RBI MPC Decision: RBI ने दिया ग्रोथ का 'बूस्टर', FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% किया

संदीप शर्मा

05 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 5 2026 11:04 AM)

आरबीआई ने 2026-27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% किया है. रेपो रेट स्थिर रखा गया, लेकिन किफायती आवास की मांग और घरों की कीमतों को लेकर रियल एस्टेट की चिंता बनी हुई है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

घरेलू मांग और निवेश ने देश की आर्थिक रफ्तार को सहारा दिया

पहली तिमाही का ग्रोथ अनुमान 7.0% और दूसरी तिमाही 6.4%

तीसरी और चौथी तिमाही के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया

भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की घोषणा के साथ वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए देश की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा दिया है. RBI गवर्नर ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. RBI का मानना है कि घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और व्यापक आर्थिक स्थिरता के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.

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तिमाही आधार पर भी बढ़ा अनुमान

RBI ने पहली और दूसरी तिमाही के लिए भी GDP ग्रोथ अनुमान में संशोधन किया है, जबकि तीसरी और चौथी तिमाही का अनुमान पहले जैसा ही रखा गया है.
 

अवधि अब पहले
Q1 FY27 7.0% 6.6% 
Q2 FY27  6.4% 6.3%
Q3 FY27 6.5% 6.5%
Q4 FY27 6.8% 6.8%

RBI का मानना है कि ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, जिससे विकास दर को समर्थन मिलेगा.

Artha Bharat Investment Managers IFSC LLP के मैनेजिंग पार्टनर सचिन सावरिकर ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखना संतुलित और भरोसेमंद फैसला है. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जैसे जोखिम बने हुए हैं. उनके मुताबिक, अगर भू-राजनीतिक हालात और बिगड़ते हैं तो RBI रुपये को स्थिर रखने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है. फिलहाल यह फैसला जोखिम खत्म होने का नहीं, बल्कि हालात पर नजर रखते हुए लिया गया एक रणनीतिक विराम है.

रियल एस्टेट सेक्टर की क्या राय?

RBI ने इस बार नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में कोई बदलाव नहीं किया. इस फैसले का रियल एस्टेट सेक्टर ने स्वागत किया है, हालांकि उद्योग का कहना है कि केवल स्थिर ब्याज दर से Affordable Housing की मांग में बड़ी तेजी आने की संभावना नहीं है.

ANAROCK Group के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ब्याज दर को स्थिर रखना सकारात्मक संकेत है, लेकिन इससे मास-मार्केट हाउसिंग सेगमेंट को नई गति नहीं मिलेगी.उन्होंने कहा कि ANAROCK के Q2 2026 के आंकड़ों के अनुसार देश के शीर्ष सात शहरों में आवासीय बिक्री सालाना आधार पर 6% घटकर करीब 90,715 यूनिट रह गई, जबकि नए लॉन्च 7% बढ़कर लगभग 1.06 लाख यूनिट हो गए. इसके बावजूद किफायती आवास की हिस्सेदारी घटकर कुल लॉन्च का सिर्फ 6% रह गई है.

महंगे घरों की मांग तेज़

अनुज पुरी के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता किफायती आवास की है, क्योंकि इस श्रेणी की मांग ब्याज दरों के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होती है. दूसरी ओर, शीर्ष शहरों में औसत आवासीय कीमतें अभी भी सालाना करीब 7% की दर से बढ़ रही हैं, जिससे आम खरीदारों के लिए घर खरीदना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.उन्होंने कहा कि फिलहाल रियल एस्टेट बाजार संतुलित जरूर दिख रहा है, लेकिन यह संतुलन मुख्य रूप से लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट की वजह से आया है, न कि उस किफायती श्रेणी से जो बड़े पैमाने पर घर खरीदने वालों की जरूरतों को पूरा करती है.

अर्थव्यवस्था को मिलेगा समर्थन

RBI के FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाया जाना इस बात का संकेत है कि केंद्रीय बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर आश्वस्त है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापक आर्थिक वृद्धि का लाभ सभी क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए खासकर किफायती आवास जैसे मांग-आधारित सेक्टरों में अतिरिक्त प्रोत्साहन की जरूरत बनी रहेगी..