Nifty के 84% Stocks 200-DMA से नीचे, क्या गिरावट के बाद अब कुछ बड़े शेयर सस्ते हुए?

चिराग ठाकुर

• 05:36 PM • 05 Oct 2026

शेयर बाजार में गिरावट के बीच Nifty 50 के 84% शेयर 200-DMA से नीचे आ गए हैं. लेकिन क्या इतनी गिरावट के बाद बड़े शेयरों की valuation आकर्षक हुई है? जानिए 200-DMA, P/E और market breadth के आंकड़ों से बाजार की पूरी तस्वीर.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

Nifty 50 के 42 शेयर 200-DMA से नीचे

BSE 1000 के 542 शेयर अब भी 200-DMA के ऊपर

ONGC, Infosys, HDFC Bank और TCS जैसे शेयरों का P/E अपेक्षाकृत कम

भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से दबाव बना हुआ है. Nifty 50 के 50 में से 42 शेयर अपने 200-Day Moving Average यानी 200-DMA से नीचे आ चुके हैं. इसका मतलब है कि बड़े और जाने-पहचाने शेयरों का long-term trend काफी कमजोर हुआ है.

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लेकिन ब्रोडर मार्केट की तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है. BSE 1000 में 542 शेयर अभी भी अपने 200-DMA के ऊपर कारोबार कर रहे हैं.

यानी बाजार का हर हिस्सा एक साथ नहीं टूट रहा. Largecap शेयरों पर दबाव ज्यादा है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप के कई हिस्से अब भी मजबूती बनाए हुए हैं.

200-DMA के नीचे पहुंचे बड़े शेयर

200-DMA को किसी शेयर के लंबे समय के trend का अहम संकेत माना जाता है. इसके नीचे जाना कमजोरी की तरफ इशारा करता है.

फिलहाल कुछ बड़े शेयरों में गिरावट काफी गहरी है.

  • Tata Motors PV, Maruti Suzuki और Infosys करीब 19% नीचे.
  • TCS करीब 18% नीचे.
  • HUL, ITC और Jio Financial करीब 17% नीचे.
  • Reliance Industries, HDFC Life, Tata Consumer, ONGC, M&M और HDFC Bank करीब 14% नीचे.

यहीं से निवेशकों के लिए अगला सवाल शुरू होता है. क्या जो शेयर इतना गिर चुका है, वो अब सस्ता भी हो गया है?

सिर्फ गिरावट नहीं, अब P/E भी देखना होगा

किसी शेयर की कीमत गिरने से यह साबित नहीं होता कि उसकी valuation सस्ती हो गई है. इसके लिए P/E यानी Price-to-Earnings ratio को भी देखना पड़ता है.

उपलब्ध TTM P/E आंकड़ों के मुताबिक ONGC करीब 6.4 गुना, Infosys 13.9 गुना, HDFC Bank 14.1 गुना, TCS 15.1 गुना और ITC करीब 16.2 गुना P/E पर हैं.

वहीं Maruti Suzuki करीब 25 गुना, Reliance Industries 21.2 गुना, M&M 19.2 गुना और HUL करीब 28.8 गुना P/E पर हैं. दूसरी तरफ Tata Consumer, HDFC Life और Jio Financial जैसी कंपनियों का P/E करीब 58 से 68 गुना के बीच है.

इससे एक बात साफ होती है. हर गिरा हुआ शेयर सस्ता नहीं है और कम P/E वाला शेयर भी अपने आप खरीदने लायक नहीं बन जाता. Earnings growth, sector valuation और आगे की कमाई की संभावना भी देखनी पड़ती है.

Tata Motors PV इसका दिलचस्प उदाहरण

Tata Motors PV अपने 200-DMA से करीब 19% नीचे है, जबकि उसका TTM P/E करीब 1.3 गुना दिख रहा है. पहली नजर में valuation बेहद कम लगती है, लेकिन कंपनी की कमाई में उतार-चढ़ाव जैसी चीजें इस आंकड़े को प्रभावित कर सकती हैं.

इसलिए सिर्फ एक number देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.

Experts की नजर में अभी क्या तस्वीर है?

Indiacharts के Rohit Srivastava के मुताबिक पिछले छह महीनों में Small और Microcap stocks ने Largecaps से बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि Midcaps भी Nifty से आगे रहे हैं. Choice Broking के Hitesh Tailor के मुताबिक correction सभी segments को बराबर प्रभावित नहीं कर रहा और Largecaps में कमजोरी ज्यादा है.

Rohit Srivastava Nifty को मौजूदा स्तरों पर oversold भी मानते हैं, लेकिन Nifty 500 में अभी broad-based capitulation नहीं दिख रही. यानी बाजार के bottom की पुष्टि अभी नहीं हुई है.

Anand Rathi के Mehul Kothari के मुताबिक अगर 200-DMA से नीचे जाने वाले शेयरों की संख्या कम होने लगे, तो यह stabilisation का संकेत हो सकता है. लेकिन अगर 200-DMA के आसपास मौजूद शेयर भी तेजी से नीचे जाने लगें, तो correction के broader market में फैलने का संकेत मिलेगा.

इस बाजार में असली सवाल क्या है?

फिलहाल तस्वीर यही है कि Largecap में गिरावट गहरी है, लेकिन पूरा बाजार एक साथ कमजोर नहीं हुआ है. कुछ शेयर valuation के लिहाज से पहले से कम महंगे दिख सकते हैं, जबकि कुछ में गिरावट के बावजूद P/E ऊंचा बना हुआ है.

इसलिए निवेशकों के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं कि शेयर कितना गिरा. 200-DMA trend बताएगा, P/E valuation की तस्वीर देगा और market breadth बताएगी कि कमजोरी कितनी दूर तक पहुंची है.

क्योंकि 20% गिरा हुआ शेयर जरूरी नहीं कि सस्ता हो... और 10% गिरा हुआ शेयर जरूरी नहीं कि महंगा हो.