Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला. शुरुआती कारोबार में मामूली तेजी के साथ खुलने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में फिसल गए. सेंसेक्स 530 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,197 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 169 अंक गिरकर 23,000 के अहम स्तर से नीचे 22,976 पर पहुंच गया. बाजार में इस गिरावट के बीच बैंकिंग शेयरों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला. सेंसेक्स के शेयरों में एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी SBI बढ़त के साथ टॉप गेनर बना.
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बाजार की शुरुआत में तेजी, फिर अचानक बदला रुख
सोमवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सतर्क अंदाज में हुई. बीएसई सेंसेक्स करीब 120 अंकों की बढ़त के साथ 74,849 के स्तर पर खुला. वहीं, एनएसई निफ्टी ने पिछले बंद स्तर से करीब 4 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 23,150 पर कारोबार शुरू किया. हालांकि, बाजार की शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी. कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा और सेंसेक्स गिरकर 74,555 के आसपास पहुंच गया. इसके बाद गिरावट और गहरी हुई. सेंसेक्स का 530 अंकों से ज्यादा टूटना और निफ्टी का 23,000 के नीचे जाना बाजार में निवेशकों की सतर्कता को दिखाता है.
सेंसेक्स के शेयरों में एक्सिस बैंक सबसे बड़ा लूजर
बाजार में गिरावट के बीच सेंसेक्स के शेयरों का प्रदर्शन भी अलग-अलग रहा. एक्सिस बैंक के शेयर में 4.54 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह सेंसेक्स का टॉप लूजर बन गया. दूसरी ओर, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर में 1.21 फीसदी की तेजी रही और यह इंडेक्स का टॉप गेनर बना. इस तरह बाजार के प्रमुख शेयरों में एक जैसा रुख नहीं दिखाई दिया. जहां एक्सिस बैंक में बिकवाली का दबाव रहा, वहीं SBI में खरीदारी देखने को मिली. ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए केवल इंडेक्स की चाल ही नहीं, बल्कि अलग-अलग शेयरों के प्रदर्शन पर नजर रखना भी जरूरी है.
कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए बनीं चुनौती
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव की एक बड़ी चिंता कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं. एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, घरेलू बाजार में पूरे दिन सतर्कता बनी रह सकती है. ऊंचे क्रूड प्राइस और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं. WTI क्रूड ऑयल की कीमत करीब 97 से 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, जबकि ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था. कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती से ऊर्जा से जुड़े सेक्टरों पर दबाव बढ़ सकता है. इसके अलावा, महंगा क्रूड भारतीय रुपये के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है. इसलिए निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर बनी रह सकती है. अगर क्रूड ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो बाजार की धारणा पर इसका असर देखने को मिल सकता है.
एशियाई बाजारों और अमेरिकी फ्यूचर्स से मिले-जुले संकेत
घरेलू बाजार के लिए वैश्विक संकेत भी पूरी तरह मजबूत नहीं थे. सोमवार को एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली. वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में मिला-जुला रुख रहा. डॉऊ फ्यूचर्स नीचे कारोबार कर रहे थे, जबकि S&P 500 और Nasdaq फ्यूचर्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, डॉऊ जोन्स फ्यूचर्स करीब 0.55 फीसदी गिरकर 51,891 पर था. S&P 500 फ्यूचर्स में 20 से 25 अंकों की बढ़त थी, जबकि Nasdaq फ्यूचर्स करीब 250 अंक ऊपर थे. हालांकि, पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजार में टेक्नोलॉजी शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला था. वैश्विक बाजारों के इन संकेतों के बीच भारतीय बाजार के लिए दिशा तय करना आसान नहीं है. विदेशी बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं.
सेंसेक्स के लिए 75,000 का स्तर क्यों है अहम
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट और टेक्निकल रिसर्च विशेषज्ञ सचिन गुप्ता के मुताबिक, सेंसेक्स का तकनीकी रुख साइडवेज से बुलिश के बीच बना हुआ है. साप्ताहिक रिकवरी और मोमेंटम इंडिकेटर्स में सुधार से बाजार को कुछ सहारा मिला है. तकनीकी नजरिए से सेंसेक्स के लिए 73,900 से 74,100 का स्तर अहम सपोर्ट जोन है. अगर इंडेक्स इस दायरे के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो इसमें रिकवरी जारी रहने की संभावना बन सकती है. ऊपर की तरफ 75,000 से 75,300 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन माना जा रहा है. अगर सेंसेक्स इस रेजिस्टेंस जोन को मजबूती से पार करता है, तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है. लेकिन अगर इंडेक्स इस स्तर को पार करने में नाकाम रहता है, तो मुनाफावसूली या सीमित दायरे में कारोबार की स्थिति बन सकती है. ऐसे में नए ट्रेड लेने वाले निवेशकों को बाजार की दिशा, कीमतों में होने वाले बदलाव और ओपन इंटरेस्ट जैसे संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए.
निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर बना निगरानी का केंद्र
निफ्टी के तकनीकी आउटलुक पर चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि इंडेक्स ने 200-सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA और ऊपर की ओर जाती ट्रेंडलाइन से अच्छा सपोर्ट हासिल किया था. इससे शॉर्ट टर्म में रिकवरी की उम्मीद मजबूत हुई. हालांकि, निफ्टी अभी 50-सप्ताह के EMA को दोबारा हासिल नहीं कर पाया है. ऐसे में बाजार में तेजी की संभावना के साथ कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं. निफ्टी के लिए जरूरी होगा कि वह हालिया सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहे और अहम रेजिस्टेंस स्तरों को पार करने की कोशिश करे. सोमवार को निफ्टी का 23,000 के नीचे पहुंचना बाजार की चाल पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए अहम घटनाक्रम है. आने वाले कारोबार में इंडेक्स इस स्तर के आसपास किस तरह प्रदर्शन करता है और क्या दोबारा इसके ऊपर टिक पाता है, यह देखने वाली बात होगी.
निवेशक अब किन बातों पर रखें नजर
शेयर बाजार में फिलहाल कई ऐसे संकेत हैं, जो आने वाले सत्रों की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. एक तरफ कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बाजारों की कमजोरी चिंता बढ़ा रही हैं, तो दूसरी तरफ तकनीकी संकेतकों में पहले आई रिकवरी बाजार को सहारा दे सकती है.
निवेशकों को खास तौर पर इन बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- सेंसेक्स के लिए 73,900 से 74,100 का सपोर्ट जोन.
- सेंसेक्स के लिए 75,000 से 75,300 का रेजिस्टेंस जोन.
- निफ्टी का 23,000 के स्तर के आसपास प्रदर्शन.
- ब्रेंट और WTI क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव.
- एशियाई बाजारों और अमेरिकी फ्यूचर्स से मिलने वाले संकेत.
- बैंकिंग शेयरों में खरीदारी और बिकवाली का रुख.
कुल मिलाकर, सोमवार को बाजार की शुरुआती तेजी का टिक नहीं पाना और निफ्टी का 23,000 के नीचे आना निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है. हालांकि, तकनीकी स्तरों पर रिकवरी की संभावना भी बनी हुई है. ऐसे में आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजार अहम सपोर्ट को संभाल पाता है या नहीं और वैश्विक परिस्थितियां किस तरह बदलती हैं.
(डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखें. जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.)
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