RBI MPC Decision: Repo Rate में कोई बदलाव नहीं, लगातार चौथी बार 5.25% पर बरकरार. EMI पर फिलहाल नहीं मिलेगी राहत

तनीषा त्यागी

05 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 5 2026 11:47 AM)

आरबीआई ने अगस्त 2026 की बैठक में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा. महंगाई, तेल कीमत और वैश्विक तनाव के बीच होम लोन EMI में अभी राहत नहीं मिली.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

दिसंबर 2025 की कटौती के बाद ब्याज दरें लगातार स्थिर बनी हैं

आरबीआई ने महंगाई और विकास के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी

पश्चिम एशिया तनाव और तेल कीमतों ने नीति को सतर्क रखा

RBI MPC Decision: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. केंद्रीय बैंक ने Repo Rate को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला किया है. इसके साथ ही लगातार चौथी बार RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ब्याज दरों को स्थिर रखना ही सबसे उपयुक्त विकल्प माना गया है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बीच संतुलित रुख अपनाना जरूरी है.

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सभी प्रमुख पॉलिसी रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव

Repo Rate के साथ-साथ RBI ने अन्य प्रमुख ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट 5.25% पर बरकरार है. स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00% पर कायम है. वहीं मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट दोनों 5.50% पर ही बने हुए हैं. इसके अलावा RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी न्यूट्रल ही रखा है.

दिसंबर 2025 के बाद पहली बार नहीं, लगातार स्थिर हैं दरें

Repo Rate में आखिरी बदलाव दिसंबर 2025 में किया गया था. उस समय केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया था. इसके बाद हुई सभी मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों को यथावत रखा गया है. अगस्त 2026 की बैठक के बाद भी यही स्थिति बनी हुई है. इससे साफ है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों को लेकर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहता.

RBI ने फिलहाल इंतजार की रणनीति क्यों अपनाई?

मौद्रिक नीति समिति के सामने इस समय महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है. पहली तिमाही में महंगाई अनुमान से कम रही है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में महंगाई फिर बढ़ सकती है. खाद्य वस्तुओं की कीमतों और ईंधन की लागत में संभावित बढ़ोतरी महंगाई को ऊपर ले जा सकती है. RBI का अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताएं, पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून से जुड़े जोखिम भी केंद्रीय बैंक की चिंता का हिस्सा बने हुए हैं.

EMI पर फिलहाल नहीं मिलेगा कोई फायदा

Repo Rate स्थिर रहने का सबसे बड़ा असर लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा. जिन लोगों का होम लोन, कार लोन या बिजनेस लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा हुआ है, उनकी मासिक EMI में फिलहाल किसी तरह की राहत मिलने की संभावना नहीं है. यानी अभी न तो EMI घटेगी और न ही ब्याज दरों में कोई तत्काल बदलाव देखने को मिलेगा. बैंक भी मौजूदा स्थिति में अपनी लेंडिंग रेट में बड़े बदलाव से बच सकते हैं.

निवेशकों की नजर अब RBI की अगली रणनीति पर

ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने के बावजूद बाजार की नजर अब RBI की भविष्य की रणनीति पर रहेगी. निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक महंगाई, आर्थिक वृद्धि और लिक्विडिटी को लेकर आगे किस तरह का रुख अपनाता है. यदि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रण में रहती है तो भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाएं बन सकती हैं. वहीं यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है तो RBI लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर ही दरों को बनाए रख सकता है.

आगे किन संकेतकों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर?

आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े, खाद्य कीमतों का रुख, ईंधन की लागत, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हालात RBI के अगले फैसलों में अहम भूमिका निभाएंगे. इसके अलावा मानसून की स्थिति और घरेलू आर्थिक गतिविधियां भी यह तय करेंगी कि आने वाली MPC बैठकों में ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत पड़ती है या नहीं.

RBI की प्रमुख ब्याज दरें

* Repo Rate : 5.25%.
* SDF Rate : 5.00%.
* MSF Rate : 5.50%.
* Bank Rate : 5.50%.
* Policy Stance : Neutral.


क्या है इस फैसले का बड़ा संदेश?

अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति से यह साफ संकेत मिला है कि RBI फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है. केंद्रीय बैंक का फोकस महंगाई को नियंत्रित रखने के साथ-साथ आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने पर है. यही वजह है कि ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है. अब अगली MPC बैठक से पहले आने वाले आर्थिक आंकड़े यह तय करेंगे कि भविष्य में ब्याज दरों का रुख किस दिशा में जाएगा.


कैसी रहेगी देश की GDP ग्रोथ?

महंगाई की चिंता के बीच देश की आर्थिक विकास दर को लेकर अच्छी खबर आई है. आरबीआई के अनुसार, इस वित्त वर्ष में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 6.7% रहने का अनुमान है. बता दें कि जून एमपीसी बैठक में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण जीडीपी अनुमान को 6.9% से घटाकर 6.6% किया गया था. लेकिन अब इसमें 10 बेसिस पॉइंट का सुधार करते हुए इसे 6.7% कर दिया गया है.

तिमाही के हिसाब से GDP ग्रोथ का अनुमान

जून 2026 तिमाही: 7.0% (पहले 6.6% का अनुमान था)
सितंबर 2026 तिमाही: 6.4% (पहले 6.3% का अनुमान था)
दिसंबर 2026 तिमाही: 6.5% (पहले भी 6.5% ही था)
मार्च 2027 तिमाही: 6.8% (पहले भी 6.8% ही था)


कोटक लाइफ इंश्योरेंस के सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (इन्वेस्टमेंट) चर्चिल भट्ट ने कहा,

मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट और मौद्रिक नीति के रुख (Policy Stance) में कोई बदलाव नहीं किया है. समिति ने माना कि देश की आर्थिक विकास दर मजबूत बनी हुई है. इसी को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है. हालांकि, अल नीनो और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति से जुड़े जोखिमों पर RBI अब भी सतर्क है.

महंगाई के मोर्चे पर MPC ने राहत जताई है. समिति का मानना है कि फिलहाल व्यापक स्तर पर महंगाई का दबाव नहीं है और हाल में महंगाई में आई बढ़ोतरी मुख्य रूप से सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों की वजह से हुई है. RBI ने पूरे वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया है. वहीं कोर महंगाई का अनुमान भी 4.7% से घटाकर 4.3% कर दिया गया है. MPC ने यह भी साफ किया है कि वह बाजार में नकदी (Liquidity) के प्रबंधन को लेकर सक्रिय बनी रहेगी और कोशिश करेगी कि ओवरनाइट मार्केट रेट्स पॉलिसी रेट के दायरे के अनुरूप बने रहें.

बाजार के नजरिए से देखें तो 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड (10-Year G-Sec Yield) के एक तय दायरे में रहने की संभावना है, जबकि यील्ड कर्व के ऊंचे बने रहने का अनुमान है.