Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF में पिछले कुछ दिनों में ऐसी तेज गिरावट देखने को मिली है, जिसने इंटरनेशनल ETFs में निवेश करने वाले निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। यह ETF लगातार तीन कारोबारी सत्रों में करीब 49 फीसदी टूट चुका है। हालांकि, इतनी बड़ी गिरावट के बाद भी बुधवार को इसकी बाजार कीमत इसकी नेट एसेट वैल्यू यानी NAV से करीब 67 फीसदी ऊपर थी। ऐसे में सवाल सिर्फ ETF की गिरती कीमत का नहीं, बल्कि उस कीमत का भी है जिस पर निवेशक इसे खरीद और बेच रहे हैं।
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दो हफ्ते में 180% उछला ETF
Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF की कीमत 4 सितंबर को करीब ₹141.93 थी। इसके बाद ETF में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और 18 सितंबर तक इसकी कीमत बढ़कर ₹396.30 पहुंच गई। इस तरह सिर्फ दो हफ्तों में ETF की कीमत में करीब 180 फीसदी का उछाल आया। इसके बाद 21 सितंबर को ETF ने कारोबार के दौरान ₹471.99 का उच्च स्तर भी छुआ। हालांकि, इसके बाद तेजी का सिलसिला अचानक पलट गया।
22 सितंबर को ETF में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई और इसकी कीमत घटकर करीब ₹253.64 रह गई। इसके बाद बुधवार को भी इसमें करीब 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस तरह लगातार तीन कारोबारी सत्रों में ETF करीब 49 फीसदी टूट गया।
अमेरिकी कंपनियां 49% नहीं टूटीं, फिर ETF इतना क्यों गिरा? यहां सबसे अहम सवाल यही है कि क्या ETF के अंदर मौजूद अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में भी तीन दिनों में करीब 49 फीसदी की गिरावट आई थी? ऐसा नहीं हुआ। Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF, Nasdaq 100 में शामिल कंपनियों के बाहर Nasdaq पर लिस्टेड 50 सबसे बड़ी non-financial कंपनियों में निवेश करता है। इस ETF में निवेशकों का करीब ₹172-176 करोड़ का पैसा लगा हुआ था। ETF की कीमत में आई तेज हलचल को समझने के लिए उसकी NAV और market price के बीच के अंतर को समझना जरूरी है।
NAV और Market Price में क्या अंतर है?
NAV यानी Net Asset Value ETF के अंदर मौजूद underlying assets की प्रति यूनिट वास्तविक वैल्यू को दर्शाती है। दूसरी तरफ, market price वह कीमत है जिस पर ETF शेयर बाजार में खरीदा और बेचा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में ETF की market price और NAV के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। लेकिन Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF में market price उसकी NAV से काफी ऊपर चली गई थी।
बुधवार को भी ETF करीब 67 फीसदी premium पर ट्रेड कर रहा था। इसका मतलब है कि निवेशक ETF की underlying assets की वैल्यू के मुकाबले काफी ज्यादा कीमत चुका रहे थे। Demand और Supply का बिगड़ा संतुलन
इस पूरे मामले के पीछे एक बड़ी वजह demand और supply का mismatch माना जा रहा है। भारत में म्यूचुअल फंड्स के विदेशी निवेश पर regulatory limits लागू हैं। भारतीय mutual fund industry करीब 7 अरब डॉलर की overseas investment limit तक पहुंच चुकी है। इसके कारण फंड हाउस विदेशी securities में आसानी से नया पैसा नहीं लगा पा रहे हैं।
इसका असर international ETFs की unit supply पर भी पड़ा है। एक तरफ नए units की supply सीमित रही, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और दूसरे विदेशी बाजारों में मजबूत रिटर्न और भारतीय शेयर बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन के कारण इन ETFs में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। यानी बाजार में स्थिति कुछ ऐसी बन गई—खरीदार ज्यादा और ETF units कम। मांग बढ़ने के साथ एक्सचेंज पर ETF की market price उसकी NAV से काफी ऊपर चली गई।
Motilal Oswal Mutual Fund ने भी दी थी जानकारी
Motilal Oswal Mutual Fund ने अपने clients को भेजे एक note में कहा कि RBI की overseas investment limits ने international securities में fresh investment को सीमित किया है। फंड हाउस के मुताबिक, इससे international ETFs के नए units की creation और availability प्रभावित हुई। ऐसे में demand और supply के बीच असंतुलन पैदा होने पर ETF अपनी underlying value यानी NAV से premium पर ट्रेड कर सकता है। यानी ETF में आई तेजी पूरी तरह underlying assets की कीमत बढ़ने की वजह से नहीं थी। market price में premium का भी योगदान था।Premium खत्म हुआ तो क्या होगा? यहीं निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम पैदा होता है।
ETF का premium हमेशा बना रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। अगर demand कम होती है, supply की स्थिति बदलती है या ETF की market price NAV के करीब लौटती है, तो premium तेजी से खत्म हो सकता है।
ऐसी स्थिति में अमेरिका के underlying बाजार में बड़ी गिरावट नहीं होने के बावजूद ETF में निवेश करने वाले व्यक्ति को नुकसान हो सकता है।
मसलन, अगर किसी ETF की NAV ₹100 है लेकिन बाजार में वह ₹140 पर ट्रेड कर रहा है, तो निवेशक underlying assets की वैल्यू से 40 फीसदी ज्यादा कीमत चुका रहा है। बाद में अगर market price NAV के करीब आ जाती है, तो underlying assets की कीमत स्थिर रहने पर भी निवेशक का return प्रभावित हो सकता है।
दूसरे International ETFs में भी बड़ा Premium
यह समस्या सिर्फ Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दूसरे international ETFs में भी market price और NAV के बीच बड़ा अंतर देखा गया। इनमें Motilal Oswal Nasdaq 100 ETF, Mirae Asset NYSE FANG+ ETF, Mirae Asset S&P 500 Top 50 ETF और Mirae Asset Hang Seng TECH ETF शामिल हैं। इनमें कुछ ETFs अपनी NAV से करीब 14 से 40 फीसदी तक premium पर ट्रेड कर रहे थे।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
International ETFs में निवेश करते समय सिर्फ ETF का चार्ट या पिछले कुछ दिनों का रिटर्न देखना पर्याप्त नहीं है। निवेशकों को इसकी NAV और market price के बीच का अंतर भी जरूर देखना चाहिए। अगर कोई ETF अपनी NAV से काफी premium पर ट्रेड कर रहा है, तो निवेशक को यह समझना जरूरी है कि वह underlying assets के लिए कितनी अतिरिक्त कीमत चुका रहा है। Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF में हालिया घटनाक्रम इसी जोखिम को सामने लाता है। 4 सितंबर को करीब ₹141.93 से शुरू होकर ETF 21 सितंबर को ₹471.99 के intraday high तक पहुंचा और इसके बाद महज तीन कारोबारी सत्रों में करीब 49 फीसदी टूट गया।
इसलिए international ETF में निवेश से पहले सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि संबंधित विदेशी बाजार कितना ऊपर गया है। यह देखना भी जरूरी है कि ETF किस कीमत पर ट्रेड कर रहा है और उसकी NAV कितनी है। कई बार ETF में असली जोखिम underlying asset में नहीं, बल्कि उस premium में छिपा होता है जो निवेशक market price के रूप में चुका रहा होता है।
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