अगर आपका होम लोन चल रहा है या आप नया होम लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो आरबीआई की एमपीसी बैठक आपके लिए अहम है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार रेपो रेट घटेगा या अभी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा.
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अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.50 फीसदी पर ही बरकरार रख सकता है. अगर ऐसा होता है, तो होम लोन की ईएमआई में तुरंत राहत मिलने की संभावना कम रहेगी.
क्या है पूरा मामला
आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की 3 दिन की बैठक 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है. इस बैठक का सबसे अहम फैसला 5 अगस्त को आएगा. इसी दिन आरबीआई बताएगा कि रेपो रेट में बदलाव होगा या नहीं.
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को पैसा देता है. अगर रेपो रेट घटता है, तो बैंकों के लिए कर्ज सस्ता हो सकता है. इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज पर ब्याज दरें कम कर सकते हैं. इससे ईएमआई घटने की संभावना बनती है. वहीं, अगर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होता है, तो आम तौर पर ईएमआई भी पहले जैसी रहती है.
इस बार क्या उम्मीद है
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, इस बार आरबीआई रेपो रेट में बदलाव नहीं कर सकता. यानी 5.50 फीसदी की मौजूदा दर बनी रह सकती है. यह एक अनुमान है और अंतिम फैसला 5 अगस्त को आरबीआई के ऐलान के बाद ही साफ होगा.
रेपो रेट फिलहाल 5.50 फीसदी पर है.ज्यादातर जानकार इस बार दरें जस की तस रहने की उम्मीद जता रहे हैं.फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर तुरंत राहत की संभावना कम मानी जा रही है.
आरबीआई अभी दरें क्यों नहीं घटा सकता
जानकारों के मुताबिक, इसके पीछे कई वजहें हैं. सबसे पहली वजह महंगाई है. जून में खुदरा महंगाई 4.38 फीसदी रही, जबकि आरबीआई का लक्ष्य करीब 4 फीसदी है. यानी महंगाई अभी भी लक्ष्य से ऊपर है.
दूसरी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतें हैं. अगर दुनिया के बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल, ढुलाई और रोजमर्रा की कई चीजें महंगी हो सकती हैं. इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
तीसरी वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव है. अगर वहां हालात और बिगड़ते हैं, तो तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
चौथी वजह मानसून को लेकर चिंता है. अगर बारिश सामान्य से कम रहती है, तो फसलों पर असर पड़ सकता है. इससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है.
इसके अलावा आरबीआई की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व पर भी रहेगी. अगर वहां ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो विदेशी निवेशकों का पैसा भारत से बाहर जा सकता है. इसका असर रुपये और शेयर बाजार पर पड़ सकता है.
जून में खुदरा महंगाई 4.38 फीसदी रही.आरबीआई का लक्ष्य करीब 4 फीसदी है.तेल की कीमत, पश्चिम एशिया का तनाव और मानसून आगे के फैसले में अहम रहेंगे.
होम लोन और एफडी वालों के लिए इसका क्या मतलब है
अगर इस बार रेपो रेट में बदलाव नहीं होता है, तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की ईएमआई में तुरंत कमी की उम्मीद कम रहेगी. नया होम लोन लेने वालों के लिए भी सिर्फ रेपो रेट कटने का इंतजार करना जरूरी नहीं है.
कई बार बिना रेपो रेट बदले भी अलग-अलग बैंक अलग ब्याज दर पर लोन देते हैं. इसलिए बैंक चुनते समय ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन स्प्रेड और दूसरे चार्ज की तुलना करना जरूरी है.
एफडी कराने की सोच रहे लोगों के लिए भी यह बैठक अहम है. अगर आरबीआई दरें नहीं बदलता है, तो बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला मौजूदा ब्याज कुछ समय तक बना रह सकता है. यानी सुरक्षित निवेश पसंद करने वालों के लिए फिलहाल बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है.
आगे किस पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल आरबीआई इंतजार वाला रुख अपना सकता है. अगर आने वाले महीनों में महंगाई कम होती है, तेल की कीमतें काबू में रहती हैं, मानसून अच्छा रहता है और दुनिया के हालात सामान्य रहते हैं, तो आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती पर विचार हो सकता है.
वहीं, अगर महंगाई फिर बढ़ती है या तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो आरबीआई दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है. जरूरत पड़ने पर सख्त रुख भी अपनाया जा सकता है.
कुल मिलाकर, इस बार की एमपीसी बैठक से होम लोन ग्राहकों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम दिख रही है. अभी सबसे ज्यादा नजर 5 अगस्त के ऐलान पर है, क्योंकि इसी फैसले का असर होम लोन, कार लोन, एफडी, रुपये और शेयर बाजार पर पड़ सकता है.
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