सितंबर शेयर बाजार के लिए मुश्किल महीना रहा. Nifty में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई और सितंबर सीरीज में करीब 1,400 अंकों की कमजोरी देखने को मिली. इसके साथ ही Nifty लगातार आठ हफ्तों तक गिरा.
ADVERTISEMENT
इस दौरान विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चिंता रही. सितंबर में FII ने दो महीने से चली आ रही खरीदारी का सिलसिला तोड़ दिया. 2026 में भारतीय शेयर बाजार से FII/FPI का कुल आउटफ्लो भी ₹2.5 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है.
अब अक्टूबर शुरू हो चुका है और बाजार के सामने सवाल है कि सितंबर की कमजोरी के बाद क्या रिकवरी की शुरुआत होगी या दबाव अभी जारी रहेगा. एक्सपर्ट्स के मुताबिक आने वाले हफ्तों में पांच संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
1. FII Flow: विदेशी निवेशकों की वापसी सबसे अहम
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की रिकवरी के सामने बड़ी चुनौती है. घरेलू निवेशक गिरावट के दौरान बाजार को सहारा दे रहे हैं, लेकिन विदेशी पूंजी की वापसी बाजार की धारणा को मजबूत करने में अहम हो सकती है.
अगर FII की बिकवाली कम होती है और खरीदारी लौटती है, तो बाजार को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है.
2. US Bond Yield और Dollar पर नजर
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची रहने पर वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर वाली संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं. इसका असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर पड़ सकता है.
इसके साथ मजबूत डॉलर रुपये पर भी दबाव बढ़ा सकता है. कमजोर रुपया भारत के लिए आयात लागत बढ़ाने के साथ विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा जोखिम भी बढ़ाता है.
3. Crude Oil: भारत के लिए बड़ा जोखिम
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. इसलिए Crude Oil की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आयात बिल पर पड़ सकता है.
महंगा Crude महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि अक्टूबर में बाजार की नजर तेल की कीमतों पर भी रहेगी.
4. त्योहारी मांग से मिल सकता है घरेलू सहारा
वैश्विक दबाव के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था बाजार के लिए एक सकारात्मक पहलू हो सकती है. त्योहारी सीजन में अगर खपत बढ़ती है, तो Auto, FMCG और दूसरी Consumer कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है.
इसके अलावा Government Spending भी कुछ क्षेत्रों में मांग को सहारा दे सकती है.
5. Q2 Earnings होगा अगला बड़ा टेस्ट
अक्टूबर में कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे भी बाजार के लिए अहम रहेंगे. निवेशक सिर्फ मुनाफे के आंकड़े नहीं देखेंगे, बल्कि यह भी देखेंगे कि कंपनियों की बिक्री, मार्जिन और भविष्य के अनुमान पर मौजूदा दबावों का कितना असर पड़ा है.
खास तौर पर नजर रहेगी:
- बिक्री और मुनाफे की बढ़ोतरी पर.
- मार्जिन पर Crude और रुपये के असर पर.
- कंपनियों के भविष्य के अनुमान पर.
- Management की मांग और कारोबार को लेकर टिप्पणी पर.
एक्सपर्ट्स को कैसी रिकवरी दिख रही है?
Blue Aster Capital के Sidharth Sogani Jain के मुताबिक अक्टूबर में बाजार स्थिर हो सकता है, लेकिन अगले तीन महीनों में रिकवरी के लिए Crude Oil और US Bond Yields की दिशा महत्वपूर्ण रहेगी. उनका आधारभूत अनुमान अक्टूबर से दिसंबर के बीच उतार-चढ़ाव वाली रिकवरी का है. उनके मुताबिक Large Cap शेयर पहले संभल सकते हैं, जबकि Mid और Small Cap को ज्यादा समय लग सकता है.
Mangal Keshav Financial के Paresh Bhagat के मुताबिक FII Flow, Global Bond Yields और Rupee में सुधार रिकवरी के लिए अहम होंगे. अगर इन तीन में से कम से कम दो संकेत बेहतर होते हैं, तो बाजार की रिकवरी को ज्यादा मजबूत सहारा मिल सकता है.
वहीं Bonanza की Khushi Mistry के मुताबिक सितंबर की गिरावट से Valuations कुछ हद तक सामान्य हुए हैं, लेकिन अक्टूबर में तुरंत तेज V-Shaped Recovery की उम्मीद करना मुश्किल है. उनके मुताबिक Crude, US Yields, FPI Flows, Rupee और Q2 Earnings आगे बाजार के प्रमुख संकेत रहेंगे.
अक्टूबर में बाजार के लिए असली परीक्षा
कुल मिलाकर अक्टूबर में बाजार के सामने राहत और जोखिम दोनों मौजूद हैं. FII की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, Crude और रुपये की चाल वैश्विक दबाव तय करेंगे, जबकि त्योहारी मांग और Q2 Earnings घरेलू तस्वीर बताएंगे.
यानी आने वाले हफ्तों में सिर्फ Nifty का स्तर देखना काफी नहीं होगा. असली नजर इन पांच संकेतों पर रहेगी कि इनमें से कौन सा पहले बाजार के पक्ष में बदलता है.
ADVERTISEMENT

