Tata Group में बड़ा भूचाल! चंद्रशेखरन ने छोड़ा Tata Sons चेयरमैन पद, शेयरों में मची हलचल

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12 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 12 2026 12:03 PM)

एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा समूह के कई शेयर गिरे. 18 अगस्त की बैठक से पहले नेतृत्व को लेकर बढ़ी चिंता पर अब पूरे बाजार की नजर टिकी है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran का इस्तीफा

फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा पद पर बने रहेंगे चंद्रशेखरन

इस्तीफे के बाद TCS के शेयर 4% तक टूटे

Tata Motors Passenger Vehicles में भी करीब 4% की गिरावट

Tata Consumer Products और Tata Power के शेयर करीब 2% नीचे

Tata Group Stocks: टाटा ग्रुप में एक बड़ा बदलाव हुआ है. Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran ने अपने पद से हटने का फैसला किया है. हालांकि, वह फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में बने रहेंगे. इस खबर के सामने आते ही टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. सबसे ज्यादा दबाव TCS पर रहा.

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टाटा ग्रुप के शेयरों में बिकवाली

टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. TCS के शेयर करीब 4% तक टूटकर 2,322 रुपये के आसपास आ गए. Tata Motors Passenger Vehicles के शेयर भी करीब 4% नीचे रहे, जबकि Tata Consumer Products और Tata Power में करीब 2% की गिरावट देखने को मिली.बाजार में इस गिरावट की बड़ी वजह Tata Sons के चेयरमैन N Chandrasekaran का दोबारा चेयरमैन पद पर नियुक्ति नहीं लेने का फैसला माना जा रहा है. यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली Tata Sons की AGM से ठीक पहले आया है.

गिरावट की वजह क्या है?

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब 18 अगस्त की बोर्ड बैठक और सालाना आम बैठक से पहले टाटा ट्रस्ट्स के रुख पर नजर है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है. रिपोर्टों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, चंद्रशेखरन के आगे जारी रहने के पक्ष में नहीं माने जा रहे हैं. बाजार की चिंता यह है कि अगर समूह के अलग अलग फैसले लेने वाले ढांचे में अटकाव बढ़ता है, तो इसका असर रोजमर्रा के कारोबार पर पड़ सकता है. इसी वजह से निवेशकों ने इस खबर पर सतर्क रुख दिखाया.

चंद्रशेखरन का फैसला क्यों अहम है?

N Chandrasekaran ने 2017 में Tata Sons की कमान संभाली थी. इससे पहले वह TCS का नेतृत्व कर चुके थे. वह Tata Group के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं. उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने कई नए क्षेत्रों में बड़े कदम उठाए. इनमें Air India का अधिग्रहण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिजिटल बिजनेस जैसे क्षेत्र शामिल हैं.यानी चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर कई नए और भविष्य के कारोबारों में निवेश किया.

Tata Trusts की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?

इस पूरे मामले में Tata Trusts की भूमिका बेहद अहम है. Tata Trusts के पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है. इसलिए Tata Sons के नेतृत्व से जुड़े बड़े फैसलों में ट्रस्ट की राय महत्वपूर्ण होती है. चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर Tata Sons के बोर्ड और Tata Trusts के बीच मतभेद की खबरें पहले भी सामने आई थीं. फरवरी में बोर्ड ने उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने के फैसले को टाल दिया था. यही वजह है कि 18 अगस्त की AGM से पहले उनका यह फैसला निवेशकों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है.

टाटा के शेयरों में क्यों आई गिरावट?

बाजार हमेशा अनिश्चितता को पसंद नहीं करता. Tata Sons सीधे तौर पर शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन उसकी रणनीति और नेतृत्व का असर टाटा ग्रुप की कई सूचीबद्ध कंपनियों पर पड़ता है. चंद्रशेखरन के जाने की खबर से निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल अब उत्तराधिकारी कौन होगा और ग्रुप की रणनीति किस दिशा में जाएगी? खासकर नए कारोबारों में किए जा रहे बड़े निवेश, पूंजी आवंटन और घाटे वाले नए बिजनेस को लेकर आगे की रणनीति बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगी.

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में कितना बदला Tata Group?

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group का आकार काफी बढ़ा है. ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक, FY20 में Tata Group का कुल रेवेन्यू करीब 7.89 लाख करोड़ रुपये था, जो FY26 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी अवधि में ग्रुप का Profit After Tax करीब 32,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.71 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं Tata Group की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप FY20 के करीब 9.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में करीब 24.39 लाख करोड़ रुपये हो गया. हालांकि FY25 में यह आंकड़ा करीब 27.85 लाख करोड़ रुपये था.

अब निवेशकों की नजर किन सवालों पर?

अब बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चंद्रशेखरन के बाद कौन आएगा. असली सवाल यह है कि नए नेतृत्व में Tata Group की रणनीति क्या होगी. क्या ग्रुप नए कारोबारों में आक्रामक निवेश जारी रखेगा? क्या घाटे वाले नए बिजनेस को लेकर रणनीति बदलेगी? क्या Tata Trusts और Tata Sons के बीच मतभेद खत्म होंगे? और सबसे अहम क्या नेतृत्व में बदलाव का असर TCS, Tata Motors, Tata Power और Tata Consumer जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों की रणनीति पर पड़ेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं. लेकिन एक बात साफ है कि N Chandrasekaran का Tata Sons से बाहर निकलने का फैसला सिर्फ चेयरमैन बदलने की खबर नहीं है, बल्कि यह Tata Group की अगली रणनीति के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. 18 अगस्त की AGM और उसके बाद होने वाले बोर्ड के फैसलों पर अब निवेशकों की नजर रहेगी.