सरकार ने 1 सितंबर से पेट्रोल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स फिर बढ़ा दिया है. पेट्रोल पर अब 1.5 रुपये प्रति लीटर लेवी लगेगी, जबकि डीजल एक्सपोर्ट पर लेवी 24 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर ड्यूटी 19.5 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
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अहम बात यह है कि यह बदलाव सिर्फ विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होगा. सरकार के मुताबिक, इसका घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों या हवाई यात्रा के किराए पर कोई सीधा असर नहीं होगा.
मुख्य बदलाव
• पेट्रोल एक्सपोर्ट पर लेवी 0 से बढ़कर 1.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
• डीजल एक्सपोर्ट पर लेवी 24 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
• एटीएफ एक्सपोर्ट पर ड्यूटी 19.5 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
किस ईंधन पर कितना शुल्क
सरकार के अनुसार, पेट्रोल पर 1.5 रुपये प्रति लीटर की पूरी लेवी स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी एसएईडी के रूप में ली जाएगी. डीजल पर कुल 25 रुपये प्रति लीटर में 24 रुपये एसएईडी होंगे और 1 रुपया रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस यानी आरआईसी के तौर पर लिया जाएगा. एटीएफ पर 19 रुपये प्रति लीटर की पूरी लेवी एसएईडी के रूप में वसूली जाएगी.
इस बदलाव का सीधा मतलब यह है कि तेल कंपनियों के लिए पेट्रोल और डीजल को विदेश में बेचना अब पहले से महंगा होगा. दूसरी तरफ, एटीएफ पर 50 पैसे प्रति लीटर की थोड़ी राहत दी गई है.
पिछली समीक्षा में क्या हुआ था
लेवी में पिछला बदलाव 15 अगस्त को किया गया था. तब सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट ड्यूटी को शून्य कर दिया था. उसी समीक्षा में डीजल पर 24 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 19.5 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी तय की गई थी.
अब ताजा समीक्षा में पेट्रोल एक्सपोर्टर्स को पिछले पखवाड़े में मिली राहत वापस ले ली गई है. डीजल पर 1 रुपया प्रति लीटर का इजाफा किया गया है, जबकि एटीएफ पर 50 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई है.
हर पखवाड़े क्यों बदलती हैं दरें
सरकार कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा करती है. सरकार के मुताबिक, यह व्यवस्था 27 मार्च, 2026 से लागू है ताकि पश्चिम एशिया संकट के बीच जरूरत पड़ने पर एक्सपोर्ट को हतोत्साहित किया जा सके और घरेलू उपलब्धता बनी रहे.
सरकार ने साफ कहा है कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी नई दरें सिर्फ एक्सपोर्ट पर लागू होंगी और देश के अंदर बिकने वाले ईंधन पर इनका असर नहीं पड़ेगा.
कुल मिलाकर, 1 सितंबर से पेट्रोल और डीजल एक्सपोर्ट पर शुल्क बढ़ा है, जबकि एटीएफ पर हल्की कटौती की गई है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह फैसला सिर्फ निर्यात के लिए भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होगा और घरेलू ग्राहकों के लिए पेट्रोल, डीजल या हवाई किराए में कोई सीधा बदलाव नहीं लाएगा.
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