सरकारी बीमा कंपनी LIC के शेयर में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. कारोबार के दौरान शेयर करीब 9% टूटकर 390.50 रुपये तक आ गया. शेयर में यह गिरावट सरकार की ओर से ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने के ऐलान के बाद आई.
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सरकार बेच रही है 6.5% तक हिस्सेदारी
सरकार ने सोमवार को घोषणा की कि वह LIC में अपनी 2.5% हिस्सेदारी बेस ऑफर के तहत बेचेगी. इसके अलावा 4% अतिरिक्त हिस्सेदारी ग्रीन शू ऑप्शन के जरिए बेचने का विकल्प भी रखा गया है. यानी कुल मिलाकर सरकार 6.5% तक हिस्सेदारी बेच सकती है.सरकार ने OFS का फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो सोमवार के बंद भाव 428.50 रुपये से करीब 11% कम है. यही वजह रही कि बाजार खुलते ही LIC के शेयर पर दबाव बढ़ गया.
OFS में कितने शेयर बिकेंगे?
अगर ग्रीन शू ऑप्शन का पूरा इस्तेमाल होता है, तो सरकार करीब 82 करोड़ शेयर बेचेगी. फ्लोर प्राइस के हिसाब से इस OFS का आकार करीब 31,410 करोड़ रुपये होगा.यह OFS 4 अगस्त को गैर-रिटेल निवेशकों के लिए खुला है, जबकि 5 अगस्त को रिटेल निवेशक इसमें आवेदन कर सकेंगे.
शेयर क्यों टूटा?
बाजार में आमतौर पर जब किसी बड़ी कंपनी के शेयर डिस्काउंट पर बेचे जाते हैं, तो मौजूदा शेयर की कीमत भी उसी स्तर के करीब आने लगती है. LIC के मामले में भी यही हुआ. 382 रुपये के फ्लोर प्राइस ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला और शेयर में बिकवाली बढ़ गई.
सरकार की हिस्सेदारी कितनी है?
30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, LIC में सरकार की 96.5% हिस्सेदारी है. वहीं, करीब 20.92 लाख रिटेल निवेशकों के पास कंपनी की 1.55% हिस्सेदारी है.सरकार धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी घटा रही है ताकि कंपनी न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) के नियमों का पालन कर सके.
देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी
LIC भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है और मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से देश की दूसरी सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भी है. कंपनी को दुनिया के सबसे मजबूत इंश्योरेंस ब्रांड्स में भी गिना जाता है. हाल ही में LIC ने 24 घंटे में सबसे ज्यादा जीवन बीमा पॉलिसियां बेचने का Guinness World Record भी बनाया है.
आगे क्या देखना होगा?
बाजार की नजर अब OFS को मिलने वाले निवेशकों के रिस्पॉन्स पर रहेगी. अगर OFS को अच्छी मांग मिलती है, तो शेयर में स्थिरता लौट सकती है. वहीं, सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री विनिवेश (Disinvestment) कार्यक्रम और LIC में सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
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