यूपीआई शुल्क की खबर से पेटीएम और मोबिक्विक के शेयर धड़ाम, 10% तक की गिरावट

सौरभ दीक्षित

08 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 8 2026 2:10 PM)

यूपीआई पर प्रस्तावित 0.4% व्यापारी शुल्क की लागू होने की तारीख टलने की खबरों के बीच पेटीएम और मोबिक्विक के शेयरों में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। पेटीएम के शेयर करीब 10% और मोबिक्विक के शेयर करीब 7% तक टूटे। जानिए क्या है यूपीआई शुल्क का पूरा मामला, इसे क्यों टाला जा सकता है और इसका पेटीएम व मोबिक्विक की कमाई पर क्या असर पड़ सकता है।

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न्यूज़ हाइलाइट्स

डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट

वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर 10% तक टूटे

मोबिक्विक के शेयर में भी करीब 7% की गिरावट

डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयर कारोबार के दौरान करीब 10% तक टूट गए। वहीं मोबिक्विक के शेयर में भी करीब 7% की गिरावट दर्ज की गई। शेयरों में यह गिरावट यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित नए व्यापारी शुल्क को लागू करने की तारीख टलने की खबरों के बीच आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूपीआई पर नए व्यापारी शुल्क की व्यवस्था अब 15 अक्टूबर 2026 के बजाय 1 जनवरी 2027 से लागू हो सकती है। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

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पेटीएम के शेयर में 10% तक गिरावट

गुरुवार के कारोबार में वन97 कम्युनिकेशंस का शेयर बीएसई पर करीब 10% गिरकर ₹1,560.60 पर आ गया। सुबह 9:28 बजे तक एनएसई और बीएसई को मिलाकर कंपनी के करीब 3.64 मिलियन शेयरों में कारोबार हो चुका था। इस गिरावट के साथ पेटीएम का शेयर अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर ₹1,856.50 से करीब 16% नीचे आ गया है। यह उच्चतम स्तर 16 सितंबर 2026 को देखा गया था। हालांकि, इस साल शेयर ने शानदार तेजी भी दिखाई है। 30 मार्च 2026 को इसका 52 सप्ताह का निचला स्तर ₹947.15 था। वहां से शेयर करीब 96% तक चढ़ चुका है।

मोबिक्विक के शेयर भी दबाव में

मोबिक्विक की मूल कंपनी वन मोबिक्विक सिस्टम्स के शेयर भी गुरुवार के कारोबार में दबाव में रहे। बीएसई पर शेयर करीब 7% गिरकर ₹238.25 के स्तर पर आ गया। हालांकि, यहां एक बात ध्यान देने वाली है। पिछले 3 कारोबारी सत्रों में मोबिक्विक के शेयर में करीब 22% की तेजी आई थी। ऐसे में गुरुवार की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गुरुवार को सुबह तक एनएसई और बीएसई को मिलाकर मोबिक्विक के करीब 6.76 मिलियन शेयरों में कारोबार हुआ।

आखिर यूपीआई शुल्क की खबर से शेयर क्यों गिरे?

दरअसल, सितंबर 2026 में सरकार ने ₹2,000 से ज्यादा के पात्र यूपीआई व्यापारिक भुगतानों पर 0.4% व्यापारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। इसमें प्रति लेनदेन अधिकतम ₹300 शुल्क की सीमा रखी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, छोटे कारोबारियों और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले भुगतान को इस शुल्क से बाहर रखा जाना है। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की बात थी। लेकिन अब खबरें हैं कि इसे 1 जनवरी 2027 तक टाला जा सकता है। इस देरी की वजह त्योहारों का मौसम बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि व्यापारियों, बैंकों और भुगतान से जुड़ी कंपनियों को नई व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय देने के मकसद से तारीख आगे बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, शुल्क की मूल व्यवस्था में बदलाव की संभावना फिलहाल नहीं बताई गई है।

पेटीएम के लिए शुल्क क्यों अहम है?

यूपीआई पर व्यापारी शुल्क लागू होने से डिजिटल भुगतान कंपनियों के लिए कमाई का एक नया रास्ता खुल सकता है। यही वजह है कि बाजार में इस व्यवस्था को लेकर काफी उम्मीदें बनी हुई थीं। ब्रोकरेज कंपनी जेफरीज ने सितंबर में कहा था कि प्रस्तावित शुल्क उसकी शुरुआती उम्मीद से ज्यादा है। पहले बाजार में करीब 0.25% शुल्क की उम्मीद थी, जबकि प्रस्ताव में 0.4% शुल्क की बात सामने आई। जेफरीज ने पहले पेटीएम की कमाई के अनुमान में 20-25% तक बदलाव किया था। अब ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2028 और वित्त वर्ष 2029 के लिए कंपनी की कमाई के अनुमान में 10-12% तक की और बढ़ोतरी की है। हालांकि, इसमें छूट, प्रतिस्पर्धा और भुगतान कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति जैसे कई पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है।

अब आगे क्या?

फिलहाल सबसे बड़ी नजर यूपीआई व्यापारी शुल्क की अंतिम तारीख पर रहेगी। अगर इसे 1 जनवरी 2027 से लागू करने का फैसला होता है, तो पेटीएम, मोबिक्विक और दूसरी भुगतान कंपनियों को नई व्यवस्था से कमाई शुरू होने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, अगर सरकार शुल्क लागू करने की तारीख को लेकर जल्द फैसला करती है, तो इन कंपनियों के शेयरों में दोबारा हलचल देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि सिर्फ शुल्क लागू होने से कंपनियों की कमाई कितनी बढ़ेगी, यह तय नहीं होता। भुगतान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा, व्यापारियों को मिलने वाली छूट और शुल्क का कितना हिस्सा वास्तव में कंपनियों के पास जाएगा, इन सभी बातों का असर कमाई पर पड़ेगा। फिलहाल बाजार की नजर इसी बात पर है कि यूपीआई शुल्क की नई व्यवस्था कब लागू होती है और इसका सबसे ज्यादा फायदा किस भुगतान कंपनी को मिलता है।