निफ्टी रहा सपाट, फिर भी 43 शेयरों ने दो साल में दिया 100 फीसदी से ज्यादा रिटर्न

पिछले दो साल में निफ्टी लगभग सपाट रहा, लेकिन कई शेयरों ने 100 से 900 फीसदी तक रिटर्न दिया. जानिए किन सेक्टरों और कंपनियों ने निवेशकों को बड़ा फायदा कराया.

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शेयर बाजार ये हैं कुछ कमाल के शेयर.

तनीषा त्यागी

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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ग्लोबल टैरिफ और पश्चिम एशिया तनाव से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा

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क्यूपिड में एक लाख रुपये का निवेश करीब दस लाख बनता

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स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज ने एक साल में भी 455.66 फीसदी रिटर्न दिया

पिछले दो साल में निफ्टी लगभग सपाट रहा, लेकिन इसी दौरान कई शेयरों ने बहुत तेज रिटर्न दिया. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में कुछ कंपनियों ने 100 फीसदी से लेकर 900 फीसदी से ज्यादा तक रिटर्न दिया. इससे साफ है कि सिर्फ निफ्टी या सेंसेक्स को देखकर पूरे बाजार की तस्वीर नहीं समझी जा सकती. बाजार ऊपर-नीचे होता रहा, लेकिन उसके भीतर कई ऐसे शेयर थे जिन्होंने निवेशकों की रकम कई गुना बढ़ा दी.

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पिछले दो साल में बाजार की चाल

अगर सिर्फ निफ्टी 50 को देखें, तो बीते दो साल बहुत खास नहीं दिखते. इस दौरान निफ्टी ने कई नए रिकॉर्ड बनाए, फिर ग्लोबल टैरिफ को लेकर चिंता बढ़ी और बाजार में तेज गिरावट आई. इसके बाद बाजार में अच्छी वापसी भी हुई, लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े तनाव के चलते उतार-चढ़ाव फिर बढ़ गया. कुल मिलाकर, शुरुआत और मौजूदा स्तर की तुलना करें तो निफ्टी लगभग वहीं नजर आता है.

फिर भी 43 शेयरों ने बनाया बड़ा पैसा

विश्लेषण के मुताबिक, इसी दौरान 43 कंपनियों के शेयरों ने 100 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया. यानी जिन्होंने सिर्फ इंडेक्स नहीं देखा और सही कंपनियां चुनीं, उन्हें बेहतर कमाई का मौका मिला.

सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले शेयर

  • क्यूपिड ने दो साल में करीब 933 फीसदी रिटर्न दिया.
  • अगर किसी निवेशक ने दो साल पहले इसमें 1 लाख रुपये लगाए होते, तो उसकी रकम आज करीब 10 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती थी.
  • सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स ने करीब 805 फीसदी रिटर्न दिया.
  • आक्यूटास केमिकल्स ने करीब 450 फीसदी रिटर्न दिया.
  • स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज ने दो साल में करीब 357 फीसदी रिटर्न दिया. इसी शेयर ने एक साल में 455.66 फीसदी रिटर्न भी दिया.
  • एमटीएआर टेक्नोलॉजीज ने 307 फीसदी रिटर्न दिया.
  • अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने 280 फीसदी रिटर्न दिया.
  • एमसीएक्स ने 271 फीसदी रिटर्न दिया.
  • शेली इंजीनियरिंग प्लास्टिक्स ने 261 फीसदी रिटर्न दिया.
  • लॉरस लैब्स ने 254 फीसदी रिटर्न दिया.
  • थंगामयिल ज्वेलरी ने 252 फीसदी रिटर्न दिया.
  • कारट्रेड टेक ने 241 फीसदी रिटर्न दिया.
  • जीई वर्नोवा टी एंड डी इंडिया ने 231 फीसदी रिटर्न दिया.
  • एवलॉन टेक्नोलॉजीज ने करीब 230 फीसदी रिटर्न दिया.

दोगुने से ज्यादा चढ़ने वाले दूसरे शेयर

इनके अलावा हिताची एनर्जी इंडिया, गैब्रियल इंडिया, वेलस्पन कॉर्प, ब्लैक बॉक्स, लॉयड्स एंटरप्राइजेज, लॉयड्स मेटल्स, रैडिको खेतान, न्यूलैंड लेबोरेटरीज, दीपक फर्टिलाइजर्स, गारवेयर हाई टेक फिल्म्स, फोर्टिस हेल्थकेयर और वन 97 कम्युनिकेशंस यानी पेटीएम जैसे शेयरों ने भी 100 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया.

किन सेक्टरों ने बनाई बात

दिए गए कंटेंट के मुताबिक, इन कंपनियों की सबसे बड़ी ताकत इनके सेक्टर रहे. पिछले दो साल में जिन क्षेत्रों में तेज बढ़त दिखी, उनमें डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर, स्पेशियलिटी केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्पेशियलिटी मैन्युफैक्चरिंग शामिल रहे.जिन कंपनियों का कारोबार तेजी से बढ़ा, उनके शेयरों में भी तेज चढ़ाई दिखी. यही वजह रही कि निफ्टी सपाट दिखने के बावजूद कई शेयर लगातार ऊपर जाते रहे.

आम निवेशक के लिए सबसे बड़ी सीख

इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी सीख यह है कि निफ्टी सपाट हो तो भी पूरा बाजार सपाट नहीं होता. कई बार बड़े सूचकांक ज्यादा नहीं बढ़ते, लेकिन उनके भीतर कुछ कंपनियां बहुत तेज रिटर्न दे देती हैं. विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि अनुभवी निवेशक सिर्फ इंडेक्स पर नहीं टिकते. वे मजबूत कारोबार, अच्छी मैनेजमेंट, बढ़ती कमाई और आगे की संभावना पर ध्यान देते हैं.

इतिहास क्या कहता है

एडलवाइस म्यूचुअल फंड के आंकड़ों के मुताबिक, 2001 के बाद जब भी निफ्टी करीब दो साल तक सपाट रहा, उसके बाद अगले एक साल में बाजार ने अच्छा रिटर्न दिया. कई बार यह रिटर्न 5 फीसदी रहा, तो कई बार 50 फीसदी तक पहुंचा.

आंकड़ों में 2001 की सुस्ती, 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस और कोरोना महामारी के बाद की चाल का भी जिक्र है. इन दौरों के बाद धैर्य रखने वाले निवेशकों को आगे चलकर बेहतर रिटर्न मिला.

आगे क्या देख रहे हैं जानकार

बाजार के जानकारों का मानना है कि लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक दिख रही है. साथ ही, वित्त वर्ष 27 के लिए कंपनियों की कमाई के अनुमान में भी सुधार देखने को मिल रहा है. जानकारों के मुताबिक, अगर वैश्विक तनाव कम होता है और भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है, तो आगे शेयर बाजार में फिर अच्छी तेजी देखने को मिल सकती है. इसी वजह से कई जानकार भारतीय बाजार, खासकर लार्जकैप शेयरों को लेकर फिर से सकारात्मक नजरिए के साथ देख रहे हैं.

कुल मिलाकर, पिछले दो साल की चाल यही बताती है कि सिर्फ निफ्टी का रिटर्न देखकर बाजार को समझना अधूरा नजरिया हो सकता है. सही कंपनी की पहचान, मजबूत कारोबार पर भरोसा, लंबी अवधि की सोच और धैर्य, यही वे बातें हैं जो सपाट दिखते बाजार में भी बड़े मौके खोज सकती हैं.

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