंपनियां, रिपोर्ट के मुताबिक, ढांचागत खर्च, विनिर्माण विस्तार, बिजलीकरण, रक्षा आधुनिकीकरण और निजी पूंजी खर्च से इस हिस्से को सहारा मिल सकता है
  • Consumer Discretionary, अगर घरेलू खपत मजबूत रहती है और लोगों की आय व खर्च बढ़ता है, तो इस हिस्से की कंपनियों को फायदा मिल सकता है
  • Materials, हिंडाल्को जैसी कंपनी के कमाई अनुमान में सुधार का जिक्र किया गया है, हालांकि इस हिस्से में उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है

कौन से बड़े जोखिम बने हुए हैं

  • अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से जुड़ी बातचीत, अगर इसमें कोई नकारात्मक मोड़ आता है, तो निर्यात पर निर्भर कंपनियों पर असर पड़ सकता है.
  • कच्चा तेल, ब्रेंट कच्चा तेल 91 डॉलर के ऊपर पहुंच चुका है. लंबे समय तक महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते, दोनों के लिए परेशानी बन सकता है.
  • रुपया, अगर कच्चा तेल महंगा रहता है और डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.
  • मानसून, ग्रामीण मांग और कई उपभोक्ता हिस्सों के लिए मानसून अहम है.
  • ब्याज दरों में बदलाव, भारतीय रिजर्व बैंक का नकदी और महंगाई पर रुख बैंकिंग और खपत, दोनों को प्रभावित कर सकता है.

कुल मिलाकर, जेपीमॉर्गन का कहना है कि कंपनियों की कमाई में मजबूती बाजार के लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकती है. हालांकि 27,000 का स्तर पक्का नहीं माना जा सकता, लेकिन रिपोर्ट यह जरूर दिखाती है कि बाजार की अगली चाल का बड़ा आधार कमाई, घरेलू मांग और जोखिमों की दिशा होगी.