देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. कंपनी का मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ा है, हालांकि ऑपरेशनल रेवेन्यू में कुछ गिरावट दर्ज की गई. इस बीच, NSE के लंबे समय से इंतजार किए जा रहे IPO को लेकर भी बड़ी अपडेट सामने आई है.
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जून तिमाही में 9% बढ़ा मुनाफा
NSE का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट जून तिमाही में बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये रहा. पिछली मार्च तिमाही में कंपनी का मुनाफा 2,871 करोड़ रुपये था. यानी तिमाही आधार पर कंपनी के मुनाफे में करीब 8.7% की बढ़ोतरी हुई.
ऑपरेशनल रेवेन्यू में आई गिरावट
कंपनी की ऑपरेशंस से होने वाली आय जून तिमाही में 4,560 करोड़ रुपये रही, जो मार्च तिमाही के 4,968 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 8.2% कम है.
EBITDA मार्जिन में हुआ सुधार
NSE का EBITDA मार्च तिमाही के 3,633 करोड़ रुपये से घटकर जून तिमाही में 3,551 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, कंपनी की EBITDA मार्जिन पहले के 73.1% से बढ़कर 77.9% हो गई. इसका मतलब है कि कम रेवेन्यू के बावजूद कंपनी ने अपने खर्चों पर बेहतर नियंत्रण रखा और परिचालन क्षमता में सुधार किया.
सितंबर तक आ सकता है NSE का IPO
तिमाही नतीजों के साथ NSE के IPO को लेकर भी बड़ी जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सचेंज की सितंबर 2026 तक BSE पर लिस्टिंग हो सकती है.
फिलहाल NSE के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की मंजूरी का इंतजार है. सूत्रों के अनुसार, अगस्त के मध्य तक SEBI की मंजूरी मिल सकती है.
निवेशकों से चल रही बातचीत
IPO से पहले NSE अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोडशो कर रहा है. साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ भी बातचीत जारी है, ताकि शेयरों की मांग और संभावित वैल्यूएशन का आकलन किया जा सके.
हालांकि, IPO का अंतिम आकार, कंपनी का वैल्यूएशन और लिस्टिंग की तारीख बाजार की स्थिति और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी.
को-लोकेशन केस में भी जल्द आ सकता है फैसला
SEBI जल्द ही NSE को-लोकेशन मामले में अंतिम सेटलमेंट ऑर्डर भी जारी कर सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में सेटलमेंट की राशि 1,400 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है.
यह मामला साल 2015 में सामने आया था, जब आरोप लगे थे कि कुछ को-लोकेशन क्लाइंट्स को NSE के ट्रेडिंग सिस्टम तक दूसरों के मुकाबले पहले पहुंच मिली, जिससे उन्हें ट्रेडिंग में अनुचित फायदा हुआ.
करीब 10 साल से अटका है NSE का IPO
NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए आवेदन किया था. लेकिन को-लोकेशन विवाद के बाद नियामकीय जांच शुरू होने से इसकी लिस्टिंग की प्रक्रिया रुक गई थी.
बाद में एक्सचेंज ने पुराने नियामकीय मामलों को सुलझाने की दिशा में काम किया और 17 जून 2026 को SEBI के पास फिर से अपना DRHP दाखिल किया.
पूरी तरह Offer for Sale होगा IPO
NSE का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा. इसके तहत 14.89 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे. इसका मतलब है कि IPO से मिलने वाली राशि कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि अपने शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी.
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