जुलाई में फिर चमकेगा Nifty? 25 साल के आंकड़े दे रहे हैं मजबूत संकेत

जून में करीब 2 फीसदी चढ़ने के बाद निफ्टी पर अब जुलाई की नजर है. 25 साल के आंकड़े, सस्ता कच्चा तेल और स्थिर रुपया इस बार भी बाजार को सहारा दे रहे हैं.

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न्यूज तक डेस्क

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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जुलाई में Nifty का औसत रिटर्न 2.19 फीसदी रहा है

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सामान्य मानसून और पहली तिमाही नतीजों की उम्मीद बाजार संभालती रही

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कच्चा तेल 72 डॉलर पर आने से लागत दबाव घट सकता

जून में निफ्टी करीब 2 फीसदी चढ़ा है और अब बाजार की नजर जुलाई पर है. पुराने आंकड़े बताते हैं कि ये महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए अक्सर मजबूत रहा है.सैमको सिक्योरिटीज के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, 2001 से 2025 के बीच निफ्टी 50 ने जुलाई में 25 में से 18 बार बढ़त दर्ज की है. यानी जुलाई में बाज़ार के ऊपर जाने के 72 फीसदी चांस है

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जुलाई का पुराना रिकॉर्ड

आंकड़ों के हिसाब से जुलाई में निफ्टी का औसत रिटर्न 2.19 फीसदी रहा है. इस आधार पर दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई तीसरा सबसे बेहतर महीना रहा है. जून के आखिर में भी निफ्टी ने करीब 2 फीसदी की बढ़त के साथ महीना पूरा किया, इसलिए अब यह देखा जा रहा है कि क्या जुलाई भी यही रफ्तार बनाए रख पाएगा.

मजबूती की वजह क्या है

सैमको सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च विश्लेषक जाहोल प्रजापति ने कहा कि जुलाई की मजबूती को पहले भी कई वजहों का सहारा मिला है. इनमें सामान्य मानसून की शुरुआत, पहली तिमाही के नतीजों से जुड़ी बेहतर उम्मीदें और घरेलू नकदी का मजबूत बने रहना शामिल है.

ब्रोकरेज का कहना है कि इस साल बड़ी आर्थिक तस्वीर भी बाजार के पक्ष में दिख रही है. पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम होने और अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद के बाद कच्चे तेल का भाव घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया है. इससे महंगाई का दबाव कम हो सकता है और भारतीय कंपनियों की लागत भी घट सकती है. बाजार के लिए इसे राहत का संकेत माना जा रहा है.

रुपया और विदेशी बिकवाली पर नजर

रिपोर्ट के मुताबिक, साल की शुरुआत में तेज उतार-चढ़ाव के बाद रुपये में अब कुछ स्थिरता के संकेत दिखे हैं. साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी कुछ नरम पड़ी है. इससे बड़े निवेश प्रवाह का माहौल बेहतर हो सकता है.जाहोल प्रजापति के मुताबिक, अगर वैश्विक जोखिम काबू में रहते हैं तो ये सभी वजहें मिलकर भारतीय शेयर बाजार के लिए सहारा देने वाला माहौल बना सकती हैं.

निवेशकों के लिए क्या अहम है

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की बदलती कीमतों की वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया था. अब बाजार उस कमजोरी से कुछ हद तक उबरता दिख रहा है. जुलाई में जून तिमाही के नतीजों का दौर शुरू होगा, इसलिए निवेशक कंपनियों की टिप्पणी पर करीबी नजर रखेंगे. खास तौर पर मांग में सुधार and मुनाफे के मार्जिन के रुख को समझने की कोशिश होगी.

जुलाई में मजबूती के संकेत

2001 से 2025 के बीच जुलाई में निफ्टी 25 में से 18 बार चढ़ा है.जुलाई में निफ्टी का औसत रिटर्न 2.19 फीसदी रहा है.दिसंबर और नवंबर के बाद जुलाई तीसरा सबसे मजबूत महीना रहा है.कच्चा तेल करीब 72 डॉलर प्रति बैरल तक आने से महंगाई और लागत पर दबाव कम हो सकता है.रुपये में स्थिरता और विदेशी बिकवाली में कमी को भी बाजार के लिए सहारा माना जा रहा है.हालांकि पुराना रुझान आगे की चाल की गारंटी नहीं देता. फिर भी फिलहाल बाजार की उम्मीद यही है कि जुलाई एक बार फिर निफ्टी के लिए मजबूत महीना साबित हो सकता है.

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