कभी गणित में कम नंबर पाने वाला एक छात्र आज ऐसे रॉकेट बना रहा है, जो सैटेलाइट को अंतरिक्ष में पहुंचा रहे हैं. पवन कुमार चंदना की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शुरुआती असफलताएं किसी इंसान का भविष्य तय नहीं करतीं. आज उन्हें भारत के उन चुनिंदा उद्यमियों में गिना जाता है, जिन्होंने देश के निजी स्पेस सेक्टर को नई दिशा दी है. उन्होंने ISRO की सुरक्षित नौकरी छोड़ी, जोखिम उठाया और Skyroot Aerospace जैसी कंपनी खड़ी की, जिसने भारत के प्राइवेट रॉकेट लॉन्च के सपने को हकीकत में बदल दिया.
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51 नंबर से शुरू हुई कहानी
पवन कुमार चंदना का जन्म 1991 में तेलंगाना के हैदराबाद में हुआ. बचपन से ही उन्हें मशीनों और टेक्नोलॉजी को समझने में दिलचस्पी थी. हालांकि पढ़ाई का सफर शुरुआत में आसान नहीं था.खासकर गणित उनके लिए बड़ी चुनौती था. स्कूल के दिनों में एक समय ऐसा आया जब उन्हें Maths में सिर्फ 51 नंबर मिले. लेकिन जहां कई बच्चे ऐसे नंबरों के बाद अपना आत्मविश्वास खो देते हैं, वहीं पवन ने अपनी कमजोरी को मेहनत से ताकत में बदल दिया.उनके पिता ने उनका साथ दिया और पढ़ाई में सुधार के लिए उन्हें कोचिंग दिलाई. धीरे-धीरे गणित और विज्ञान में उनकी पकड़ मजबूत होती गई.इसके बाद उन्होंने पहली कोशिश में IIT Entrance Exam पास किया और साल 2007 में IIT Kharagpur पहुंचे. यहां उन्होंने Mechanical Engineering में Dual Degree पूरी की.जब कई युवा बड़ी कंपनियों में नौकरी के सपने देख रहे थे, तब पवन का ध्यान रॉकेट और स्पेस टेक्नोलॉजी की तरफ था.
IIT से ISRO तक का सफर
साल 2012 में पवन कुमार चंदना ISRO से जुड़े. उन्होंने Vikram Sarabhai Space Centre में काम किया, जहां भारत के कई बड़े स्पेस मिशनों पर काम होता है.ISRO में रहते हुए उन्होंने GSLV Mk-III, S-200 Solid Booster और Small Satellite Launch Vehicle जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया.उनकी तकनीकी क्षमता और काम को देखते हुए उन्हें ISRO Innovation Award भी मिला.लेकिन ISRO में काम करते हुए उनके मन में एक सवाल लगातार बना रहा. क्या अंतरिक्ष क्षेत्र सिर्फ सरकारी संस्थानों तक सीमित रहना चाहिए? क्या भारत में निजी कंपनियां भी अपने रॉकेट नहीं बना सकतीं?यही सोच आगे चलकर उनके जीवन का सबसे बड़ा फैसला बनी.
ISRO छोड़कर शुरू किया Space Startup
साल 2018 में पवन कुमार चंदना ने एक सुरक्षित सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला लिया.यह आसान फैसला नहीं था. उस समय भारत में निजी कंपनियों के लिए स्पेस सेक्टर अभी खुला नहीं था और रॉकेट बनाना दुनिया के सबसे मुश्किल कामों में शामिल था. लेकिन पवन ने जोखिम उठाया. ISRO के उनके साथी नागा भरत डाका के साथ मिलकर उन्होंने हैदराबाद में Skyroot Aerospace की शुरुआत की. शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती थी निवेश जुटाना और लोगों को यह भरोसा दिलाना कि एक भारतीय प्राइवेट कंपनी भी रॉकेट बना सकती है. पवन ने LinkedIn के जरिए Myntra के फाउंडर बिन्नी बंसल से संपर्क किया. उनकी सोच से प्रभावित होकर बिन्नी बंसल ने कंपनी में करीब 1.5 मिलियन डॉलर का निवेश किया.इसके बाद Covid महामारी का दौर आया और फंडिंग जुटाना मुश्किल हो गया. ऐसे समय में हैदराबाद की Renewable Energy कंपनी Greenko ने Skyroot का साथ दिया और निवेश के जरिए कंपनी को आगे बढ़ने में मदद की.
2020 में रचा इतिहास
साल 2020 Skyroot Aerospace के लिए बेहद खास रहा.कंपनी ने भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी बनकर अपना रॉकेट इंजन सफलतापूर्वक टेस्ट किया. इस इंजन का नाम Raman-1 रखा गया, जो महान वैज्ञानिक डॉ. सी.वी. रमन को समर्पित था.यह उपलब्धि सिर्फ एक इंजन टेस्ट नहीं थी. यह संकेत था कि भारत की निजी कंपनियां भी एडवांस स्पेस टेक्नोलॉजी विकसित कर सकती हैं. इसके बाद भारत सरकार ने स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलना शुरू किया. Skyroot उन शुरुआती कंपनियों में शामिल रही, जिसने ISRO के साथ MoU साइन किया.
Vikram-S से Vikram-1 तक
18 नवंबर 2022 को Skyroot ने भारत का पहला निजी रॉकेट लॉन्च किया. इसका नाम था Vikram-S. यह एक Sub-Orbital Rocket था, यानी यह अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंचा लेकिन पृथ्वी की कक्षा में नहीं गया. हालांकि यह मिशन कंपनी के लिए बड़ा कदम था, क्योंकि इससे साबित हो गया कि भारत की निजी कंपनियां भी रॉकेट लॉन्च करने की क्षमता रखती हैं. इसके बाद कंपनी का अगला बड़ा लक्ष्य था Orbital Rocket और यही सपना Vikram-1 के साथ पूरा हुआ.
Vikram-1 क्यों है बड़ी उपलब्धि?
Vikram-1 सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि भारत के निजी स्पेस सेक्टर की बड़ी उपलब्धि है. करीब सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट छोटे सैटेलाइट को पृथ्वी से करीब 450 किलोमीटर ऊपर Low Earth Orbit तक पहुंचाने के लिए बनाया गया है. यह करीब 350 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने में सक्षम है और इसे भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है. Vikram-1 की सफलता के साथ Skyroot उन चुनिंदा निजी कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने Orbital Rocket Launch की क्षमता हासिल की है.
अंतरिक्ष में Cab Service का सपना
पवन चंदना का लक्ष्य सिर्फ रॉकेट बनाना नहीं है. वह अंतरिक्ष तक पहुंच को आसान बनाना चाहते हैं. आज किसी कंपनी को सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए कई बार लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. Skyroot इस मॉडल को बदलना चाहती है. कंपनी का "Cab to Space" मॉडल इसी सोच पर आधारित है. यानी जैसे कोई व्यक्ति अपनी जरूरत के हिसाब से कैब बुक करता है, वैसे ही भविष्य में कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से रॉकेट लॉन्च बुक कर सकेंगी.
भारत के Space Future की नई उम्मीद
दुनिया की स्पेस इकोनॉमी करीब 600 अरब डॉलर की है. इसमें सैटेलाइट कम्युनिकेशन, इंटरनेट, नेविगेशन, मौसम की जानकारी, अर्थ ऑब्जर्वेशन और डिफेंस जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं. Skyroot की नजर सिर्फ भारतीय बाजार पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सैटेलाइट लॉन्च मार्केट पर है. पवन कुमार चंदना की कहानी सिर्फ एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं है. यह उस बच्चे की कहानी है, जिसे कभी Maths में 51 नंबर मिले थे, लेकिन जिसने हार नहीं मानी. आज वही बच्चा भारत के निजी स्पेस सेक्टर की नई पहचान बन चुका है. यह कहानी बताती है कि सही मेहनत और बड़े सपनों के साथ कमजोरी भी एक दिन सबसे बड़ी ताकत बन सकती है.
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