दक्षिण कोरिया का बाजार क्यों टूटा, Samsung और SK Hynix में भारी गिरावट

दक्षिण कोरिया का कोस्पी दो दिन में 10 प्रतिशत टूट गया. एआई चिप शेयरों में बिकवाली, फेड की सख्ती, मेटा और एप्पल की खबरों से निवेशकों की चिंता काफी बढ़ी.

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संदीप शर्मा

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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कोरिया एक्सचेंज ने तेज उतार चढ़ाव के बीच 20 मिनट कारोबार रोका

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अमेरिका में माइक्रोन और सैंडिस्क के शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा फिसले

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एप्पल की चीन की कंपनियों से बातचीत ने प्रतिस्पर्धा की चिंता बढ़ाई

दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में गुरुवार को तेज गिरावट और गहरी हो गई. वहां का प्रमुख सूचकांक कोस्पी एक समय 8.2 प्रतिशत यानी 687 अंक तक टूट गया. यह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र की गिरावट रही, और दो दिन में कुल गिरावट 10 प्रतिशत तक पहुंच गई.इस बिकवाली की बड़ी वजह एआई से जुड़ी चिप कंपनियों के शेयरों में कमजोरी रही. मेटा के अतिरिक्त कंप्यूटिंग क्षमता बेचने की योजना की खबर के बाद बाजार में यह चिंता बढ़ी कि एआई ढांचे में जरूरत से ज्यादा निवेश हो गया है. अमेरिका में प्रौद्योगिकी शेयरों की रात भर की कमजोरी का असर भी एशियाई बाजारों पर दिखा.

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कोस्पी पर दबाव क्यों बढ़ा

- SK Hynix का शेयर 14 प्रतिशत से ज्यादा गिरा. Samsung Electronics का शेयर 9 प्रतिशत से ज्यादा टूटा.  कोरिया एक्सचेंज ने बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच 20 मिनट के लिए कारोबार रोका.  ये दोनों कंपनियां मिलकर सूचकांक का आधे से ज्यादा हिस्सा बनाती हैं.अमेरिका में भी चिप कंपनियों के शेयर दबाव में रहे.Micron Technology और Sandisk के शेयर पिछले सत्र में 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरे थे. इससे एशिया में निवेशकों का भरोसा और कमजोर हुआ.

AI की तेजी पर सवाल

ताजा गिरावट के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि AI से जुड़ी चिप कंपनियों में आई लंबी तेजी कितनी टिकाऊ है. पिछले एक साल में दुनिया भर की टेक कंपनियों ने नए एआई मॉडल बनाने और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए तेजी से निवेश किया. इसी वजह से हाई बैंडविड्थ मेमोरी चिप की मांग बढ़ी और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों में निवेश भी तेज हुआ.लेकिन अब बाजार का रुख बदलता दिख रहा है. ब्लूमबर्ग से बात करते हुए यूनियन बैंकेर प्रिवे के प्रबंध निदेशक वेई-सर्न लिंग ने कहा कि मेटा का अतिरिक्त कंप्यूटिंग क्षमता बेचने पर विचार यह संकेत दे सकता है कि कंपनी उसके इस्तेमाल को लेकर जूझ रही है या फिर उसने जरूरत से ज्यादा क्षमता बना ली है. उनके मुताबिक, इसका असर दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों पर नकारात्मक हो सकता है, जहां एआई सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों का वजन बहुत ज्यादा है.

Apple की खबर से भी बढ़ी चिंता

बाजार पर एक और दबाव यह रहा कि एप्पल दो चीनी सेमीकंडक्टर कंपनियों से चिप लेने के लिए बातचीत कर रही है. इससे यह चिंता बढ़ी कि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स को आगे चलकर ज्यादा प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है.

पहले से दिख रहे थे गर्मी के संकेत

ताजा गिरावट से पहले भी कई जानकार बाजार में जरूरत से ज्यादा तेजी के संकेत देख रहे थे. एसके हाइनिक्स का शेयर करीब 223 प्रतिशत चढ़ चुका था, जबकि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स में 123 प्रतिशत की बढ़त आई थी. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी कई मामलों में कंपनियों के बुनियादी हालात से काफी आगे निकल गई थी.

अमेरिकी केंद्रीय बैंक का असर

निवेशकों की चिंता अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व को लेकर भी बढ़ी. नए प्रमुख केविन वार्श के तहत ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की उम्मीद बाजार पर भारी पड़ी. बुधवार को वार्श ने 2 प्रतिशत खुदरा महंगाई लक्ष्य पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि आसान मौद्रिक नीति की उम्मीद करने वालों को निराशा हो सकती है, भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्याज दर घटाने की बात कर रहे हों.फिलहाल कारोबारी 15-16 सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की 70 प्रतिशत संभावना मान रहे हैं. इससे जोखिम वाले बाजारों में दबाव बढ़ा है, खासकर वहां जहां टेक और चिप शेयरों का वजन ज्यादा है.

फिर भी साल भर का प्रदर्शन मजबूत

हाल की गिरावट के बावजूद, 2026 में कोस्पी अब भी दुनिया के बड़े शेयर सूचकांकों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में बना हुआ है. इस साल अब तक इसमें 77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है. इस तेजी की बड़ी वजह एआई उछाल से फायदा पाने वाली सेमीकंडक्टर कंपनियों में आई मजबूत रैली रही.हालांकि, यही बड़ी ताकत अब कमजोरी भी बनती दिख रही है. दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार कुछ गिनी-चुनी चिप कंपनियों पर काफी निर्भर है. ऐसे में एआई सेक्टर को लेकर भावना में तेज बदलाव आते ही वहां का पूरा बाजार ज्यादा चोट खा सकता है.कुल मिलाकर, दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में आई ये तेज गिरावट केवल एक दिन की कमजोरी नहीं मानी जा रही. AI निवेश की रफ्तार, चिप कंपनियों की मांग, अमेरिकी ब्याज दरों का रुख और बढ़ती प्रतिस्पर्धा, इन सबने मिलकर दबाव बनाया है. आगे बाजार की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि AI से जुड़ी मांग कितनी मजबूत रहती है और निवेशकों का भरोसा कितनी जल्दी लौटता है.

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