ग्रेटर नोएडा की पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा से ग्राहकों के पैसों की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है. आरोप है कि बैंक की एक महिला कर्मचारी ने दूसरे अधिकारियों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर ग्राहकों के खातों से बिना अनुमति पैसे ट्रांसफर किए. इतना ही नहीं, ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में भी कथित तौर पर बदलाव किए गए और कुछ FD समय से पहले बंद कर दी गईं. बैंक ने इस मामले में करीब 10.24 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी की शिकायत की है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
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पासबुक अपडेट कराने पहुंची ग्राहक तो खुला मामला
यह मामला PNB की ग्रेटर नोएडा स्थित सेक्टर पाई-1 ब्रांच का है. बैंक की शिकायत के मुताबिक, संगीता नाम की एक ग्राहक अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने पहुंची थीं. इस दौरान उन्हें 16 सितंबर के तीन ऐसे ट्रांजैक्शन दिखाई दिए, जिनकी उन्होंने अनुमति नहीं दी थी.
जब उन्होंने बैंक कर्मचारी से इस बारे में सवाल किया, तो कथित तौर पर बताया गया कि उन्होंने अपने पति से फोन पर बात करके प्रॉपर्टी में निवेश करने की सहमति दी थी. इसके बाद रकम अशुतोष पाठक नाम के व्यक्ति के खाते में भेजे जाने की बात सामने आई. हालांकि, बैंक को इन ट्रांजैक्शन से जुड़े जरूरी दस्तावेज और वाउचर नहीं मिले.
छह अधिकारियों के लॉगिन-पासवर्ड के इस्तेमाल का आरोप
बैंक की शिकायत में महिला कर्मचारी दीपांशी पर आरोप है कि उन्होंने छह अन्य अधिकारियों के लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए. हालांकि, संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है और जांच का विषय है.
शिकायत के अनुसार, ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम अलग-अलग लोगों के बैंक खातों में भेजी गई. इनमें से कुछ रकम नकद भी निकाली गई. बैंक ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ ग्राहकों के मोबाइल पर आने वाले ट्रांजैक्शन अलर्ट बंद या उनमें बदलाव किए गए थे.
ग्राहकों की FD में भी कथित तौर पर हुआ खेल
इस मामले में सिर्फ सेविंग अकाउंट ही नहीं, बल्कि फिक्स्ड डिपॉजिट को भी निशाना बनाए जाने का आरोप है. बैंक की शुरुआती जांच के मुताबिक, कुछ ग्राहकों की FD में अशुतोष पाठक और अन्य लोगों को जॉइंट होल्डर बनाया गया. इसके अलावा, FD से मिलने वाली रकम के लिए दर्ज बैंक खाते की जानकारी बदलने और कुछ जमा को समय से पहले बंद करने की बात भी सामने आई है.
इस मामले में एक अहम पहलू 49 FD की सूची है, जिसे बैंक ने अपनी शिकायत के साथ दिया है. इस सूची में दर्ज कुल रकम करीब 70.24 करोड़ रुपये बताई गई है. हालांकि, बैंक ने कथित अनधिकृत निकासी से हुए नुकसान का शुरुआती अनुमान 10.24 करोड़ रुपये लगाया है. दोनों आंकड़ों में अंतर क्यों है और कितनी रकम वास्तव में प्रभावित हुई है, इसका पूरा हिसाब अभी जांच के दायरे में है. बैंक ने भी कहा है कि ग्राहकों और नुकसान से जुड़ी जानकारी का मिलान किया जा रहा है.
PNB ने क्या कहा, ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
PNB ने इस मामले को गंभीरता से लेने की बात कही है. बैंक के मुताबिक, अब तक 43 लाख रुपये से जुड़े तीन वैध दावों का निपटारा किया जा चुका है. बैंक ने यह भी भरोसा दिया है कि जांच के बाद सामने आने वाले सभी वास्तविक और वैध दावों का भुगतान किया जाएगा. बैंक संबंधित एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहा है.
वहीं, CBI ने महिला कर्मचारी दीपांशी, अशुतोष पाठक और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. जांच में यह पता लगाया जाएगा कि कथित धोखाधड़ी में किसकी क्या भूमिका थी, कितने ग्राहक प्रभावित हुए और कुल कितनी रकम का नुकसान हुआ. फिलहाल FIR में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है. इन्हें अदालत में साबित होना बाकी है.
इस मामले से बैंक ग्राहकों के लिए एक जरूरी सबक भी निकलता है. अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट नियमित रूप से चेक करें और FD की रसीद, अवधि, जॉइंट होल्डर और मैच्योरिटी पर रकम पाने वाले खाते की जानकारी भी समय-समय पर जांचें. अगर कोई अनजान ट्रांजैक्शन या बिना अनुमति किया गया बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराएं.
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