NBFC सेक्टर के शेयरों में शुक्रवार को दबाव देखने को मिला. खासकर Bajaj Finance और Tata Capital के शेयरों में गिरावट आई. इसकी बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI का नया draft proposal है, जिसमें NBFCs के लिए revolving credit facility को लेकर नए नियमों का प्रस्ताव रखा गया है.
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RBI के प्रस्ताव के बाद निवेशकों को चिंता है कि अगर ये नियम मौजूदा रूप में लागू होते हैं, तो Bajaj Finance जैसे NBFCs के flexi loan business पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि बाजार में इन शेयरों में बिकवाली बढ़ी.
Bajaj Finance और Tata Capital के शेयरों में गिरावट
शुक्रवार को कारोबार के दौरान:
- Bajaj Finance का शेयर करीब 5 फीसदी तक गिर गया.
- Tata Capital के शेयर में भी करीब 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली.
- Bajaj Finance Nifty के सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहा.
निवेशकों की चिंता RBI के उस प्रस्ताव को लेकर है, जिसमें NBFCs को revolving credit products देने से रोकने की बात कही गई है.
RBI के प्रस्ताव में क्या कहा गया है?
RBI के draft guidelines के मुताबिक NBFCs को मुख्य तौर पर term loan जैसे credit products देने की अनुमति होगी.
वहीं revolving credit facility पर रोक लगाने का प्रस्ताव है.
आसान भाषा में समझें तो:
अभी क्या होता है?
- ग्राहक को एक तय credit limit मिलती है.
- ग्राहक जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल करता है.
- कुछ रकम वापस चुकाने के बाद वही limit दोबारा इस्तेमाल की जा सकती है.
इसे ही revolving credit facility कहा जाता है.
नए नियम लागू होने के बाद:
- ग्राहक जितना पैसा चुका देगा, उतनी रकम दोबारा उसी limit में उपलब्ध नहीं होगी.
- लोन एक तय repayment schedule के हिसाब से चलेगा.
यानी NBFCs का flexi loan और overdraft जैसे products प्रभावित हो सकते हैं.
Bajaj Finance पर क्यों पड़ा ज्यादा असर?
Bajaj Finance के लिए यह चिंता ज्यादा बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि कंपनी का flexi loan segment काफी बड़ा है.
कंपनी ने अपने loan book में flexi loans की सटीक हिस्सेदारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन कुछ analysts का अनुमान है कि इसका हिस्सा करीब 25 फीसदी तक हो सकता है.
Flexi loan model में:
- ग्राहक को एक sanctioned limit मिलती है.
- जरूरत के हिसाब से वह रकम इस्तेमाल कर सकता है.
- वापस चुकाने के बाद दोबारा इस्तेमाल की सुविधा मिलती है.
- कंपनी को limit maintenance fee जैसी income भी मिलती है.
अगर RBI के नए नियम लागू होते हैं, तो इस पूरे मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है.
Loan Growth और Fee Income पर असर की चिंता
बाजार की चिंता सिर्फ मौजूदा कारोबार को लेकर नहीं है, बल्कि भविष्य की कमाई को लेकर भी है.
Analysts के मुताबिक नए नियम लागू होने की स्थिति में Bajaj Finance को:
- अपने loan products में बदलाव करना पड़ सकता है.
- loan growth की रफ्तार धीमी हो सकती है.
- fee income पर दबाव आ सकता है.
- नई lending strategy तैयार करनी पड़ सकती है.
यही अनिश्चितता निवेशकों को शेयर बेचने के लिए प्रेरित कर रही है.
किन लोन सेगमेंट पर ज्यादा असर की आशंका?
Morgan Stanley के मुताबिक कुछ खास lending segments ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.
इनमें शामिल हैं:
- Flexi loans.
- Overdraft facilities.
- Corporate loans.
- MSME loans.
- Unsecured personal loans.
Bajaj Finance का MSME loan portfolio भी इस मामले में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें working capital loans और flexi-limit जैसी सुविधाएं शामिल हैं.
EMI Card और Revolving Credit भी चर्चा में
Bajaj Finance के पास बड़ी संख्या में EMI cards भी हैं, जिनमें ग्राहकों को pre-approved credit limit मिलती है.
ऐसे products भी revolving credit model से जुड़े होते हैं, इसलिए बाजार की नजर इस बात पर है कि अंतिम नियमों में इन सुविधाओं को लेकर क्या स्पष्टता आती है.
हालांकि, RBI का प्रस्ताव अभी draft stage में है. अंतिम नियम आने के बाद ही इसका वास्तविक असर साफ हो पाएगा.
Tata Capital पर भी दबाव क्यों?
Bajaj Finance के अलावा Tata Capital भी revolving credit facility से जुड़े products ऑफर करता है. इसी वजह से RBI के प्रस्ताव के बाद इसके शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला.
निवेशक अब यह देख रहे हैं कि NBFCs किस तरह अपने lending products को नए नियमों के हिसाब से ढालते हैं.
अभी क्या देखना होगा?
फिलहाल बाजार की नजर तीन चीजों पर है:
- RBI के draft proposal में आगे क्या बदलाव होते हैं.
- NBFCs अपने loan products को कैसे restructure करते हैं.
- Bajaj Finance जैसी कंपनियों की future growth strategy क्या रहती है.
अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है और अंतिम नियम आने बाकी हैं. लेकिन बाजार हमेशा भविष्य की कमाई को ध्यान में रखकर प्रतिक्रिया देता है. यही वजह है कि RBI के प्रस्ताव के बाद NBFC शेयरों में तुरंत दबाव देखने को मिला.
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