PM Modi Appeal on Gold: भारत में फेस्टिव सीजन शुरू होने के साथ ही सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हलचल बढ़ जाती है. अक्तूबर और नवंबर का समय देश में गोल्ड की बिक्री के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इस दौरान दिवाली, धनतेरस के साथ-साथ शादियों के लिए भी बड़ी संख्या में लोग सोना और सोने के गहने खरीदते हैं. लेकिन इस बार सोने की मांग पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील के बाद जानकारों का अनुमान है कि इस फेस्टिव सीजन में सोने की बिक्री 10 से 12 फीसदी तक कम हो सकती है.
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PM मोदी ने फिर की सोने की खरीदारी पर अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 सितंबर को एक बार फिर लोगों से सोने की खरीदारी को लेकर अपील कर चुके हैं. उन्होंने लोगों से कहा कि सोना तभी खरीदा जाए, जब इसकी वास्तव में जरूरत हो. इससे पहले पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के माहौल के दौरान मई में भी प्रधानमंत्री ने लोगों से सोने की खरीदारी को लेकर ऐसी ही अपील की थी. उस समय उन्होंने देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की बात कही थी. सोने की खरीदारी को लेकर इस तरह की अपील के पीछे भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल से जुड़ी चिंता भी बताई गई है.
फेस्टिव सीजन में क्यों अहम है सोने की बिक्री?
अक्तूबर और नवंबर में भारत में सोने की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है. इस दौरान धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं. इसके अलावा देश में शादी-ब्याह के सीजन के कारण भी सोने और सोने के गहनों की खरीदारी बढ़ती है. यही वजह है कि इस अवधि में गोल्ड की बिक्री में होने वाला कोई भी बदलाव ज्वैलरी कारोबार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार हालांकि ऊंची कीमतों के साथ प्रधानमंत्री की अपील भी ग्राहकों के खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर सकती है. जानकारों का मानना है कि अगर ग्राहक गैर-जरूरी खरीदारी को टालते हैं, तो फेस्टिव सीजन में गोल्ड की डिमांड पर सीधा असर पड़ सकता है.
सोने की बिक्री 10-12% तक गिरने का अनुमान
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के मुताबिक प्रधानमंत्री की हालिया अपील के बाद त्योहारों के मौसम में सोने की बिक्री 10 से 12 फीसदी तक कम हो सकती है. उनका मानना है कि प्रधानमंत्री का लोगों पर एक बड़ा प्रभाव है और उनकी अपील ग्राहकों की सोच और खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर सकती है. अगर घरेलू स्तर पर सोने की मांग में 10 से 12 फीसदी की कमी आती है, तो इसका असर देश के गोल्ड इंपोर्ट पर भी दिखाई दे सकता है. ऐसे में भारत के सोने के आयात में भी इसी अनुपात में गिरावट की संभावना जताई जा रही है.
भारत के लिए सोने का आयात क्यों है अहम?
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. देश में सोने की बड़ी मांग को पूरा करने के लिए इसका आयात भी बड़े स्तर पर होता है. सोने के आयात में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल होता है. इससे देश के चालू खाते के घाटे पर भी असर पड़ता है. साथ ही सोने के आयात को रुपये पर दबाव से भी जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि घरेलू स्तर पर सोने की मांग में कमी आने पर इसके आयात पर भी असर पड़ सकता है. प्रधानमंत्री की अपील के पीछे इसी तरह की आर्थिक चिंता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
पिछले साल के मुकाबले करीब 39% महंगा हुआ सोना
सोने की मांग के लिए इस समय कीमत भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले सोने की कीमत में करीब 39 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल सितंबर में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 11,100 रुपये प्रति ग्राम थी. अब इसकी कीमत करीब 15,500 रुपये प्रति ग्राम के आसपास बताई जा रही है. यानी ग्राहकों को पिछले साल के मुकाबले सोना खरीदने के लिए काफी ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है. ऐसे में अगर ग्राहक बजट को ध्यान में रखते हुए गैर-जरूरी खरीदारी टालते हैं, तो इसका असर फेस्टिव सीजन की कुल मांग पर पड़ सकता है.
बढ़ती कीमतें ग्राहकों के बजट पर डाल रही दबाव
सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर ग्राहकों के बजट पर पड़ रहा है. खासकर ज्वैलरी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए बढ़ी हुई कीमतों का मतलब है कि समान मात्रा में सोना खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना होगा. इसके अलावा ज्यादा कस्टम ड्यूटी भी ग्राहकों के बजट पर दबाव बढ़ा रही है. ऐसे माहौल में ग्राहक खरीदारी की मात्रा कम कर सकते हैं या गैर-जरूरी खरीदारी को आगे के लिए टाल सकते हैं. यही कारण है कि इस फेस्टिव सीजन में सोने की मांग को लेकर बाजार में सावधानी देखने को मिल रही है.
ऑर्गनाइज्ड गोल्ड रिटेलर्स की बिक्री में भी गिरावट का अनुमान
क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस फेस्टिव सीजन में सोने के गहनों की मांग मात्रा के हिसाब से कम रहने की उम्मीद है. उनके अनुसार बढ़ती कीमतें और ज्यादा कस्टम ड्यूटी ग्राहकों की खरीदारी क्षमता पर दबाव डाल रही हैं. इसका असर ऑर्गनाइज्ड गोल्ड रिटेलर्स पर भी पड़ सकता है. अनुमान के मुताबिक FY27 में इन रिटेलर्स की बिक्री 13 से 15 फीसदी तक गिर सकती है. इस अनुमान से संकेत मिलता है कि चुनौती सिर्फ फेस्टिव सीजन की मांग तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि ऊंची कीमतों और ग्राहकों के बजट पर दबाव का असर पूरे वित्त वर्ष में भी दिखाई दे सकता है.
सोने की कीमतों पर आगे किन चीजों का असर?
आने वाले हफ्तों में सोने की कीमतों को लेकर बाजार का रुख अस्थिर रह सकता है. इसकी वजह कई बड़े फैक्टर हैं. अमेरिका के फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर फैसला सोने की कीमतों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की चाल और भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार के मूड को प्रभावित कर सकते हैं. यानी एक तरफ सोने की ऊंची कीमतें ग्राहकों की खरीदारी क्षमता को प्रभावित कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालात भी गोल्ड की कीमतों की दिशा पर असर डाल सकते हैं.
फेस्टिव सीजन में गोल्ड मार्केट के लिए बड़ी चुनौती
भारत में फेस्टिव सीजन सोने और ज्वैलरी कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. ऐसे समय में अगर ग्राहकों की मांग कम होती है, तो इसका असर बिक्री के साथ-साथ सोने के आयात पर भी पड़ सकता है. इस बार एक तरफ सोने की कीमत पिछले साल के मुकाबले करीब 39 फीसदी ज्यादा है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैर-जरूरी खरीदारी से बचने की अपील भी चर्चा में है. IBJA के अनुमान के मुताबिक फेस्टिव सीजन में सोने की बिक्री 10 से 12 फीसदी तक गिर सकती है, जबकि क्रिसिल रेटिंग्स के अनुमान में FY27 के दौरान ऑर्गनाइज्ड गोल्ड रिटेलर्स की बिक्री में 13 से 15 फीसदी की गिरावट की संभावना जताई गई है. ऐसे में आने वाला फेस्टिव सीजन गोल्ड मार्केट के लिए काफी अहम रहने वाला है. अब नजर इस बात पर होगी कि ऊंची कीमतों, बढ़ती लागत और प्रधानमंत्री की अपील के बीच ग्राहक सोने की खरीदारी को कितना महत्व देते हैं.
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