Indian Rupee : सरकार ने पॉलिमर नोटों को दी मंजूरी, 2 अरब नोट ट्रायल में आएंगे, जानिए क्या होगा पुराने नोट का!

सौरभ दीक्षित

• 12:42 PM • 29 Jul 2026

केंद्र ने 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के ट्रायल को मंजूरी दी. 2 अरब नोट बाजार में आएंगे. पुराने नोट अभी चलते रहेंगे, आगे का फैसला ट्रायल के बाद होगा.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

पुराने कागज के नोट फिलहाल बंद नहीं होंगे और चलते रहेंगे

छोटे नोट ज्यादा इस्तेमाल से जल्दी फटते और गंदे हो जाते

पॉलिमर नोट कागज के नोटों से 2 से 6 गुना ज्यादा टिकते

केंद्र सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है. इसके तहत कुल 2 अरब नोट बाजार में ट्रायल के तौर पर उतारे जाएंगे. यह कदम छोटे मूल्य के नोटों को ज्यादा टिकाऊ बनाने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है. फिलहाल पुराने कागज के नोट बंद नहीं होंगे. सरकार ने साफ कहा है कि अभी सभी पेपर नोटों को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. अगर ट्रायल सफल रहता है, तभी इन नोटों की नियमित छपाई शुरू करने पर आगे फैसला होगा.

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क्या है पूरी योजना

सरकार के मुताबिक, 10 रुपये के 1 अरब और 20 रुपये के 1 अरब पॉलिमर नोट ट्रायल के लिए जारी किए जाएंगे. यानी कुल 2 अरब प्लास्टिक नोट बाजार में आएंगे. यह अभी केवल फील्ड ट्रायल है, इसलिए इसे सभी नोटों में तुरंत बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता.

10 रुपये के 1 अरब पॉलिमर नोट जारी करने की योजना है.

20 रुपये के 1 अरब पॉलिमर नोट भी ट्रायल में शामिल होंगे.

कुल 2 अरब नोट ट्रायल के तौर पर बाजार में उतारे जाएंगे.

पुराने कागज के नोट फिलहाल चलते रहेंगे.

पॉलिमर नोट क्या हैं

अभी भारत में नोट खास तरह के कॉटन फाइबर से बने कागज पर छपते हैं. यह सामान्य कागज से अलग होता है. पॉलिमर नोट एक मजबूत प्लास्टिक फिल्म पर छापे जाते हैं, इसलिए वे ज्यादा टिकाऊ माने जाते हैं.

सरकार इन्हें क्यों लाना चाहती है

सरकार और आरबीआई का मुख्य जोर छोटे मूल्य के नोटों की उम्र बढ़ाने पर है. 10 और 20 रुपये के नोट सबसे ज्यादा लोगों के हाथों से गुजरते हैं. इसी वजह से वे जल्दी फटते हैं, गंदे होते हैं और उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है.

जानकारी के अनुसार, पॉलिमर नोट कागज के नोटों के मुकाबले 2 से 6 गुना ज्यादा समय तक चल सकते हैं. शुरुआत में इन्हें बनाना थोड़ा महंगा हो सकता है, लेकिन लंबे समय में छपाई और बदलने का खर्च कम हो सकता है.

खर्च पर क्या असर पड़ सकता है

आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, एफवाई26 में नोट छापने का खर्च करीब 24% घटकर 4,875 करोड़ रुपये रहा. अगर पॉलिमर नोटों का ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले समय में यह खर्च और कम हो सकता है.

दुनिया के दूसरे देशों का क्या अनुभव है

भारत के लिए यह कदम नया है, लेकिन दुनिया के कई देश पहले से पॉलिमर नोट इस्तेमाल कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में सबसे पहले पॉलिमर नोट शुरू किए थे. आज 60 से ज्यादा देश किसी न किसी रूप में प्लास्टिक नोट चला रहे हैं.

इन देशों में ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम जैसे नाम शामिल हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि यह तकनीक कई जगह काम कर चुकी है.

क्या नकली नोटों पर भी असर पड़ेगा

सरकार के अनुसार, इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य नोटों की उम्र बढ़ाना है. वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक, पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़ना आसान होता है. इससे नकली नोट बनाना पहले के मुकाबले ज्यादा मुश्किल हो सकता है.

कुल मिलाकर, भारत में अभी 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का केवल ट्रायल शुरू होने जा रहा है. पुराने नोट बंद नहीं होंगे. लेकिन अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो आगे चलकर छोटे मूल्य के नोट ज्यादा मजबूत, ज्यादा टिकाऊ और खर्च के हिसाब से बेहतर साबित हो सकते हैं.