भारतीय अब रिटायरमेंट को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर हो रहे हैं. NPS पर भरोसा बढ़ा है और लोग बुढ़ापे के लिए ज्यादा पैसा जोड़ने का लक्ष्य भी तय कर रहे हैं. लेकिन एक बड़ी कमी अब भी है लोग यह सही तरीके से अंदाजा नहीं लगा पा रहे कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें वास्तव में कितने पैसे की जरूरत होगी. HDFC Pension की NPS Preference Index Study 2026 में यह बात सामने आई है. स्टडी के मुताबिक, NPS को लेकर लोगों की पसंद और भरोसा बढ़ा है. 2023 में NPS Preference Index 54 अंक था, जो 2026 में बढ़कर 57 अंक हो गया है.
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NPS को लेकर बढ़ी समझ और दिलचस्पी
स्टडी में NPS को लेकर लोगों की समझ और रुचि में भी सुधार देखने को मिला है. NPS को लेकर लोगों की गंभीरता का स्कोर 2023 के मुकाबले 6 अंक बढ़कर 59 हो गया है. वहीं, NPS के बारे में जानकारी का स्कोर 3 अंक बढ़कर 58 और पसंद का स्कोर 2 अंक बढ़कर 56 हो गया.यानी अब लोग सिर्फ NPS के बारे में जानने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रिटायरमेंट के लिए इसे एक विकल्प के तौर पर गंभीरता से देख भी रहे हैं.
रिटायरमेंट फंड का लक्ष्य बढ़ा, लेकिन जरूरत से कम
रिटायरमेंट के लिए लोगों का अनुमानित लक्ष्य भी बढ़ा है. 2023 में लोग औसतन 1.34 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड पर्याप्त मान रहे थे. 2026 में यह लक्ष्य बढ़कर 1.5 करोड़ रुपये हो गया है. हालांकि, स्टडी के मुताबिक यह रकम अब भी परिवार की सालाना आय के 10 गुने से कम है. इससे पता चलता है कि रिटायरमेंट के बाद होने वाले खर्च, महंगाई और मेडिकल जरूरतों को लेकर लोगों का अनुमान अभी भी कम हो सकता है.
रिटायरमेंट से पहले मेडिकल खर्च और बच्चों की पढ़ाई
रिटायरमेंट की प्लानिंग लोगों की प्राथमिकताओं में अभी भी सबसे ऊपर नहीं है. सर्वे में 45 फीसदी लोगों ने मेडिकल खर्च, 39 फीसदी ने इमरजेंसी के लिए बचत और 35 फीसदी ने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. बुढ़ापे को लेकर सबसे बड़ी चिंता भी स्वास्थ्य से जुड़ी है. 47 फीसदी लोगों ने बढ़ते मेडिकल खर्च और 44 फीसदी लोगों ने उम्र के साथ होने वाली बीमारियों को बड़ी चिंता बताया. वहीं, 69 फीसदी लोगों को उम्मीद है कि रिटायरमेंट के बाद उनके बच्चे या परिवार आर्थिक रूप से उनकी मदद करेंगे.
उत्तर भारत में NPS को लेकर सबसे ज्यादा भरोसा
क्षेत्र के हिसाब से देखें तो उत्तर भारत NPS Preference Index में सबसे आगे रहा. यहां स्कोर 60 रहा. पूर्वी भारत का स्कोर 58, दक्षिण भारत का 57 और पश्चिम भारत का 54 रहा. पूर्वी भारत में NPS की जानकारी में सबसे ज्यादा सुधार देखने को मिला है.
NPS में निवेश की वजह क्या है?
NPS में हाल के बदलाव भी लोगों को इस स्कीम से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. सर्वे में 39 फीसदी लोगों ने कहा कि NPS में हुए नए बदलाव इसकी तरफ आकर्षित करने की बड़ी वजह हैं. इसके बाद 38 फीसदी लोगों ने टैक्स बचत और 36 फीसदी ने बेहतर रिटर्न को NPS से जुड़ने की वजह बताया. NPS की खूबियों की बात करें तो 59 फीसदी लोगों ने 60 साल की उम्र के बाद बिना टैक्स कटे पैसे निकालने की सुविधा को अहम माना. वहीं 52 फीसदी लोगों ने सरकार की निगरानी में होने को इसकी बड़ी खासियत बताया.
पैसा लंबे समय तक लॉक रहना अब भी चिंता
NPS को लेकर कुछ चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं. 26 फीसदी लोगों ने पैसे के लंबे समय तक लॉक रहने को बड़ी परेशानी बताया. वहीं 25 फीसदी लोगों ने रिटायरमेंट के समय एक हिस्से से अनिवार्य रूप से पेंशन प्लान खरीदने की शर्त को अड़चन माना. हालांकि, एक सकारात्मक बदलाव यह है कि 2023 में NPS को लेकर जानकारी की कमी सबसे बड़ी समस्या थी, लेकिन अब यह पांचवें स्थान पर आ गई है. यानी लोगों की NPS को लेकर समझ में सुधार हुआ है.
बच्चों के लिए भी NPS में बढ़ी दिलचस्पी
स्टडी में पहली बार NPS वात्सल्य को भी शामिल किया गया. सर्वे में शामिल 28 फीसदी माता-पिता को इस स्कीम के बारे में जानकारी थी. इनमें से 27 फीसदी ने कहा कि वे इसकी सुविधाओं को अच्छी तरह समझते हैं. बच्चों के लिए NPS वात्सल्य में निवेश की सबसे बड़ी वजहों में टैक्स बचत (44 फीसदी) और बच्चों में कम उम्र से बचत की आदत विकसित करना (41 फीसदी) शामिल रहा.
HDFC Pension के MD और CEO श्रीराम अय्यर के मुताबिक, भारत में लोग रिटायरमेंट की तैयारी को लेकर पहले से ज्यादा गंभीर हो रहे हैं. NPS Preference Index में बढ़ोतरी भी इसी बदलाव को दिखाती है. हालांकि, अब अगली चुनौती यह है कि NPS के बारे में सोचने वाले लोग वास्तव में इसमें निवेश शुरू करें और अपने रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त फंड तैयार करें.
13 शहरों में हुआ सर्वे
यह स्टडी मार्केट रिसर्च कंपनी Ipsos के साथ मिलकर की गई है. इसमें देश के 13 शहरों में 30 से 55 साल की उम्र के 1,812 लोगों से बातचीत की गई. NPS Preference Index की शुरुआत 2023 में NPS दिवस के मौके पर हुई थी. इसका मकसद यह समझना है कि समय के साथ भारतीयों की रिटायरमेंट प्लानिंग और NPS को लेकर सोच में किस तरह बदलाव आ रहा है.
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