भारतीय बैंकिंग सेक्टर को लेकर विदेशी ब्रोकरेज फर्म Nomura ने एक पॉजिटिव आउटलुक पेश किया है. ब्रोकरेज का मानना है कि देश में लोन ग्रोथ की रफ्तार फिलहाल मजबूत बनी हुई है और वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही तक इसमें मजबूती जारी रह सकती है. इसके अलावा बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी लिक्विडिटी और विदेशी मुद्रा प्रवाह को देखते हुए Nomura ने कुछ बैंक शेयरों को अपनी पसंदीदा लिस्ट में शामिल किया है.
ADVERTISEMENT
रिपोर्ट में बड़े बैंकों में ICICI Bank, HDFC Bank और Kotak Mahindra Bank को लेकर सकारात्मक रुख रखा गया है. वहीं मिड-साइज बैंकों में IDFC First Bank, Federal Bank और IndusInd Bank को भी पसंदीदा बैंकों में शामिल किया गया है.
भारतीय बैंकिंग सिस्टम में मजबूत बनी हुई है लोन की मांग
किसी भी बैंक के कारोबार को समझने के लिए सबसे अहम चीज होती है कि बैंक कितनी तेजी से लोन दे रहा है और उसके पास डिपॉजिट कितना बढ़ रहा है. क्योंकि बैंकिंग बिजनेस का मूल मॉडल ही यही है कि बैंक ग्राहकों से पैसा जमा लेते हैं और फिर उसी पैसे को लोन के रूप में आगे देते हैं.
Nomura के मुताबिक, भारत में फिलहाल लोन की मांग मजबूत बनी हुई है. जून 2026 में पूरे बैंकिंग सिस्टम की क्रेडिट ग्रोथ 18.3 फीसदी रही. इसका मतलब है कि बैंकों का लोन पोर्टफोलियो पिछले साल के मुकाबले 18.3 फीसदी बढ़ा है.
इससे पहले मई 2026 में क्रेडिट ग्रोथ 16.9 फीसदी और अप्रैल 2026 में 16.1 फीसदी थी. यानी लगातार तीन महीनों में बैंकिंग सिस्टम की लोन ग्रोथ में सुधार देखने को मिला है.
किन सेक्टरों में बढ़ी कर्ज की मांग?
बैंकिंग सिस्टम में लोन ग्रोथ को आगे बढ़ाने में कई सेक्टरों की अहम भूमिका रही है.
सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जहां क्रेडिट ग्रोथ 21 फीसदी रही. इसके बाद इंडस्ट्री सेक्टर में 19 फीसदी, कृषि क्षेत्र में 17 फीसदी और रिटेल सेगमेंट में 16 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
रिटेल सेगमेंट में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्ज शामिल होते हैं, जहां लगातार मांग बनी हुई है. अगर सर्विस सेक्टर के अंदर देखें तो NBFC यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों को दिए गए लोन में 32 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई. वहीं रियल एस्टेट सेक्टर को मिलने वाला कर्ज 22 फीसदी और ट्रेड सेक्टर को मिलने वाला कर्ज 19 फीसदी बढ़ा.
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों में कर्ज की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.
FY27 की पहली छमाही तक लोन ग्रोथ मजबूत रहने का अनुमान
Nomura का कहना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही तक बैंकिंग सेक्टर में लोन ग्रोथ की रफ्तार मजबूत रह सकती है.
हालांकि ब्रोकरेज का अनुमान है कि इसके बाद धीरे-धीरे ग्रोथ में कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन इसके बावजूद वित्त वर्ष 2027 में लोन ग्रोथ करीब 15 फीसदी के आसपास बनी रहने की उम्मीद है. ब्रोकरेज के मुताबिक, मजबूत मांग, बेहतर बेस इफेक्ट और बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी लिक्विडिटी इस ग्रोथ को सपोर्ट कर सकती है.
FCNR डिपॉजिट से बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी नकदी
बैंकों की मजबूत लोन ग्रोथ के पीछे एक बड़ी वजह सिस्टम में बढ़ी लिक्विडिटी भी है. हाल के दिनों में FCNR यानी Foreign Currency Non-Resident Deposits में तेजी देखने को मिली है. RBI की विशेष व्यवस्था के बाद विदेशों में रहने वाले भारतीयों से बैंकों को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जमा मिली है.
31 जुलाई तक बैंकिंग सिस्टम ने करीब 36.7 अरब डॉलर के FCNR डिपॉजिट जुटा लिए थे. वहीं 17 जुलाई तक यह आंकड़ा करीब 17 अरब डॉलर था. यानी सिर्फ दो हफ्तों में FCNR डिपॉजिट में बड़ा उछाल आया, जिससे बैंकिंग सिस्टम में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा.
बैंकिंग सिस्टम में ₹1.3 लाख करोड़ का सरप्लस
FCNR डिपॉजिट बढ़ने का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर पड़ा है. 22 जुलाई तक बैंकिंग सिस्टम की स्थिति लगभग न्यूट्रल थी, लेकिन 31 जुलाई तक इसमें करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस आ गया.
आसान भाषा में समझें तो बैंकों के पास अब पहले के मुकाबले ज्यादा नकदी उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल वे लोन देने के लिए कर सकते हैं. FCNR डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए कई बड़े निजी बैंकों ने ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की है. उदाहरण के तौर पर HDFC Bank तीन से पांच साल की FCNR जमा पर 6.25 फीसदी तक ब्याज दे रहा है.
Nomura की पसंद में कौन-कौन से बैंक?
बैंकिंग सेक्टर को लेकर सकारात्मक माहौल के बीच Nomura ने कुछ बैंकों को अपनी पसंदीदा सूची में रखा है.
बड़े बैंकों में:
- ICICI Bank.
- HDFC Bank.
- Kotak Mahindra Bank.
मिड-साइज बैंकों में:
- IDFC First Bank.
- Federal Bank.
- IndusInd Bank.
इन बैंकों को लेकर ब्रोकरेज ने सकारात्मक रुख दिखाया है और इन्हें Buy रेटिंग दी है.
ब्रोकरेज की राय को निवेश की गारंटी नहीं माना जा सकता
हालांकि किसी भी ब्रोकरेज की रिपोर्ट को निवेश की गारंटी नहीं माना जा सकता. 'Buy' रेटिंग का मतलब सिर्फ यह होता है कि किसी संस्था के विश्लेषण के मुताबिक उस शेयर में संभावनाएं दिखाई दे रही हैं.
शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी होता है.
बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या संकेत?
कुल मिलाकर Nomura की रिपोर्ट भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है. मजबूत लोन ग्रोथ, बढ़ी हुई लिक्विडिटी और विदेशी मुद्रा प्रवाह ने बैंकों के लिए माहौल बेहतर बनाया है.
अब आने वाले महीनों में बैंकिंग सेक्टर की रफ्तार कितनी बनी रहती है, यह तिमाही नतीजों, RBI की नीतियों और अर्थव्यवस्था की मांग पर निर्भर करेगा.
ADVERTISEMENT

