RBI MPC: रेपो रेट पर आज बड़ा फैसला, बढ़ी दरें तो Loan और EMI पर पड़ेगा सीधा असर

तनीषा त्यागी

• 09:53 AM • 07 Oct 2026

RBI MPC की बैठक का आज आखिरी दिन है और सुबह 10 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा बड़ा फैसला सुनाएंगे. क्या रेपो रेट 5.25 से बढ़कर 5.50 फीसदी होगा? महंगाई, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपया RBI की चिंता बढ़ा रहे हैं. फैसले का असर Loan, EMI, FD और शेयर बाजार पर भी दिख सकता है.

RBI repo rate currently stands at 5.25%,
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन पर पड़ेगा सीधा असर. (Photo: ITG)
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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की तीन दिन की बैठक आज खत्म हो रही है. अब सबकी नजर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा पर है, जो 7 अक्टूबर की सुबह 10 बजे MPC के फैसलों का ऐलान करेंगे. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करेगा या फिलहाल ब्याज दरों को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखेगा. अगर RBI रेपो रेट बढ़ाकर 5.50 फीसदी करता है, तो आने वाले समय में कर्ज की लागत बढ़ने और EMI पर दबाव आने की संभावना है. हालांकि, इस फैसले को लेकर विशेषज्ञों की राय एक जैसी नहीं है. कुछ अनुमानों में तत्काल 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि RBI अक्टूबर में दरों को स्थिर रख सकता है और दिसंबर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो सकता है.

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10 बजे संजय मल्होत्रा करेंगे ऐलान

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की जानकारी देंगे. इस बार बाजार की नजर सिर्फ रेपो रेट पर नहीं है, बल्कि गवर्नर की आगे की ब्याज दरों को लेकर टिप्पणी भी काफी अहम मानी जा रही है. दरअसल, अगर 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी पहले से ही बाजार की उम्मीदों में शामिल है, तो वास्तविक असर इस बात पर हो सकता है कि RBI आगे ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत देता है. यानी बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि आज की बढ़ोतरी के बाद क्या और दरें बढ़ सकती हैं या फिर RBI कुछ समय के लिए रुकने वाला है.

रेपो रेट 5.25 से 5.50 फीसदी हुआ तो क्या बदलेगा

अगर RBI इस बैठक में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करता है, तो रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो जाएगा. इसका सीधा असर बैंकों की फंडिंग लागत पर पड़ सकता है. जब बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा होता है, तो इसका असर धीरे-धीरे ग्राहकों को दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में होम लोन, कार लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की EMI बढ़ने की संभावना बन सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रेपो रेट में मामूली बढ़ोतरी के साथ हर ग्राहक की EMI तुरंत और एक जैसी बढ़ जाएगी. वास्तविक असर बैंक की ब्याज दर, लोन की शर्तों और ब्याज दरों में बदलाव के तरीके पर निर्भर करेगा.

RBI के सामने महंगाई सबसे बड़ी चुनौती

इस समय RBI के लिए सबसे बड़ी चिंता महंगाई है. अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी. यानी महंगाई में बढ़ोतरी हुई है और यह RBI के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भी चिंता बढ़ाई है. ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुका है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है. इसके अलावा रुपये की कमजोरी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड भी RBI के सामने चुनौती बढ़ा रही है. ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक के लिए महंगाई को नियंत्रित करना और आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट करना, दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा.

अक्टूबर में फैसला या दिसंबर से बढ़ोतरी?

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का अनुमान है कि RBI अक्टूबर में रेपो रेट को यथावत रख सकता है. उनके मुताबिक, केंद्रीय बैंक सितंबर-अक्टूबर की महंगाई, खरीफ फसल और त्योहारी मांग की स्थिति को देखने के लिए एक और बैठक तक इंतजार कर सकता है. उनका अनुमान है कि दिसंबर से 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो सकता है. इसके बाद दिसंबर और फरवरी के साथ अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में भी एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है. इस तरह कुल 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद रेपो रेट करीब 6 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह एक विशेषज्ञ का अनुमान है. RBI का वास्तविक फैसला और आगे की दिशा आज की MPC बैठक और गवर्नर की टिप्पणी से ही साफ होगी.

बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी भी चुनौती

रेपो रेट के अलावा बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी भी RBI के लिए अहम मुद्दा है. मदन सबनवीस के मुताबिक, बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी करीब 12 लाख करोड़ रुपये से घटकर 5-6 लाख करोड़ रुपये रह गई है, लेकिन इसके फिर बढ़ने की संभावना है. ऐसे में अगर RBI तुरंत ब्याज दर बढ़ाता है, तो मौद्रिक नीति का असर पूरी तरह और तुरंत दिखना जरूरी नहीं है. खासकर जमा दरों और बैंकों की फंडिंग पर इसका असर धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है.

शेयर बाजार भी RBI के फैसले का इंतजार कर रहा है

MPC के फैसले से पहले शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला. कारोबार के दौरान BSE Sensex करीब 400 अंक गिरकर 72,590.74 के स्तर तक पहुंचा. वहीं Nifty 50 भी 156.05 अंक टूटकर 22,617.90 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. ऐसे में RBI के फैसले के साथ-साथ गवर्नर संजय मल्होत्रा की आगे की दरों को लेकर टिप्पणी भी बाजार के लिए अहम होगी. अगर RBI का रुख बाजार की उम्मीदों से अलग रहता है, तो ब्याज दरों से जुड़े शेयरों और सेक्टरों में प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है.

होम लोन और EMI पर क्या होगा असर

रेपो रेट बढ़ने का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनके पास फ्लोटिंग ब्याज दर वाला होम लोन या दूसरा कर्ज है. दरों में बढ़ोतरी होने पर बैंकों की उधारी लागत बढ़ सकती है और इसका असर ग्राहकों की ब्याज दर पर पड़ सकता है. घर खरीदने वालों के लिए भी ऊंची ब्याज दरें कर्ज की लागत बढ़ा सकती हैं. हालांकि, 25 बेसिस प्वाइंट की एक छोटी बढ़ोतरी से घरों की मांग पर बहुत बड़ा असर पड़े, यह जरूरी नहीं है. असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्याज दरें कितने समय तक ऊंची रहती हैं और बैंक ग्राहकों तक इसका कितना असर पहुंचाते हैं.

ऑटो और महंगे सामान पर भी असर संभव

अगर कर्ज महंगा होता है, तो इसका असर सिर्फ होम लोन लेने वालों तक सीमित नहीं रहता. ऑटोमोबाइल और महंगे उपभोक्ता सामान की खरीदारी पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि इन चीजों की खरीद में अक्सर लोन और EMI का इस्तेमाल होता है. अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो कुछ ग्राहक अपनी खरीदारी टाल सकते हैं या कम कीमत वाले विकल्प चुन सकते हैं. इससे ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों पर मांग का दबाव बन सकता है.

FD वालों को मिल सकता है फायदा

ब्याज दरों के ऊंचे रहने का एक दूसरा पहलू भी है. अगर बैंक जमा दरों में बढ़ोतरी करते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD में पैसा रखने वाले ग्राहकों को ज्यादा ब्याज मिलने का फायदा हो सकता है. हालांकि, FD की ब्याज दरें हर बैंक में अलग हो सकती हैं. इसलिए रेपो रेट बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि सभी बैंकों की FD दरें तुरंत और समान अनुपात में बढ़ जाएंगी.

अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

आज की MPC बैठक में RBI के सामने मोटे तौर पर दो संभावनाएं हैं. पहली, अक्टूबर में ही 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करके रेपो रेट को 5.50 फीसदी करना. दूसरी, अभी दरों को स्थिर रखते हुए दिसंबर तक इंतजार करना और उसके बाद सख्त रुख अपनाना. महंगाई में बढ़ोतरी, महंगे कच्चे तेल, रुपये की कमजोरी और वैश्विक ब्याज दरों का माहौल RBI के फैसले को प्रभावित करने वाले अहम मुद्दे हैं. वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय बैंक को यह भी देखना होगा कि ज्यादा सख्ती से कर्ज, खपत और आर्थिक गतिविधियों पर कितना असर पड़ सकता है. अब फैसला RBI के हाथ में है. सुबह 10 बजे संजय मल्होत्रा के ऐलान के साथ यह साफ हो जाएगा कि ब्याज दरों पर फिलहाल राहत जारी रहती है या देश में एक नए Rate Hike Cycle की शुरुआत होती है.