भारतीय शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते शानदार वापसी की. शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी तेजी देखने को मिली.
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अब बाजार की नजर नए हफ्ते पर है. आने वाले पांच कारोबारी सत्र कई मायनों में बेहद अहम रहने वाले हैं, क्योंकि इस दौरान RBI की मौद्रिक नीति, कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की चाल और वैश्विक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.
पिछले हफ्ते बाजार में क्यों आई तेजी?
पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली. निफ्टी करीब 1.83 फीसदी की बढ़त के साथ 24,383 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स करीब 1.86 फीसदी चढ़कर 78,094 के स्तर पर पहुंच गया.
बाजार में तेजी के पीछे कई बड़े कारण रहे.
सबसे पहले पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता थोड़ी कम हुई. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी बाजार को राहत दी. वहीं विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय शेयर बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू की. इसके साथ ही जून तिमाही के शुरुआती कॉरपोरेट नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया. इस तेजी का असर सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली.
IT सेक्टर बना बाजार का सबसे बड़ा सितारा
पिछले हफ्ते सेक्टरों की बात करें तो IT शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली. IT इंडेक्स करीब 6.75 फीसदी चढ़ा. ग्लोबल टेक कंपनियों से मिले सकारात्मक संकेतों और बेहतर सेंटीमेंट का फायदा भारतीय IT शेयरों को मिला. इसके अलावा मीडिया, ऑटो, फार्मा और कंजम्प्शन सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. हालांकि डिफेंस, एनर्जी और CPSE जैसे कुछ सेक्टर दबाव में रहे.
इस हफ्ते बाजार के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर होगा RBI MPC
नए हफ्ते में सबसे बड़ा घरेलू इवेंट भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की बैठक होगी. RBI 5 अगस्त को अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा. बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रख सकता है. हालांकि निवेशकों की नजर सिर्फ ब्याज दरों पर नहीं होगी. बाजार यह देखेगा कि RBI महंगाई, आर्थिक ग्रोथ, लिक्विडिटी और आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा को लेकर क्या संकेत देता है. अगर RBI का रुख बाजार की उम्मीदों से ज्यादा सकारात्मक रहता है, तो इससे सेंटीमेंट को और मजबूती मिल सकती है.
Q1 नतीजों पर रहेगी बाजार की नजर
इस हफ्ते 500 से ज्यादा कंपनियां अप्रैल-जून तिमाही यानी Q1 FY27 के नतीजे जारी करेंगी. इनमें SBI, Bharti Airtel, ONGC, Power Grid, Titan, Trent, Hindalco और Nykaa जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
हालांकि बाजार सिर्फ कंपनियों के मुनाफे और आय के आंकड़ों पर नजर नहीं रखेगा.निवेशक कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर भी ध्यान देंगे. खासकर मांग की स्थिति, मार्जिन आउटलुक और भविष्य की निवेश योजनाओं को लेकर कंपनियां क्या कहती हैं, यह काफी अहम रहेगा.
विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा
भारतीय शेयर बाजार के लिए एक और सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों यानी FII की वापसी रही. लंबे समय तक बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार में खरीदारी करते नजर आए. जुलाई में भी चार महीने बाद विदेशी निवेशकों की ओर से अच्छी खरीदारी देखने को मिली. अगर यह रुझान आगे भी जारी रहता है, तो बाजार को मजबूती मिल सकती है.
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल पर रहेगी नजर
हालांकि बाजार के सामने कुछ बड़े जोखिम भी बने हुए हैं. पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है. महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है.
GST कलेक्शन और PMI आंकड़े भी देंगे संकेत
इस हफ्ते बाजार की नजर जुलाई के GST कलेक्शन और Composite PMI जैसे आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी. इन आंकड़ों से पता चलेगा कि देश में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कैसी बनी हुई है. अगर आंकड़े मजबूत आते हैं, तो इससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ सकता है.
किन सेक्टरों और शेयरों पर रहेगी नजर?
IT सेक्टर पिछले हफ्ते का सबसे बड़ा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा. अगर ग्लोबल टेक कंपनियों में सकारात्मक माहौल बना रहता है, तो भारतीय IT शेयरों में मजबूती जारी रह सकती है. इसके अलावा जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं, उनमें स्टॉक-स्पेसिफिक एक्शन देखने को मिल सकता है. यानी इस हफ्ते पूरे बाजार से ज्यादा फोकस अलग-अलग कंपनियों के प्रदर्शन पर रहेगा.
एक्सपर्ट्स की क्या है निवेश रणनीति?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया तेजी के बाद भी निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है. उनके मुताबिक बाजार में रिकवरी के पीछे घरेलू आर्थिक मजबूती, कुछ सेक्टरों के बेहतर नतीजे, विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक माहौल में सुधार जैसे कई कारण हैं.
लेकिन अभी पूरी तरह जोखिम खत्म नहीं हुए हैं. अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बाजारों की चाल आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकती है.ऐसे में निवेशकों को पूरे बाजार में अंधाधुंध खरीदारी करने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए. ऐसी कंपनियां जिनकी कमाई बढ़ रही हो, बिजनेस मॉडल मजबूत हो और भविष्य में ग्रोथ की संभावना साफ दिखाई दे. एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना बेहतर रणनीति हो सकती है.
निफ्टी और सेंसेक्स के अहम लेवल
टेक्निकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,550 से 24,600 का स्तर अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. अगर निफ्टी इस दायरे के ऊपर टिकने में कामयाब रहता है, तो इसमें 24,850 तक तेजी की संभावना बन सकती है. वहीं गिरावट की स्थिति में 24,000 से 24,100 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है.
जब तक निफ्टी इस सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में गिरावट पर खरीदारी यानी 'Buy on Dips' की रणनीति बेहतर मानी जा रही है. वहीं सेंसेक्स के लिए 78,300 से 78,500 का जोन अहम रेजिस्टेंस है. नीचे की तरफ 77,500 से 77,700 के स्तर पर सपोर्ट देखा जा रहा है.
अगस्त की शुरुआत बाजार के लिए क्यों अहम?
कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ा है. एक तरफ RBI का फैसला, कंपनियों के अच्छे नतीजे और विदेशी निवेशकों की वापसी बाजार को आगे बढ़ाने वाले फैक्टर हैं.
वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा बदल सकते हैं. ऐसे में इस हफ्ते निवेशकों को सिर्फ इंडेक्स की चाल नहीं बल्कि हर बड़े ट्रिगर पर नजर रखनी होगी. आने वाले कुछ दिन यह तय कर सकते हैं कि बाजार की हालिया तेजी आगे बढ़ती है या फिर निवेशक मुनाफावसूली का रास्ता अपनाते हैं.
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