भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC को HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. इस मंजूरी के बाद LIC बैंक में अपनी हिस्सेदारी मौजूदा स्तर से बढ़ाकर अधिकतम 9.99% तक कर सकती है. यह फैसला HDFC Bank में LIC की मौजूदगी को और मजबूत करने का रास्ता खोलता है. HDFC Bank ने 19 अगस्त 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि RBI ने उसी दिन एक पत्र के जरिए LIC को यह मंजूरी दी है. LIC ने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए RBI के पास आवेदन किया था, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति दी.
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अभी HDFC Bank में LIC की कितनी हिस्सेदारी?
14 अगस्त 2026 तक LIC के पास HDFC Bank की 4.11% हिस्सेदारी थी. RBI की नई मंजूरी के बाद LIC बैंक की कुल Paid-up Share Capital या Voting Rights में 9.99% तक हिस्सेदारी रख सकती है. इस हिसाब से LIC के पास मौजूदा हिस्सेदारी के अलावा करीब 5.88% हिस्सेदारी और खरीदने की गुंजाइश है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि LIC तुरंत इतनी हिस्सेदारी खरीद लेगी. RBI ने अधिकतम हिस्सेदारी की सीमा तक खरीद की अनुमति दी है. अगर LIC इस पूरी अतिरिक्त हिस्सेदारी को खरीदती है, तो HDFC Bank में उसकी हिस्सेदारी करीब 10% के स्तर पर पहुंच सकती है.
RBI की मंजूरी किन शर्तों के साथ मिली?
RBI की अनुमति बिना शर्त नहीं है. LIC को HDFC Bank में हिस्सेदारी बढ़ाते समय कई लागू नियमों और कानूनों का पालन करना होगा. इसमें Banking Regulation Act, 1949, RBI के 2025 के Shareholding नियम, Foreign Exchange Management Act यानी FEMA, SEBI के नियम और अन्य लागू कानूनी प्रावधान शामिल हैं. इसका मतलब है कि LIC को हिस्सेदारी बढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान नियामकीय सीमाओं और संबंधित अनुपालनों का ध्यान रखना होगा.
HDFC Bank के लिए क्यों अहम है यह मंजूरी?
HDFC Bank देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल है और LIC देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनियों में से एक है. ऐसे में बैंक में LIC की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना दोनों संस्थानों के निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण है. LIC पहले से ही HDFC Bank में एक प्रमुख संस्थागत निवेशक है. अब 9.99% तक हिस्सेदारी बढ़ाने की अनुमति मिलने से उसके पास बैंक में अपना निवेश बढ़ाने का विकल्प खुल गया है. हालांकि, हिस्सेदारी बढ़ाने का वास्तविक फैसला LIC की निवेश रणनीति और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
पहली तिमाही में HDFC Bank का प्रदर्शन कैसा रहा?
LIC को यह मंजूरी ऐसे समय मिली है जब HDFC Bank ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं. अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में बैंक का Standalone Net Profit ₹19,059.72 करोड़ रहा. पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले इसमें करीब 4.98% की बढ़ोतरी हुई. यानी बैंक ने मुनाफे के मोर्चे पर सालाना आधार पर ग्रोथ दर्ज की है.
NII में भी बढ़ोतरी, लेकिन अनुमान से कम रहा आंकड़ा
HDFC Bank की Net Interest Income यानी NII भी पहली तिमाही में बढ़ी. अप्रैल-जून तिमाही में बैंक की NII 6.7% बढ़कर ₹33,535.95 करोड़ रही. हालांकि, यह आंकड़ा बाजार के अनुमान ₹34,353 करोड़ से कम रहा. यानी ब्याज से होने वाली आय में बढ़ोतरी के बावजूद बैंक बाजार की उम्मीदों के स्तर तक नहीं पहुंच सका. बैंक का Net Interest Margin यानी NIM कुल एसेट के आधार पर 3.26% रहा. वहीं, ब्याज कमाने वाले एसेट के आधार पर NIM 3.40% दर्ज किया गया.
Average Deposits में 10.8% की बढ़ोतरी
HDFC Bank के Average Deposits में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली. जून 2026 तिमाही में बैंक का औसत जमा सालाना आधार पर 10.8% बढ़कर ₹30,386 अरब हो गया. बैंकिंग कारोबार में Deposit Growth काफी अहम मानी जाती है, क्योंकि इससे बैंक के पास लोन देने के लिए फंडिंग का आधार मजबूत होता है. HDFC Bank के मामले में जमा में दोहरे अंकों की बढ़ोतरी बैंक के Deposit Franchise की मजबूती को दिखाती है.
Loan Book भी 13.3% बढ़ी
बैंक की कुल Loan Book यानी Advances में भी अच्छी ग्रोथ दर्ज हुई. जून 2026 के अंत तक HDFC Bank की कुल Advances 13.3% बढ़कर ₹30,115 अरब हो गई. इससे संकेत मिलता है कि बैंक के कर्ज कारोबार में विस्तार जारी रहा. Deposit और Loan Book दोनों में बढ़ोतरी बैंक की बैलेंस शीट के विस्तार को दिखाती है.
Asset Quality पर नजर
हालांकि, Asset Quality के मोर्चे पर मामूली बदलाव देखने को मिला. जून 2026 के अंत में HDFC Bank का Gross NPA बढ़कर 1.17% हो गया. मार्च 2026 के अंत में Gross NPA 1.15% था. यानी तिमाही आधार पर Gross NPA में हल्की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में आने वाली तिमाहियों में बैंक की Asset Quality पर भी निवेशकों की नजर रहेगी, खासकर तब जब बैंक की Loan Book लगातार बढ़ रही है.
LIC के लिए क्या मायने रखती है यह मंजूरी?
RBI की मंजूरी LIC को HDFC Bank में अपने निवेश को बढ़ाने का विकल्प देती है. फिलहाल 4.11% हिस्सेदारी के साथ LIC बैंक की प्रमुख संस्थागत निवेशकों में है और अब वह अपनी हिस्सेदारी को करीब 10% तक ले जाने की स्थिति में है. हालांकि, LIC वास्तव में कितने शेयर खरीदेगी और किस समय खरीदेगी, यह आगे की निवेश रणनीति पर निर्भर करेगा. फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि RBI ने LIC के लिए HDFC Bank में हिस्सेदारी बढ़ाने की अधिकतम सीमा को 9.99% तक खोल दिया है. यानी आने वाले समय में HDFC Bank की Shareholding Pattern में LIC की हिस्सेदारी बढ़ती है या नहीं, इस पर बाजार की नजर बनी रहेगी.
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