NSE की शेयर बाजार में लिस्टिंग के साथ Exchange Sector में एक नया मुकाबला देखने को मिल रहा है. लिस्टिंग के पहले दिन NSE का शेयर करीब 3 फीसदी की तेजी के साथ ₹1,841 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि BSE का शेयर करीब 0.9 फीसदी की गिरावट के साथ ₹3,242 के आसपास था. लेकिन सिर्फ एक दिन के भाव से यह तय नहीं किया जा सकता कि दोनों में कौन सा शेयर निवेश के लिहाज से बेहतर है.
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असल कहानी NSE और BSE की बाजार हिस्सेदारी, कमाई, ग्रोथ की गुंजाइश और वैल्यूएशन में छिपी है. आइए समझते हैं कि दोनों एक्सचेंज का कारोबार किस तरह अलग है और बड़े ब्रोकरेज इन दोनों शेयरों को किस नजर से देख रहे हैं.
NSE की सबसे बड़ी ताकत है बाजार पर पकड़
NSE का सबसे बड़ा फायदा उसकी मजबूत बाजार हिस्सेदारी है. इक्विटी कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी करीब 93 फीसदी है. इक्विटी फ्यूचर्स में यह करीब 99.8 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस में करीब 75 फीसदी है.
यानी शेयर बाजार में होने वाली ट्रेडिंग का बहुत बड़ा हिस्सा NSE के प्लेटफॉर्म से होकर गुजरता है.
NSE की बाजार में पकड़
- इक्विटी कैश मार्केट: करीब 93 फीसदी
- इक्विटी फ्यूचर्स: करीब 99.8 फीसदी
- इक्विटी ऑप्शंस: करीब 75 फीसदी
- मजबूत लिक्विडिटी और बड़ा ट्रेडिंग नेटवर्क
यही वजह है कि NSE की कहानी को मुख्य तौर पर बाजार में दबदबे की कहानी माना जा रहा है. हालांकि, इसी कारोबार से जुड़ा एक जोखिम भी है. NSE की कमाई में ट्रेडिंग एक्टिविटी और खासकर डेरिवेटिव्स की बड़ी भूमिका है. ऐसे में नियमों में बदलाव या डेरिवेटिव्स कारोबार में कमी का असर कमाई पर पड़ सकता है.
BSE की कहानी मार्केट शेयर बढ़ाने की
BSE की तस्वीर NSE से अलग है. इसकी बाजार हिस्सेदारी छोटी है, लेकिन खासकर डेरिवेटिव्स कारोबार में पिछले कुछ समय में इसकी मौजूदगी बढ़ी है. ऐसे में BSE के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह NSE से लगातार कुछ बाजार हिस्सेदारी हासिल कर पाएगा.
अगर ऐसा होता है, तो छोटी मौजूदा हिस्सेदारी के आधार पर BSE की कमाई में तेज बढ़ोतरी की गुंजाइश बन सकती है. यही वजह है कि कुछ ब्रोकरेज BSE में ग्रोथ की संभावना देख रहे हैं.
Macquarie का BSE पर नजरिया
- रेटिंग: Outperform
- टारगेट प्राइस: ₹4,000
- कैश इक्विटी में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद
- F&O कारोबार में ग्रोथ की गुंजाइश
- गैर-ट्रांजैक्शन आय से भी सपोर्ट की उम्मीद
लेकिन BSE को लेकर सभी ब्रोकरेज एकमत नहीं
यहीं से BSE की कहानी थोड़ी दिलचस्प हो जाती है. Macquarie जहां BSE में ग्रोथ की संभावना देख रहा है, वहीं Nuvama और Jefferies का नजरिया ज्यादा सावधानी वाला है.
Nuvama ने BSE की रेटिंग Buy से घटाकर Hold कर दी और टारगेट ₹4,090 से घटाकर ₹3,240 कर दिया. ब्रोकरेज ने Closing Auction Session यानी CAS, RBI के बैंक गारंटी नियमों और डेरिवेटिव्स एक्टिविटी को लेकर चिंता जताई है.
BSE के डेरिवेटिव्स कारोबार को लेकर Nuvama के कुछ आंकड़े भी ध्यान देने लायक हैं.
- इंडेक्स ऑप्शंस प्रीमियम वॉल्यूम करीब ₹18,100 करोड़.
- जनवरी 2025 के बाद सबसे कम स्तर.
- कॉन्ट्रैक्ट शेयर करीब 51.5 फीसदी.
- प्रीमियम टर्नओवर में हिस्सेदारी करीब 36 फीसदी.
मतलब कॉन्ट्रैक्ट की संख्या में BSE की हिस्सेदारी मजबूत दिख रही है, लेकिन प्रीमियम टर्नओवर में तस्वीर उतनी मजबूत नहीं है.
वहीं Jefferies ने BSE पर Underperform रेटिंग के साथ ₹2,940 का टारगेट दिया है. ब्रोकरेज ने STT में संभावित बदलाव, RBI के नियम और CAS को प्रमुख जोखिमों में गिना है. इसके अलावा घरेलू प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स की करीब 50 फीसदी नॉटIONAL टर्नओवर हिस्सेदारी को भी एक जोखिम बताया गया है.
NSE पर Macquarie का दांव
NSE को लेकर Macquarie का नजरिया सकारात्मक है. ब्रोकरेज ने NSE पर Outperform रेटिंग के साथ ₹1,965 का टारगेट दिया है.
NSE के मामले में कहानी मुख्य तौर पर बड़े बाजार हिस्से, मजबूत लिक्विडिटी और नेटवर्क इफेक्ट पर टिकी है. इसके अलावा बाजार में भागीदारी बढ़ने और गैर-ट्रांजैक्शन आय में ग्रोथ को भी NSE के लिए संभावित सहारा माना गया है.
NSE बनाम BSE: निवेशक को क्या समझना चाहिए?
सीधी भाषा में देखें तो NSE की कहानी एक मजबूत और स्थापित कारोबार की है, जबकि BSE की कहानी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाकर तेज ग्रोथ हासिल करने की कोशिश की है.
इसलिए दोनों शेयरों को देखते समय सिर्फ आज का भाव या किसी एक ब्रोकरेज का टारगेट देखना पर्याप्त नहीं होगा. बाजार हिस्सेदारी, कमाई की रफ्तार, वैल्यूएशन, ट्रेडिंग वॉल्यूम और नियामकीय बदलाव जैसे पहलुओं को साथ में देखना जरूरी होगा.
NSE की लिस्टिंग के बाद Exchange Sector में अब निवेशकों के सामने दो अलग तरह की कहानियां हैं. एक तरफ बाजार में मजबूत पकड़, दूसरी तरफ उस पकड़ को चुनौती देने की कोशिश. आने वाले समय में बाजार हिस्सेदारी और कमाई के आंकड़े बताएंगे कि इन दोनों कहानियों में कितना दम है.
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