सोने में गिरावट के बीच पोलैंड का बड़ा खेल, खरीदा 82 टन गोल्ड, मिले कई संकेत

सौरभ दीक्षित

• 01:26 PM • 14 Jul 2026

सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट के बीच पोलैंड ने इस साल 82 टन सोना खरीदा है. जानिए केंद्रीय बैंक गिरावट को मौका क्यों मान रहे हैं और बाजार क्या कह रहा है.

पोलैंड ने सोने में किया बड़ा खेल
पोलैंड ने सोने में किया बड़ा खेल
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न्यूज़ हाइलाइट्स

जनवरी की ऊंचाई से सोना करीब 30 प्रतिशत तक टूट चुका है

जून में सोने ने 2008 के बाद बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की

फेड के सख्त रुख और बॉन्ड रिटर्न से बिकवाली बढ़ी

सोने की कीमतों में गिरावट के बीच पोलैंड का केंद्रीय बैंक लगातार खरीदारी बढ़ा रहा है. इस साल अब तक पोलैंड 82 टन सोना खरीद चुका है. जब छोटे निवेशक गिरावट में सोना बेच रहे हैं और बड़े ट्रेडर मुनाफावसूली कर रहे हैं, तब दुनिया के कुछ केंद्रीय बैंक इसे खरीद का मौका मान रहे हैं. इसी वजह से बाजार में यह चर्चा तेज है कि क्या सोने में आगे फिर बड़ी तेजी आ सकती है.

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आज सोना और चांदी का भाव

14 जुलाई को दोपहर करीब 12 बजकर 30 मिनट पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाला सोना 1100 रुपये से ज्यादा की तेजी के साथ 1,41,480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था.

वहीं 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 3000 रुपये से ज्यादा की तेजी के साथ 2,21,496 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी.

मुख्य बातें

- पोलैंड इस साल अब तक 82 टन सोना खरीद चुका है.

- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के वरिष्ठ विश्लेषक कृष्ण गोपाल के मुताबिक, उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुमान है कि सिर्फ पिछले महीने पोलैंड ने करीब 19 टन सोना खरीदा.

- पोलैंड का लक्ष्य 700 टन सोने का भंडार रखने का है.

- अभी पोलैंड के पास 632.4 टन सोना है.

गिरावट में क्यों खरीद रहा है पोलैंड

नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड के गवर्नर एडम ग्लापिंस्की ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका बैंक लगातार सोना खरीद रहा है और हाल की गिरावट का फायदा उठा रहा है. उनके मुताबिक, यह सबसे ज्यादा सोना खरीदने की दौड़ नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश है.

एडम ग्लापिंस्की ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में, यहां तक कि युद्ध जैसी स्थिति में भी, पोलैंड की वित्तीय सुरक्षा मजबूत रहनी चाहिए. इसी वजह से केंद्रीय बैंक लगातार सोने का जखीरा बढ़ा रहा है.

सोना सस्ता कैसे हुआ

जनवरी के आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है. जून में सोने ने 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की. सिर्फ पिछले महीने ही सोना करीब 11.74 प्रतिशत टूट गया.

सोने में गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व रहा. नए चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुआई में फेड ने संकेत दिए कि साल के अंत तक ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं.

उधर ईरान युद्ध से बने वैश्विक ऊर्जा संकट ने महंगाई का दबाव बढ़ाया. महंगाई बढ़ने से बॉन्ड यील्ड भी ऊपर गई. जब बॉन्ड ज्यादा रिटर्न देने लगते हैं, तब बिना ब्याज वाला सोना कई निवेशकों को कम आकर्षित करता है. इसी वजह से बड़े निवेशकों और छोटे निवेशकों ने बिकवाली की.

निवेशकों और केंद्रीय बैंकों की सोच अलग

जहां आम निवेशक गिरावट देखकर घबरा रहे हैं, वहीं केंद्रीय बैंक इसे लंबी अवधि के लिए खरीद का मौका मान रहे हैं. पोलैंड पिछले कुछ वर्षों से दुनिया के बड़े सोना खरीदार देशों में शामिल रहा है.

पिछले साल पोलैंड ने 100 टन से ज्यादा सोना खरीदा था. इस साल भी उसकी खरीदारी लगभग उसी रफ्तार से जारी है. अभी उसके कुल 632.4 टन सोने में से करीब 100 टन पोलैंड में रखा गया है, जबकि बाकी सोना लंदन और न्यूयॉर्क में सुरक्षित है.

दुनिया के केंद्रीय बैंकों का रुख

हाल में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल और ऑफिशियल मॉनेटरी एंड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस फोरम यानी ओएमएफआईएफ ने केंद्रीय बैंकों के बीच सर्वे किया. दोनों सर्वे में यह बात सामने आई कि दुनिया के केंद्रीय बैंक अभी भी सोना खरीदने के मूड में हैं.

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, बाजार में गिरावट के दौरान जहां छोटे निवेशक और कई ट्रेडर बिकवाली कर रहे हैं, वहीं पोलैंड जैसे केंद्रीय बैंक सोने पर भरोसा बनाए हुए हैं. इसी वजह से बाजार में यह सवाल बना हुआ है कि अगर केंद्रीय बैंकों की खरीद जारी रही, तो क्या सोने में अगली बड़ी तेजी अभी बाकी है.