Market Outlook : शेयर बाजार में बीता हफ्ता निवेशकों के लिए चुनौती भरा रहा. भारतीय बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव मिडकैप शेयरों में देखने को मिला. बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही. इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया. दूसरी तरफ सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई. अब निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि क्या अगले हफ्ते शेयर बाजार में सुधार देखने को मिलेगा या बिकवाली का दबाव बना रहेगा. बाजार की अगली चाल समझने के लिए सूचकांकों, क्षेत्रों और चुनिंदा शेयरों के प्रदर्शन पर नजर डालना जरूरी है.
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निफ्टी 2.36 फीसदी गिरा, बैंक निफ्टी में भी कमजोरी
बीते हफ्ते निफ्टी 2.36 फीसदी गिरकर 22,600 पर बंद हुआ. इस दौरान सूचकांक में 546.15 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. इससे साफ है कि बाजार में खरीदारी के मुकाबले बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा. बैंकिंग शेयर भी इस दबाव से बच नहीं पाए. बैंक निफ्टी 2.79 फीसदी टूटकर 54,287.35 के स्तर पर बंद हुआ. इसमें 1,556.65 अंकों की गिरावट आई. बैंकिंग सूचकांक में कमजोरी का मतलब है कि इस हफ्ते बड़े बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी कमजोर रही. हालांकि, बाजार की सबसे बड़ी चिंता केवल बड़े सूचकांकों की गिरावट नहीं रही. मिडकैप शेयरों में इससे भी ज्यादा कमजोरी देखने को मिली.
मिडकैप शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
मिडकैप क्षेत्र में बीता हफ्ता काफी कमजोर रहा. निफ्टी मिडकैप सिलेक्ट 4.99 फीसदी गिरकर 13,033.05 पर बंद हुआ. इस सूचकांक में 684.35 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. मिडकैप शेयरों में बड़ी गिरावट यह संकेत देती है कि बिकवाली का दबाव बाजार के बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा. कई मिडकैप कंपनियों के शेयरों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जहां एक तरफ कुछ शेयरों ने शानदार तेजी दिखाई, वहीं दूसरी तरफ कई शेयरों में दोहरे अंकों में गिरावट दर्ज की गई. ऐसे में अगले हफ्ते मिडकैप शेयरों में खरीदारी लौटती है या नहीं, यह बाजार के लिए अहम रहेगा.
कच्चा तेल 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, भारत के लिए क्यों अहम?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बीते हफ्ते बाजार के लिए चिंता का बड़ा कारण रही. ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 6.24 फीसदी बढ़कर 116.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. एक हफ्ते में इसमें 6.86 डॉलर की बढ़त दर्ज की गई. भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की कीमतें काफी अहम हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत का आयात बिल बढ़ने का जोखिम रहता है. महंगे कच्चे तेल का असर महंगाई, कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत तथा रुपये पर दबाव के रूप में देखने को मिल सकता है. हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल की कीमतें कितनी ऊंची रहती हैं और कंपनियां बढ़ी हुई लागत को किस तरह संभालती हैं. अगर कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो बाजार में निवेशकों की चिंता बनी रह सकती है. इसलिए अगले हफ्ते भी तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने वाले अहम संकेतों में शामिल रहेंगी.
सोने और चांदी में भी गिरावट
शेयर बाजार में कमजोरी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली. कॉमेक्स गोल्ड की कीमत 4.08 फीसदी गिरकर 3,995.38 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई. इस दौरान सोने में 169.79 डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, कॉमेक्स सिल्वर 5.52 फीसदी टूटकर 53.82 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. चांदी की कीमत में 3.147 डॉलर की गिरावट रही. इस तरह बीते हफ्ते शेयर बाजार के साथ दोनों कीमती धातुओं में भी कमजोरी रही. निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि अगले हफ्ते इनकी कीमतों में स्थिरता आती है या उतार-चढ़ाव बना रहता है.
रक्षा, पूंजी बाजार और धातु क्षेत्र में सबसे ज्यादा गिरावट
क्षेत्रों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो रक्षा क्षेत्र सबसे ज्यादा दबाव में रहा. इसमें 7.05 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. पूंजी बाजार क्षेत्र 5.95 फीसदी और धातु क्षेत्र 5.40 फीसदी टूट गया. मीडिया क्षेत्र में 5.15 फीसदी और रियल एस्टेट क्षेत्र में 5.04 फीसदी की कमजोरी रही. ऊर्जा क्षेत्र 4.62 फीसदी, दैनिक उपभोग की वस्तुओं से जुड़े एफएमसीजी क्षेत्र में 4.34 फीसदी और वित्तीय क्षेत्र में 3.88 फीसदी की गिरावट आई. इसके अलावा निजी बैंकों के सूचकांक में 3.77 फीसदी और वाहन क्षेत्र में 3.52 फीसदी की गिरावट आई. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, उपभोग और दवा क्षेत्र के शेयर भी नुकसान के साथ बंद हुए. तेल और गैस क्षेत्र में 1.67 फीसदी की गिरावट रही, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सूचकांक में अपेक्षाकृत कम कमजोरी देखने को मिली. यह सूचकांक 0.30 फीसदी नीचे बंद हुआ. इस पूरे माहौल में सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र ने बाजार को थोड़ी राहत दी. इस क्षेत्र के सूचकांक में 0.22 फीसदी की मामूली तेजी दर्ज की गई. हालांकि, एक क्षेत्र में आई यह बढ़त पूरे बाजार की कमजोरी को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं रही.
निफ्टी के इन शेयरों में रही तेजी
गिरते बाजार के बावजूद निफ्टी के कुछ शेयरों ने मजबूती दिखाई. एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 3.06 फीसदी चढ़ा. टीसीएस में 2.64 फीसदी और ओएनजीसी में 2.48 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर 1.31 फीसदी, सिप्ला 0.97 फीसदी और एलएंडटी 0.55 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए. इन शेयरों का प्रदर्शन बताता है कि बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच भी कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी बनी रही. हालांकि, इन शेयरों की तेजी को पूरे बाजार में सुधार का संकेत मानने से पहले आने वाले कारोबारी सत्रों के प्रदर्शन पर नजर रखना जरूरी होगा.
अडानी एंटरप्राइजेज, श्रीराम फाइनेंस और ट्रेंट में बड़ी गिरावट
दूसरी तरफ कई प्रमुख शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली. अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 7.99 फीसदी गिरा. श्रीराम फाइनेंस में 7.97 फीसदी और ट्रेंट में 7.81 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. नेस्ले इंडिया का शेयर 7.15 फीसदी टूट गया, जबकि एक्सिस बैंक में 5.62 फीसदी की कमजोरी रही. इन शेयरों में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि अगले हफ्ते इन शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटती है या बिकवाली का दबाव जारी रहता है.
मिडकैप के बढ़ने और गिरने वाले शेयर
मिडकैप शेयरों में कुछ कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया. आईजीआईएल का शेयर 14.91 फीसदी चढ़ा, जबकि टीटीएमएल में 12.31 फीसदी की तेजी रही. आईपीसीए लैब्स 5.89 फीसदी, एलटीटीएस 5.21 फीसदी और चेन्नई पेट्रोलियम 4.72 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए. वहीं, मिडकैप क्षेत्र के कमजोर शेयरों में एचएससीएल सबसे ज्यादा गिरने वालों में रहा. इसमें 25.53 फीसदी की गिरावट आई. स्विगी का शेयर 24.88 फीसदी और जिंदल सॉ 22.80 फीसदी टूट गया. इसके अलावा फिनोलेक्स केबल्स में 19.94 फीसदी और केईआई इंडस्ट्रीज में 16.90 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. मिडकैप शेयरों में तेजी और गिरावट का यह अंतर बताता है कि बाजार में सभी शेयर एक जैसी दिशा में नहीं चले. इसलिए निवेशकों के लिए केवल सूचकांक की चाल देखने के बजाय अलग-अलग कंपनियों के प्रदर्शन और जोखिम को समझना भी जरूरी है.
अगले हफ्ते निफ्टी के लिए क्या अहम रहेगा?
अगले हफ्ते बाजार की दिशा कई अहम संकेतों पर निर्भर करेगी. सबसे पहले निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी. अगर तेल महंगा बना रहता है, तो महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताएं बनी रह सकती हैं. इसके अलावा वैश्विक बाजारों के संकेत, बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और मिडकैप क्षेत्र में बिकवाली की स्थिति भी अहम रहेगी. निफ्टी के लिए 22,600 का स्तर फिलहाल ध्यान देने योग्य है, क्योंकि सूचकांक ने हफ्ते का अंत इसी स्तर पर किया है. हालांकि, केवल साप्ताहिक समापन के आधार पर इसे पक्का तकनीकी सहारा नहीं माना जा सकता. अगले कारोबारी सत्रों में सूचकांक की चाल और खरीदारी-बिकवाली के रुझान से ही बाजार की मजबूती का बेहतर अंदाजा मिलेगा. अगर बाजार में खरीदारी लौटती है, तो निवेशकों की नजर सुधार की मजबूती पर रहेगी. वहीं, बिकवाली जारी रहने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार में गिरावट के दौरान जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना जरूरी है. सिर्फ एक हफ्ते के प्रदर्शन के आधार पर किसी शेयर को खरीदने या बेचने का निर्णय नहीं लेना चाहिए. निवेशकों को कंपनी के बुनियादी पहलुओं, वित्तीय नतीजों, बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए. फिलहाल कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों के संकेत और मिडकैप शेयरों में खरीदारी अगले हफ्ते बाजार के लिए अहम कारक रहेंगे. निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि निफ्टी 22,600 के आसपास स्थिर रह पाता है या बाजार में दबाव आगे भी जारी रहता है.
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