Market Outlook : शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता मिलाजुला रहा. लगातार दो हफ्तों की तेजी के बाद इस बार बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली. हालांकि गिरावट बहुत बड़ी नहीं रही, लेकिन ऊपरी स्तरों पर निवेशकों की सतर्कता जरूर बढ़ी है. अब अगले हफ्ते बाजार की नजर निफ्टी के अहम समर्थन और रुकावट वाले स्तरों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी.
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निफ्टी में 0.83 फीसदी की गिरावट
बीते हफ्ते निफ्टी 50 करीब 0.83 फीसदी फिसलकर 24,366 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं बैंक निफ्टी में 0.44 फीसदी की कमजोरी रही और यह 57,491 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि बाजार की तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं रही. निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट में 0.65 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों में जहां ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हुई, वहीं चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही. यानी बाजार में खरीदारी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि निवेशक चुनिंदा शेयरों और खास थीम पर ध्यान दे रहे हैं.
निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम
अब 17 से 21 अगस्त के कारोबारी हफ्ते में बाजार की दिशा को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि निफ्टी किस दायरे में कारोबार करेगा. निफ्टी के लिए 24,300 से 24,400 का स्तर अहम माना जा रहा है. अगर सूचकांक इस दायरे के ऊपर अपनी पकड़ बनाए रखता है, तो बाजार में दोबारा तेजी लौटने की कोशिश हो सकती है. वहीं 24,000 का स्तर बाजार के लिए बड़ा समर्थन बन सकता है. अगर निफ्टी इस स्तर के नीचे फिसलता है, तो छोटी अवधि में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है. दूसरी तरफ 24,500 से 24,600 का स्तर अहम रुकावट वाला क्षेत्र रहेगा. अगर निफ्टी 24,600 के ऊपर मजबूती के साथ टिकने में कामयाब रहता है, तो बाजार में तेजी की गति एक बार फिर मजबूत हो सकती है. ऐसे में अगले हफ्ते 24,000 से 24,600 के दायरे पर निवेशकों की खास नजर रहेगी.
बैंक निफ्टी पर नजर
बैंक निफ्टी के लिए भी अगले हफ्ते अहम स्तर बने हुए हैं. सूचकांक 57,491 के स्तर पर बंद हुआ है. 57,100 के आसपास इसका अहम समर्थन और 58,000 के करीब रुकावट का स्तर नजर आ रहा है. अगर बैंक निफ्टी 58,000 के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है. इसका सकारात्मक असर पूरे बाजार के माहौल पर भी पड़ सकता है. वहीं 57,100 के नीचे जाने पर बैंकिंग शेयरों में दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी.
मीडिया और पूंजी बाजार में तेजी
बीते हफ्ते अलग-अलग क्षेत्रों की चाल भी बाजार में चल रहे बदलाव की तस्वीर दिखाती है. मीडिया क्षेत्र 2.26 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे मजबूत रहा. इसके बाद पूंजी बाजार में 1.63 फीसदी, रियल्टी में 1.09 फीसदी और रक्षा क्षेत्र में 0.82 फीसदी की तेजी आई.
इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार में पूरी तरह बिकवाली का माहौल नहीं है. निवेशक अभी भी चुनिंदा क्षेत्रों और खास थीम में खरीदारी कर रहे हैं. हालांकि दूसरी तरफ कई प्रमुख क्षेत्रों में कमजोरी देखने को मिली. धातु क्षेत्र 1.88 फीसदी गिरा.
दैनिक उपभोग की वस्तुओं वाले क्षेत्र में 1.66 फीसदी की गिरावट रही, जबकि वाहन क्षेत्र 1.48 फीसदी और तेल एवं गैस क्षेत्र 0.99 फीसदी कमजोर रहे. वित्त क्षेत्र में 0.95 फीसदी और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 0.60 फीसदी की गिरावट आई. इस तरह बाजार में क्षेत्रीय बदलाव का रुझान देखने को मिल रहा है. आने वाले हफ्ते में भी निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कौन से क्षेत्र कमजोरी से निकलकर वापसी करते हैं और किन क्षेत्रों में बिकवाली जारी रहती है.
बेल, डॉ. रेड्डीज और टाइटन में मजबूती
कमजोर बाजार के बावजूद कुछ बड़े शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी बेल 2.44 फीसदी की बढ़त के साथ रहा.
डॉ. रेड्डीज में 2.39 फीसदी और टाइटन में 2.33 फीसदी की तेजी आई. इसके अलावा भारती एयरटेल 1.64 फीसदी और ईटर्नल 1.11 फीसदी मजबूत हुए.
इन शेयरों का प्रदर्शन दिखाता है कि बाजार में चुनिंदा बड़े शेयरों को लेकर निवेशकों का भरोसा अभी भी बना हुआ है. यानी बाजार में कमजोरी के बावजूद हर शेयर में बिकवाली देखने को नहीं मिली.
मैक्स हेल्थकेयर और टीसीएस में दबाव
दूसरी तरफ कुछ प्रमुख निफ्टी शेयरों में तेज गिरावट भी देखने को मिली. मैक्स हेल्थकेयर 5.74 फीसदी टूट गया. अल्ट्राटेक सीमेंट में 4.01 फीसदी की गिरावट रही, जबकि टीसीएस 3.74 फीसदी कमजोर हुआ. इसके अलावा टीएमपीवी 3.60 फीसदी और एसबीआई लाइफ 3.26 फीसदी नीचे आए. इन शेयरों में कमजोरी ने बाजार के कुल प्रदर्शन पर भी दबाव बनाया.
मिडकैप में फिनकेबल्स और पेटीएम का शानदार प्रदर्शन
मिडकैप खंड बीते हफ्ते बाजार का एक मजबूत हिस्सा रहा. फिनकेबल्स में 22.18 फीसदी की जोरदार तेजी देखने को मिली. ग्लैंड फार्मा 14.19 फीसदी चढ़ा, जबकि पेटीएम में 11.20 फीसदी की बढ़त रही. इसके अलावा एमसीएक्स 10.37 फीसदी और बॉश करीब 9.66 फीसदी मजबूत हुए. खास तौर पर पेटीएम और एमसीएक्स में दोहरे अंकों की तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा.
हालांकि मिडकैप खंड में भी हर शेयर में तेजी नहीं रही. एबीएफआरएल 11.43 फीसदी टूट गया. गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में 11.02 फीसदी, पीएफसी में 10.48 फीसदी और पीआई इंडस्ट्रीज में 10.25 फीसदी की गिरावट आई. पीडब्ल्यूएल भी 10.23 फीसदी कमजोर हुआ.
इससे संकेत मिलता है कि मिडकैप में तेजी के बावजूद अलग-अलग शेयरों में उतार-चढ़ाव काफी ज्यादा है. इसलिए सिर्फ सूचकांक की तेजी को देखकर पूरे मिडकैप बाजार में एक जैसा रुख अपनाना जोखिम भरा हो सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
अगले हफ्ते शेयर बाजार के लिए सबसे बड़े संकेतों में कच्चे तेल की कीमतें शामिल रहेंगी. बीते हफ्ते ब्रेंट कच्चा तेल करीब 4.6 फीसदी बढ़कर लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रमों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार के लिए अहम बना हुआ है. भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था और कंपनियों पर पड़ सकता है.
महंगा कच्चा तेल महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है. इसके अलावा रुपये की चाल और कंपनियों की लागत पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है. ऐसे में अगले हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है.
वैश्विक संकेत और विदेशी निवेश भी अहम
कच्चे तेल के अलावा वैश्विक बाजारों के संकेत, विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां तथा भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे. अगर विदेशी और घरेलू निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है, तो बाजार को निचले स्तरों पर सहारा मिल सकता है. वहीं वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है. ऐसे माहौल में सूचकांक की दिशा के साथ-साथ अलग-अलग शेयरों की चाल भी काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी.
अगले हफ्ते बाजार की रणनीति क्या हो सकती है?
कुल मिलाकर अगले हफ्ते बाजार का रुख सावधानी के साथ सकारात्मक से लेकर सीमित दायरे में रहने वाला नजर आ रहा है. निफ्टी के लिए 24,300 से 24,400 का क्षेत्र अहम समर्थन रहेगा, जबकि 24,500 से 24,600 का स्तर रुकावट की भूमिका निभा सकता है. अगर निफ्टी 24,600 के ऊपर मजबूती दिखाता है, तो तेजी की गति दोबारा मजबूत हो सकती है. वहीं 24,000 के नीचे जाने पर बाजार में कमजोरी बढ़ने की आशंका रहेगी.
ऐसे में निवेशकों के लिए अगले हफ्ते सिर्फ निफ्टी या बैंक निफ्टी की दिशा पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों और चुनिंदा शेयरों पर ध्यान देना ज्यादा अहम हो सकता है. मीडिया, पूंजी बाजार, रियल्टी और रक्षा जैसे मजबूत क्षेत्रों पर नजर बनी रह सकती है. वहीं धातु, दैनिक उपभोग की वस्तुओं, वाहन और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कमजोरी के बाद वापसी के संकेतों पर नजर रखनी होगी.
कुल मिलाकर बीते हफ्ते की गिरावट को फिलहाल बड़ी गिरावट की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी. मिडकैप शेयरों में खरीदारी और चुनिंदा बड़े शेयरों में मजबूती यह संकेत देती है कि बाजार में पैसा अभी भी मौजूद है. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है. ऐसे में अगले हफ्ते निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय मजबूत शेयरों और मजबूत क्षेत्रों पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है. साथ ही बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन और नुकसान सीमित करने की रणनीति का ध्यान रखना भी जरूरी रहेगा. फिलहाल निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर सबसे अहम सहारा और 24,600 का स्तर अगली बड़ी रुकावट के तौर पर देखा जा सकता है.
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