शेयर बाजार में कुछ स्टॉक्स ऐसे होते हैं जिनमें तेजी सिर्फ बाजार के मूड की वजह से नहीं आती, बल्कि कंपनी के कारोबार में आए किसी बड़े बदलाव की वजह से आती है। आज ऐसा ही एक नाम है MTAR Technologies। बुधवार को MTAR Tech के शेयर में करीब 3 फीसदी तक की तेजी आई और शेयर दिन के हाई स्तर पर ₹7,120 तक पहुंच गया। खास बात ये है कि लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में शेयर में तेजी देखने को मिली है। दो दिनों में स्टॉक करीब 5 फीसदी चढ़ चुका है। लेकिन सवाल है कि आखिर MTAR Tech में अचानक खरीदारी क्यों बढ़ी? क्या है वो नया ऑर्डर जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है? और क्या कंपनी का न्यूक्लियर बिजनेस आने वाले वर्षों में इस शेयर की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है? आइए पूरी कहानी आज स्टॉक स्कैन में बेहद आसान भाषा में समझते हैं।
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सबसे पहले MTAR Tech के शेयर की परफारमेंस पर एक नजर डाल लेते हैं। आज यानी 26 अगस्त की दोपहर करीब 3 बजे शेयर करीब 2 फीसदी की तेजी के साथ 7,055 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था। पिछले एक महीने में शेयर करीब 22% उछला है। वहीं बीते 6 महीने में शेयर ने निवेशकों को 91.56% का रिटर्न दिया है।
शेयर में आई तूफानी तेजी
सबसे पहले समझिए तेजी की वजह। MTAR Technologies को Nuclear Power Corporation of India यानी NPCIL से करीब ₹127 करोड़ का ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर के तहत कंपनी न्यूक्लियर रिएक्टर की रिफर्बिशमेंट यानी पुराने रिएक्टर को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए Coolant Channel Assemblies की सप्लाई करेगी। यानी MTAR का काम सिर्फ कोई सामान्य मशीनरी या पार्ट बनाना नहीं है। कंपनी न्यूक्लियर पावर सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स तैयार करती है। और इसी ऑर्डर के बाद कंपनी की न्यूक्लियर ऑर्डर बुक एक बेहद महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गई है।
कंपनी के मुताबिक उसका मौजूदा Nuclear Order Book ₹775 करोड़ से ज्यादा हो गया है। और सबसे खास बात—कंपनी का कहना है कि यह उसके इतिहास की सबसे बड़ी न्यूक्लियर ऑर्डर बुक है।
अब बात करते हैं कि न्यूक्लियर बिजनेस में कंपनी को क्यों दिख रहा है बड़ा मौका? MTAR Tech का मैनेजमेंट मानता है कि आने वाले वर्षों में भारत के सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में बड़े मौके बनने वाले हैं। कंपनी पहले से ही न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए महत्वपूर्ण Fuel Handling Assemblies की सप्लाई करती है। हाल ही में कंपनी को ₹504 करोड़ का अपना अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर भी मिला था।
यह ऑर्डर Kaiga 5 और 6 प्रोजेक्ट्स के लिए है। इससे कंपनी को आगे के कारोबार को लेकर ज्यादा visibility मिलती है। इसके अलावा कंपनी को उम्मीद है कि मौजूदा रिएक्टर्स से ही वित्त वर्ष 2027 में करीब ₹150 करोड़ के refurbishment orders मिल सकते हैं। यानी सिर्फ नए न्यूक्लियर प्लांट ही नहीं, पुराने रिएक्टर्स के रखरखाव और अपग्रेडेशन से भी कंपनी को कारोबार मिल सकता है। कंपनी की नजर आने वाले नए न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स पर भी है। Mahi Banswara में प्रस्तावित चार रिएक्टर्स का निर्माण एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में NTPC और NPCIL के बीच साझेदारी है।
अगर भारत में न्यूक्लियर पावर क्षमता बढ़ाने की योजना आगे बढ़ती है, तो MTAR जैसी कंपनियों के लिए नए ऑर्डर्स का रास्ता खुल सकता है। सरकार ने 2047 तक भारत की सिविल न्यूक्लियर क्षमता को 100 GWe तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। यानी अगले दो दशकों में नए रिएक्टर, पुराने रिएक्टरों की रिफर्बिशमेंट और मेंटेनेंस से जुड़ा बड़ा बाजार बन सकता है। और MTAR इसी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
कंपनी के परफार्मेस पर एक नजर
अब कंपनी के वित्तीय लक्ष्य पर आते हैं। MTAR Technologies ने चालू वित्त वर्ष यानी FY27 में करीब 80 फीसदी Revenue Growth का लक्ष्य दिया है। इसके साथ कंपनी ने 24 फीसदी EBITDA Margin, प्लस या माइनस 100 बेसिस पॉइंट का मार्गदर्शन दिया है। यानी कंपनी सिर्फ बिक्री बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दे रही, बल्कि मुनाफे की गुणवत्ता और मार्जिन को भी बनाए रखना चाहती है। कंपनी का कहना है कि उसका फोकस केवल अगले एक-दो तिमाही के नतीजों पर नहीं है। बल्कि वह अपने बिजनेस को ज्यादा diversified और मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए कंपनी नए प्रोडक्ट्स जोड़ रही है, मौजूदा ग्राहकों के साथ अपना कारोबार बढ़ा रही है और विदेशों में नए ग्राहक तलाश रही है।
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