LPG के बाद क्या पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम? केंद्र सरकार ने बताया पूरा प्लान

देश में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है. सरकार ने गैर-सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ा दिए हैं. हालांकि इस बढ़ोतरी के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी.

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न्यूज तक डेस्क

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वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अब भारतीय रसोई तक पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आए उछाल के चलते सरकार ने घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर के दामों में 60 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है. हालांकि, आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखने का फैसला लिया गया है.

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क्यों बढ़ीं कीमतें?

इन दामों में वृद्धि के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से भारत अपना अधिकांश तेल और गैस आयात करता है, वहां आवाजाही ठप होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है. इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं.

पेट्रोल-डीजल पर क्या है सरकार का प्लान?

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम न बढ़ाने का मन बनाया है. इसके पीछे तर्क यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने इस साल की शुरुआत में अच्छा मुनाफा कमाया है. कंपनियों के पास फिलहाल इतनी वित्तीय क्षमता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बढ़ते बोझ को खुद झेल सकें और उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन से बचा सकें.

कितने में मिलेगा LPG सिलेंडर

एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने के बाद अब दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर ₹913 का हो गया है, जो पहले ₹853 था. वहीं मुंबई में इसकी कीमत ₹912.50, कोलकाता में ₹939 और चेन्नई में ₹928.50 हो गई है. अलग-अलग राज्यों में टैक्स और वैट के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है.

कमर्शियल गैस भी हुई महंगी

घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत भी बढ़ाई गई है. होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹114.5 की बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में अब इसकी कीमत ₹1883 हो गई है. इस साल अब तक कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कुल ₹302.50 की वृद्धि हो चुकी है.

उज्ज्वला योजना के सिलेंडर दाम में कितना असर

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी इस बढ़ोतरी का असर झेलना पड़ेगा. हालांकि उन्हें सरकार की ओर से प्रति सिलेंडर ₹300 की सब्सिडी मिलती है. नई कीमतों के बाद उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को एक सिलेंडर के लिए करीब ₹613 चुकाने होंगे. देश में इस योजना के तहत 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया गया है.

सरकार का कहना है कि एक औसत परिवार साल में लगभग 4 से 5 सिलेंडर इस्तेमाल करता है. ऐसे में इस बढ़ोतरी का असर प्रतिदिन लगभग 80 पैसे के बराबर पड़ता है, जबकि चार सदस्यों वाले परिवार के लिए यह प्रति व्यक्ति लगभग 20 पैसे प्रतिदिन के बराबर है.

कई देशों से सस्ती है भारत में LPG

सरकारी सूत्रों का कहना है कि बढ़ोतरी के बाद भी भारत में एलपीजी की कीमत कई पड़ोसी देशों से कम है. उदाहरण के तौर पर काठमांडू में एक सिलेंडर करीब ₹1207, श्रीलंका में लगभग ₹1241 और पाकिस्तान में करीब ₹1046 का मिलता है. इसके मुकाबले भारत में कीमत अभी भी कम है.

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी कीमतें

ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. इसके कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत लगभग 35 प्रतिशत बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 92.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है. एशियाई बाजारों में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कीमत भी बढ़कर 25.40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू हो गई है.

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. देश लगभग आधा कच्चा तेल और करीब 40 प्रतिशत प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से मंगाता है. साल 2024-25 में भारत ने कुल 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत की, जिसमें से केवल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन देश में हुआ, जबकि बाकी गैस आयात करनी पड़ी.

रिफाइनरियों को उत्पादन में तेजी लाने के आदेश

ऐसे हालात में देश में गैस की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश के भीतर ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी रहे.

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