भारत के शेयर बाजार में निवेशकों का नक्शा तेजी से बदल रहा है. कभी निवेश का केंद्र सिर्फ मुंबई, दिल्ली और देश के बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में नए निवेशक शेयर बाजार से जुड़ रहे हैं. NSE के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर भारत देश में नए निवेशकों को जोड़ने के मामले में सबसे आगे निकल गया है.
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उत्तर भारत की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
उत्तर भारत के पास NSE के कुल रजिस्टर्ड निवेशकों का 36.7 फीसदी हिस्सा है. मई 2026 में देश में जुड़े नए निवेशकों में उत्तर भारत की हिस्सेदारी 42.2 फीसदी रही.ये हिस्सा देश के किसी भी दूसरे क्षेत्र के मुकाबले सबसे ज्यादा है.यानी शेयर बाजार में निवेश का केंद्र अब सिर्फ पारंपरिक वित्तीय शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. लखनऊ, कानपुर, जयपुर और दूसरे टियर-2 और टियर-3 शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग इक्विटी मार्केट में निवेश कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश सबसे आगे
उत्तर भारत की इस ग्रोथ में उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे अहम है. मई 2026 में देश में जुड़े कुल नए निवेशकों में अकेले उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 16.1 फीसदी रही. यानी एक महीने में करीब 1.7 लाख नए निवेशक यूपी से शेयर बाजार से जुड़े.पिछले चार वर्षों में देश के नए निवेशकों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 4.8 प्रतिशत बढ़ी है.ये दिखाता है कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ आबादी के लिहाज से ही बड़ा राज्य नहीं है, बल्कि देश के कैपिटल मार्केट में भी इसकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है.
पश्चिम भारत का हिस्सा घटा
कभी पश्चिम भारत, खासकर मुंबई और महाराष्ट्र, NSE के निवेशक आधार की ग्रोथ का सबसे बड़ा केंद्र थे.हालांकि, अब तस्वीर बदल रही है. मई 2026 में नए निवेशकों के जुड़ने में पश्चिम भारत की हिस्सेदारी 21.2 फीसदी रही. 2022 के मुकाबले इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है. महाराष्ट्र में मई 2026 में करीब 1.1 लाख नए निवेशक जुड़े. ये देश में नए निवेशकों की कुल संख्या का करीब 11 फीसदी है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि पश्चिम भारत का महत्व कम हो गया है. मुंबई आज भी देश के वित्तीय बाजार का सबसे बड़ा केंद्र है.
दक्षिण भारत में मजबूती
दक्षिण भारत ने भी शेयर बाजार में निवेश के मामले में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है. मई 2026 में नए निवेशकों के जुड़ने में दक्षिण भारत की हिस्सेदारी 22.3 फीसदी रही. तमिलनाडु की हिस्सेदारी अकेले 6 फीसदी रही. हालांकि, पिछले साल की तुलना में दक्षिण भारत में नए निवेशकों की संख्या में 16.6 फीसदी की गिरावट आई है. बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण नए निवेशकों में कुछ सावधानी देखने को मिली है. हालांकि, इसे लंबी अवधि की कमजोरी नहीं माना जा रहा है.
पूर्वी भारत की भागीदारी बढ़ी
पूर्वी भारत अभी NSE के कुल निवेशक आधार में सबसे छोटा क्षेत्र है, लेकिन नए निवेशकों की संख्या में इसकी ग्रोथ तेजी से बढ़ रही है.
मई 2026 में पूर्वी भारत की नए निवेशकों में हिस्सेदारी 14 फीसदी रही. पश्चिम बंगाल से 6.7 फीसदी और बिहार से 6.6 फीसदी नए निवेशक जुड़े. इस तरह दोनों राज्य देश में नए निवेशकों को जोड़ने वाले शीर्ष पांच राज्यों में शामिल रहे. खास तौर पर बिहार का शेयर बाजार में बढ़ता निवेश यह दिखाता है कि अब छोटे शहरों और उन राज्यों के लोग भी तेजी से औपचारिक निवेश की ओर बढ़ रहे हैं, जिन्हें पहले शेयर बाजार से कम जुड़ा माना जाता था.
युवा निवेशक बदल रहे तस्वीर
राष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों की उम्र का प्रोफाइल तेजी से बदल रहा है. मई 2026 तक 30 साल से कम उम्र के रजिस्टर्ड निवेशकों की हिस्सेदारी 38.3% हो चुकी है. नए जुड़ने वाले निवेशकों में 53% से 59% तक लोग 30 साल से कम उम्र के हैं. इसका मतलब है कि छोटे शहरों और अपने गृह राज्यों में लौटने वाली युवा कामकाजी आबादी अब औपचारिक निवेश की तरफ बढ़ रही है. यह रुझान उत्तर, पूर्व, दक्षिण और पश्चिम, सभी क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर दिख रहा है.
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