Nifty पर 25 साल बाद बड़ा संकट! 8वीं साप्ताहिक गिरावट का खतरा, 22,600 पर अग्निपरीक्षा

संदीप शर्मा

• 02:12 PM • 30 Sep 2026

निफ्टी लगातार 7 हफ्तों से दबाव में है और 22,600 का स्तर अब सबसे अहम माना जा रहा है. कच्चे तेल, विदेशी बिकवाली और दर बढ़ने की आशंका बाजार की अगली दिशा तय करेंगी.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

Nifty पर 8वीं साप्ताहिक गिरावट का खतरा

2001 के बाद बन सकता है नया रिकॉर्ड

22,600 का स्तर बना सबसे अहम सपोर्ट

भारतीय शेयर बाजार में लगातार सात हफ्तों से गिरावट जारी है और अब Nifty 50 के सामने करीब 25 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराने का खतरा है. अगर इस हफ्ते भी Nifty गिरावट के साथ बंद होता है, तो इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते नुकसान में रहेगा. ऐसा आखिरी बार 2001 में देखने को मिला था.हालांकि, मौजूदा गिरावट की तुलना पिछली बड़ी गिरावट से करें तो इसकी तीव्रता काफी कम है. 25 सितंबर को Nifty 23,140 के आसपास बंद हुआ था और सात हफ्तों में इंडेक्स करीब 5.8 फीसदी गिर चुका है.

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कितनी अलग है मौजूदा गिरावट?

Nifty के इतिहास में लगातार कई हफ्तों तक गिरावट के दौर पहले भी आए हैं. 2001 में सात हफ्तों की गिरावट के दौरान Nifty करीब 20.5 फीसदी टूटा था. 2008 में सात हफ्तों में करीब 22.1 फीसदी की गिरावट आई थी, जबकि 2020 के Covid crash के दौरान सात हफ्तों में Nifty करीब 33.3 फीसदी गिर गया था.इसके मुकाबले मौजूदा सात हफ्तों की गिरावट करीब 5.8 फीसदी है. यानी इस बार गिरावट का सिलसिला लंबा जरूर हुआ है, लेकिन अभी तक इसकी तीव्रता पिछली बड़ी गिरावटों जैसी नहीं है.

22,600 पर Nifty की बड़ी परीक्षा

तकनीकी चार्ट पर Nifty की स्थिति फिलहाल कमजोर बनी हुई है. इंडेक्स में लगातार Lower Top और Lower Bottom बन रहे हैं, जो कमजोर ट्रेंड का संकेत है.HDFC Securities के मुताबिक Nifty के 22,550 के नीचे जाने पर 22,200 तक कमजोरी देखने को मिल सकती है.वहीं LKP Securities के मुताबिक 22,600 का स्तर Nifty के लिए बेहद अहम है. Nifty अपने 200-week moving average के करीब पहुंच गया है. Covid crash के बाद पहली बार इंडेक्स इस स्तर के आसपास आया है.अगर Nifty 22,600 के नीचे decisively टूटता है, तो बाजार में बिकवाली और बढ़ सकती है. वहीं इस स्तर के ऊपर टिकने पर रिकवरी की कोशिश देखने को मिल सकती है.

बाज़ार पर दबाव क्यों?

भारतीय शेयर बाजार पर इस समय कई वैश्विक कारणों का दबाव है. Brent crude का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए महंगा crude महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए चिंता बढ़ा सकता है.इसके अलावा US 10-year Treasury yield भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी assets आकर्षक हो सकते हैं, जिसका असर emerging markets पर पड़ सकता है.विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चिंता है. सितंबर में अब तक FII भारतीय बाजार से करीब 26,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. इस साल उनकी कुल निकासी करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.

RBI की ब्याज दर पर भी नजर

बाजार के लिए एक और जोखिम ब्याज दरों को लेकर है. BofA Securities ने अनुमान लगाया है कि RBI अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में 0.25 फीसदी की दर वृद्धि कर सकता है. ब्रोकरेज ने कुल रेट हाइक का अनुमान भी पहले के 0.5 फीसदी से बढ़ाकर 1 फीसदी कर दिया है. BofA के मुताबिक महंगे क्रूड से सप्लाई साइड महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है.अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं तो बाजार की लिक्विडिटी और कंपनियों की कर्ज लागत पर असर पड़ सकता है.

गिरावट के बाद वैल्यूएशन सस्ते

बाजार की तस्वीर पूरी तरह निगेटिव नहीं है. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया करेक्शन के बाद भारतीय शेयर बाजार की वैल्यूएशन पहले के मुकाबले ज्यादा सस्ते हो गए हैं. Motilal Oswal Financial Services के मुताबिक Nifty में करीब 6.8 फीसदी करेक्शन के बाद वैल्यूएशन में काफी सुधार आया है. Alchemy Capital Management के मुताबिक सितंबर 2026 में Nifty का one-year forward P/E करीब 17.4 गुना है, जबकि सितंबर 2024 में यह करीब 21.5 गुना था. इसका मतलब है कि पिछले दो साल में शेयर बाजार के वैल्यूएशन मल्टीपल में अच्छी-खासी कमी आई है.

घरेलू अर्थव्यवस्था से मिल रहा सहारा

ग्लोबल दबाव के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था से बाजार को कुछ सपोर्ट मिल रहा है. अगस्त में IIP ग्रोथ करीब 8 फीसदी रही. इसके अलावा शहरी मांग में भी सुधार के संकेत हैं.अब बाजार की नजर कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी रहेगी. अगर कमाई में सुधार देखने को मिलता है तो इससे बाजार के सेंटिमेंट्स को सपोर्ट मिल सकता है.

अब Nifty के लिए आगे क्या?

फिलहाल निफ्टी के लिए 22,600 का स्तर सबसे अहम सपोर्ट बना हुआ है. अगर यह स्तर बचता है और बाजार में लगातार खरीदारी आती है, तो रिकवरी की कोशिश हो सकती है. वहीं 22,600 के नीचे कमजोरी बढ़ने पर 22,200 अगला अहम स्तर बन सकता है. ऊपर की तरफ 22,800 से 23,000 के बीच रेजिस्टेंस देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में कच्चे तेल के दाम, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, FII फ्लो, जियो पॉलिटिकल टेंशन और दूसरी तिमाही के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

डिस्क्लेमर: ये केवल जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है. इसमें दी गई राय, ब्रोकरेज रिपोर्ट और आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं. यह किसी भी शेयर में खरीदने या बेचने की सलाह नहीं है. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है. निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.