NSE Co-location Case: सुप्रीम कोर्ट से NSE को बड़ी राहत, IPO के बीच खत्म हुआ करीब एक दशक पुराना विवाद

संदीप शर्मा

• 02:37 PM • 18 Sep 2026

एनएसई के आईपीओ के बीच सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सेबी से सेटलमेंट को मंजूरी के बाद पुराना को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवाद लगभग खत्म माना जा रहा है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

करीब दस साल पुराने मामले में तेज डेटा पहुंच पर सवाल उठे

डार्क फाइबर से कुछ ट्रेडर्स को बढ़त मिली या नहीं जांच हुई

विवाद खत्म करने के लिए एक्सचेंज ने 1491.21 करोड़ रुपये चुकाए

National Stock Exchange यानी NSE के लिए IPO के बीच बड़ी राहत की खबर आई है. सुप्रीम कोर्ट ने NSE और बाजार नियामक SEBI के बीच हुए सेटलमेंट को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही NSE से जुड़े करीब एक दशक पुराने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले की कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है.यह मामला ऐसे समय खत्म हुआ है, जब NSE का करीब 22,569 करोड़ रुपये का IPO सब्सक्रिप्शन के लिए खुला हुआ है. IPO 17 सितंबर को खुला है और 21 सितंबर को बंद होगा.

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क्या है पूरा मामला?

को-लोकेशन मामले की शुरुआत करीब एक दशक पहले हुई थी. आरोपों की जांच में यह देखा गया था कि NSE के को-लोकेशन सिस्टम का इस्तेमाल करने वाले कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को दूसरे मार्केट पार्टिसिपेंट्स के मुकाबले ट्रेडिंग इंफ्रा और मार्केट डेटा तक तेज पहुंच मिली या नहीं. जांच में डार्क फाइबर कनेक्टिविटी का मुद्दा भी सामने आया था. डार्क फाइबर ऐसी समर्पित फाइबर-ऑप्टिक कनेक्टिविटी होती है, जिसके जरिए ट्रेडिंग सिस्ट्म्स तक तेज और सीधी कनेक्टिविटी हासिल की जा सकती है. मामले में ये सवाल उठा था कि क्या कुछ चुनिंदा ट्रेडिंग मेंबर्स को NSE के ट्रेडिंग इंफ्रा तक ऐसी पहुंच मिली, जिससे उन्हें दूसरे बाजार प्रतिभागियों के मुकाबले फायदा हुआ.

NSE ने कितना पैसा देकर मामला निपटाया?

इस विवाद को खत्म करने के लिए NSE ने SEBI के consent mechanism के तहत करीब 1,491.21 करोड़ रुपये का settlement किया.अब सुप्रीम कोर्ट ने pending proceedings को dispose कर दिया है और SEBI से जुड़े enforcement actions भी बंद होने की राह साफ हो गई है. इससे NSE पर लंबे समय से चले आ रहे इस regulatory matter का overhang काफी हद तक खत्म हो गया है.

NSE के IPO के बीच क्यों अहम है ये खबर?

इस खबर की टाइमिंग काफी अहम है. NSE का बहुप्रतीक्षित IPO अभी subscription के लिए खुला हुआ है.

IPO का कुल आकार करीब 22,568.94 करोड़ रुपये है और इसका price band 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर रखा गया है. IPO पूरी तरह Offer for Sale यानी OFS है. इसका मतलब है कि नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि मौजूदा shareholders अपने शेयर बेच रहे हैं.

IPO 17 सितंबर को खुला और 21 सितंबर को बंद होगा. दूसरे दिन 18 सितंबर को institutional investors की category पूरी तरह subscribe हो गई थी और दोपहर तक पूरे IPO को करीब 89% subscription मिल चुका था.

निवेशकों के लिए क्या बदला?

NSE के लिए co-location मामला लंबे समय से एक regulatory uncertainty बना हुआ था. अब सुप्रीम कोर्ट से settlement को मंजूरी मिलने के बाद इस पुराने मामले से जुड़ी कानूनी अनिश्चितता काफी कम हो गई है.

इससे IPO के दौरान निवेशकों के sentiment को भी सहारा मिल सकता है. हालांकि NSE की valuation और future growth का आकलन सिर्फ इस मामले के खत्म होने से नहीं किया जा सकता.

NSE की कमाई का बड़ा हिस्सा trading activity से आता है. खासकर derivatives कारोबार में बदलाव, trading volumes और regulatory changes कंपनी की आगे की earnings के लिए अहम रहेंगे. Reuters के मुताबिक हाल के समय में derivatives volumes पर दबाव और regulatory changes को लेकर निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई है.

IPO को कैसी प्रतिक्रिया मिल रही है?

NSE IPO के पहले दिन subscription करीब 42% रहा था. दूसरे दिन institutional investors की मजबूत भागीदारी देखने को मिली और 18 सितंबर को दोपहर तक overall subscription करीब 89% पहुंच गया था.

IPO में qualified institutional buyers के लिए करीब 50% हिस्सा और retail investors के लिए करीब 35% हिस्सा रखा गया है.

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से NSE के लिए करीब एक दशक पुराने co-location और dark fibre विवाद का एक बड़ा regulatory overhang हट गया है.

अब बाजार की नजर NSE की IPO subscription, valuation और आगे की earnings growth पर होगी.

यानी सुप्रीम कोर्ट से कानूनी राहत तो मिल गई है, लेकिन IPO के बाद NSE के शेयर का प्रदर्शन trading volumes, derivatives business, regulation और कमाई की growth पर निर्भर करेगा.

फिलहाल NSE के लिए एक बड़ा पुराना विवाद पीछे छूट गया है और यह राहत ऐसे समय मिली है जब देश के सबसे बड़े stock exchange का IPO निवेशकों के लिए खुला हुआ है.