RBI MPC Meeting: क्या 5.25% पर ही रहेगा Repo Rate? महंगाई, कच्चे तेल और ग्लोबल संकट के बीच क्या होगा RBI का फैसला

तनीषा त्यागी

• 03:39 PM • 04 Aug 2026

आरबीआई की एमपीसी बैठक में रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर रहने के आसार हैं. महंगाई, कच्चे तेल और ग्लोबल तनाव के बीच 5 अगस्त के फैसले पर बाजार टिका है.

NewsTak
Google CTA

न्यूज़ हाइलाइट्स

ज्यादातर जानकारों का मानना है, अभी इंतजार और निगरानी सही रहेगी

कच्चे तेल, कमजोर मानसून और पश्चिम एशिया तनाव से दबाव बढ़ा

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने सप्लाई झटकों पर दर बदलने से इंकार किया

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की तीन दिवसीय बैठक 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 5 अगस्त को इसके फैसले का ऐलान होगा. इस बार बाजार की सबसे बड़ी उत्सुकता इस बात को लेकर है कि क्या RBI ब्याज दरों में कोई बदलाव करेगा या फिर Repo Rate को मौजूदा 5.25% पर ही बरकरार रखेगा. ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कायम है और मानसून भी सामान्य नहीं रहा, RBI के सामने महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है.

Read more!

Repo Rate में बदलाव की संभावना क्यों कम मानी जा रही है

ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार RBI ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. उनका तर्क है कि फिलहाल ऐसी परिस्थितियां नहीं हैं, जिनमें तुरंत दरों को बढ़ाना या घटाना जरूरी हो. मौजूदा आर्थिक संकेतकों को देखते हुए केंद्रीय बैंक इंतजार और निगरानी की रणनीति अपना सकता है, ताकि आने वाले महीनों में महंगाई और वैश्विक हालात की दिशा को बेहतर तरीके से समझा जा सके.

IDFC First Bank का क्या है आकलन

IDFC First Bank के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि देश का चालू खाता घाटा पिछले तीन वर्षों से सकल घरेलू उत्पाद के एक फीसदी से नीचे बना हुआ है, जबकि कोर महंगाई भी अपेक्षाकृत नियंत्रित स्तर पर है. ऐसे में केवल सप्लाई से जुड़े झटकों से निपटने के लिए ब्याज दरों में बदलाव करना सही विकल्प नहीं माना जा सकता. बैंक का मानना है कि फिलहाल अर्थव्यवस्था में पर्याप्त क्षमता मौजूद है और ऐसी स्थिति में मौद्रिक नीति की बजाय सरकार की राजकोषीय नीति ज्यादा प्रभावी भूमिका निभा सकती है. ईंधन कीमतों के दबाव को कम करने के लिए सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पहले से कदम उठा रही हैं. इसी वजह से FY27 के दौरान भी RBI के दरों को स्थिर रखने की संभावना जताई गई है.

Nuvama की नजर लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर

Nuvama का मानना है कि RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने की बजाय सिस्टम में नकदी की उपलब्धता यानी लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान देगा. संस्थान का कहना है कि केंद्रीय बैंक अपनी नीति को लचीला बनाए रख सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर आने वाले आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक घटनाक्रमों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई की दिशा और अमेरिका समेत प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर भी RBI की पैनी नजर बनी रहेगी.

Nomura क्यों मान रहा है कि RBI फिलहाल नहीं करेगा कोई बदलाव

Nomura का भी मानना है कि इस बैठक में Repo Rate को स्थिर रखा जा सकता है. उनका तर्क है कि महंगाई RBI के पूरे वित्त वर्ष के अनुमान से नीचे बनी हुई है. ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास आर्थिक विकास को समर्थन देने के लिए पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है. संस्थान का यह भी मानना है कि विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम यह संकेत देते हैं कि RBI फिलहाल अपने महंगाई नियंत्रण के लक्ष्य से समझौता करने के मूड में नहीं है. इसलिए पूरे वित्त वर्ष के दौरान लंबी अवधि तक ब्याज दरों में स्थिरता देखने को मिल सकती है.

Equirus ने दिसंबर में बढ़ोतरी की जताई संभावना

हालांकि सभी विशेषज्ञ एक जैसी राय नहीं रखते. Equirus Securities का मानना है कि इस बैठक में तो Repo Rate में बदलाव नहीं होगा, लेकिन आगे चलकर परिस्थितियां बदल सकती हैं. संस्थान का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, खाद्य वस्तुओं पर मौसम का असर और दूसरे स्तर के महंगाई दबाव आने वाले महीनों में उपभोक्ता महंगाई को ऊपर ले जा सकते हैं. इसके अलावा विकसित देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्ती भी RBI के फैसलों को प्रभावित कर सकती है. इसी आधार पर Equirus दिसंबर की मौद्रिक नीति में 25 बेसिस प्वाइंट की दर वृद्धि की संभावना जता रहा है.

पिछली MPC बैठक में क्या हुआ था ?

जून में हुई पिछली मौद्रिक नीति बैठक में भी RBI ने सर्वसम्मति से Repo Rate को 5.25% पर बरकरार रखा था. उस समय भी पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ था. इसके बावजूद केंद्रीय बैंक ने न्यूट्रल पॉलिसी स्टांस बनाए रखा और ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. Repo Rate में आखिरी बदलाव दिसंबर 2025 में हुआ था, जब इसे 5.50% से घटाकर 5.25% किया गया था. उसके बाद से RBI लगातार परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है.

इस बार RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं ?

इस बार की मौद्रिक नीति बैठक ऐसे समय हो रही है जब एक तरफ मानसून की अनिश्चितता खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की बदलती नीति और विदेशी निवेश के रुख पर भी RBI को नजर रखनी होगी. इन सभी परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई को नियंत्रित रखना और आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखना एक साथ आसान नहीं होगा.

बाजार को किस फैसले का इंतजार

फिलहाल ज्यादातर विशेषज्ञों का अनुमान है कि 5 अगस्त को RBI Repo Rate में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 5.25% पर ही बनाए रखेगा. हालांकि बाजार की नजर सिर्फ ब्याज दर पर नहीं होगी, बल्कि गवर्नर के बयान, महंगाई के अनुमान, आर्थिक विकास के दृष्टिकोण और भविष्य की नीति के संकेतों पर भी रहेगी. यही बातें तय करेंगी कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या हो सकती है और निवेशकों, उधार लेने वालों तथा उद्योग जगत के लिए आगे का रास्ता कैसा रहेगा.