Share Market Fall : एक दिन में निवेशकों के 10.52 लाख करोड़ रुपये स्वाहा, शेयर बाजार में भारी गिरावट

तनीषा त्यागी

• 05:33 PM • 08 Oct 2026

8 अक्टूबर को शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली और निवेशकों की संपत्ति में एक दिन में 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई. सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव के बीच रेपो रेट बढ़ोतरी, कच्चे तेल की महंगाई, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार की चिंता बढ़ा दी.

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8 अक्टूबर को शेयर बाजार में ऐसी तेज बिकवाली देखने को मिली, जिसका सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा. बाजार में गिरावट के बाद बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में करीब 10.52 लाख करोड़ रुपये घट गया. इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. एक तरफ बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना हुआ है, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारण बाजार के लिए परेशानी बढ़ा रहे हैं.

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एक दिन में 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी

बाजार में हुई तेज बिकवाली के चलते निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, निवेशकों की संपत्ति में 10,51,614.06 करोड़ रुपये यानी करीब 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है. बुधवार को बाजार बंद होने के समय बीएसई पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,72,35,273.39 करोड़ रुपये था. गुरुवार के कारोबार के बाद यह घटकर 4,61,83,659.33 करोड़ रुपये रह गया. यानी एक ही कारोबारी दिन में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी देखने को मिली. यहां यह समझना जरूरी है कि बाजार पूंजीकरण में 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी का मतलब यह नहीं है कि निवेशकों के बैंक खातों से इतनी रकम निकल गई. शेयरों की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है और इसी वजह से निवेशकों की संपत्ति का मूल्य भी घटा है.

पूरे हफ्ते बाजार पर बना हुआ है दबाव

भारतीय शेयर बाजार के लिए यह पूरा हफ्ता उतार-चढ़ाव वाला रहा है. सोमवार को बाजार खुलने के साथ तेजी देखने को मिली थी. मंगलवार को भी बाजार की स्थिति कुछ हद तक संभली हुई नजर आई. लेकिन बुधवार आते-आते बाजार पर दबाव बढ़ गया. इसके बाद गुरुवार को बिकवाली और तेज हो गई. सेंसेक्स और निफ्टी समेत प्रमुख बाजार सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला. यानी सप्ताह की शुरुआत में बाजार में जो मजबूती दिखाई दे रही थी, वह बाद के कारोबारी सत्रों में टिक नहीं पाई.

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?

शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे कई कारण बताए गए हैं. इनमें रिजर्व बैंक का रेपो दर बढ़ाने का फैसला, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली अहम वजहें हैं. रिजर्व बैंक ने तीन दिन चली बैठक के बाद रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया.ब्याज दर में बढ़ोतरी का असर बाजार के माहौल पर देखने को मिला. ब्याज दरों में बदलाव का असर कंपनियों की फंडिंग लागत और निवेश से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है. ऐसे में बाजार में इसका असर दिखाई देना स्वाभाविक है.

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई चिंता

बाजार में गिरावट के बीच वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी चिंता का कारण बनी हुई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से रुपये और देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. यही वजह है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर शेयर बाजार के निवेशकों के सेंटीमेंट पर भी देखने को मिला.

रुपये की कमजोरी भी बनी दबाव की वजह

भारतीय रुपये की लगातार कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है. रुपये पर दबाव बढ़ने से आयात महंगा हो सकता है. इसका असर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जिनकी लागत आयात पर निर्भर करती है. ऐसे माहौल में निवेशक बाजार को लेकर ज्यादा सतर्क हो जाते हैं. रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत एक साथ बाजार के लिए चिंता बढ़ाने वाली स्थिति बनाती हैं.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी इस समय काफी अहम हैं. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार में शेयरों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार में बिकवाली का माहौल मजबूत हो सकता है. मौजूदा गिरावट में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली को एक बड़ी वजह माना जा रहा है.

निवेशकों को आगे किन बातों पर नजर रखनी होगी?

अब बाजार की नजर कई अहम संकेतों पर रहेगी. सबसे पहले रिजर्व बैंक की ब्याज दर से जुड़े फैसले और आगे की दिशा महत्वपूर्ण होगी. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री भी बाजार के लिए अहम रहेगी. अगर इन मोर्चों पर दबाव बना रहता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. वहीं इन संकेतों में सुधार आने पर निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है. फिलहाल 8 अक्टूबर की तेज गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि बाजार में निवेशकों को कई मोर्चों पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है. एक ही दिन में 10.52 लाख करोड़ रुपये के बाजार मूल्य में कमी ने इस गिरावट की गंभीरता को सामने ला दिया है. अब आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार किस दिशा में जाता है, इस पर निवेशकों की नजर रहेगी.