RBI ने खेला मास्टरस्ट्रोक! भारत का फॉरेक्स रिजर्व पहुंचा रिकॉर्ड हाई!

सौरभ दीक्षित

• 02:14 PM • 03 Sep 2026

आरबीआई की स्वैप सुविधा से एनआरआई ने बड़ी रकम भारत भेजी. 100 अरब डॉलर से ज्यादा प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा और रुपये को सहारा मिला.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

रुपये पर दबाव और तेल जोखिम के बीच कदम उठाया गया

एफसीएनआर खाते में एनआरआई अपनी विदेशी कमाई सीधे जमा करते हैं

रियायती स्वैप सुविधा से बैंकों की डॉलर लागत कम हुई

सोचिए, जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव हो, रुपया कमजोर हो रहा हो और डॉलर की जरूरत बढ़ रही हो, तब सरकार को अचानक विदेशों में रहने वाले भारतीयों से बड़ी मदद मिल जाए।

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और मदद भी ऐसी कि **भारत में 100 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा आ जाए।**आपने सही सुना। प्रवासी भारतीय यानी NRI ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

और इस पूरे मामले में सबसे खास बात ये है कि RBI ने जिस रकम की उम्मीद की थी, उससे कहीं ज्यादा पैसा भारत में आ गया। अब सवाल है कि आखिर RBI ने ऐसा क्या किया कि NRI ने भारत में अरबों डॉलर जमा कर दिए? और इसका फायदा भारत के रुपये और फॉरेक्स रिजर्व को कैसे मिला? आइए इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

सबसे पहले समझिए कि मामला शुरू कहां से हुआ। भारत के लिए डॉलर बेहद जरूरी है। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का काफी सारा कच्चा तेल और कई दूसरी चीजें विदेशों से खरीदता है। इन चीजों की कीमत आम तौर पर डॉलर में चुकानी पड़ती है। ऐसे में जब डॉलर की मांग बढ़ती है या विदेशों से डॉलर कम आते हैं, तो रुपये पर दबाव पड़ सकता है। 2026 में भी भारत को ऐसे ही दबाव का सामना करना पड़ा। मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी। रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ।

ऐसे समय में RBI ने एक खास रणनीति अपनाई। रणनीति थी—**NRI से ज्यादा से ज्यादा विदेशी मुद्रा भारत लाना।**

इसके लिए RBI ने FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने के लिए एक खास स्वैप फैसिलिटी शुरू की।

अब ये FCNR(B) क्या होता है?

इसे बहुत आसान भाषा में समझिए। अगर कोई NRI विदेश में रहता है और उसके पास डॉलर या दूसरी विदेशी मुद्रा में कमाई है, तो वह FCNR(B) खाते में उस पैसे को भारत में जमा कर सकता है। खास बात ये है कि उसे अपने डॉलर को पहले रुपये में बदलने की जरूरत नहीं होती। यानी पैसा विदेशी मुद्रा में ही जमा रहता है। और जब डिपॉजिट की अवधि पूरी होती है, तो मूल रकम और ब्याज भी विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलता है। इसका एक बड़ा फायदा NRI को मिलता है। उसे रुपये के कमजोर या मजबूत होने का ज्यादा जोखिम नहीं उठाना पड़ता। अब RBI ने इस व्यवस्था को और आकर्षक बनाने के लिए बैंकों को खास स्वैप सुविधा दी।

इसके तहत 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट के लिए बैंकों को रियायती स्वैप की सुविधा मिली। सरल भाषा में कहें तो RBI ने बैंकों के लिए डॉलर को मैनेज करने की लागत कम करने की कोशिश की। इससे NRI के पैसे को भारत लाने का रास्ता ज्यादा आकर्षक बन गया। और इसका नतीजा उम्मीद से भी बड़ा निकला।

शुरुआत में RBI को करीब **80 अरब डॉलर** के इनफ्लो की उम्मीद थी। लेकिन पैसा आने की रफ्तार इतनी तेज रही कि अगस्त की शुरुआत तक ही करीब **40.8 अरब डॉलर** आ चुके थे।

इसके बाद 31 अगस्त 2026 तक FCNR(B) के जरिए आने वाली रकम **100 अरब डॉलर से भी ज्यादा** हो गई। यानी RBI की शुरुआती उम्मीद से काफी ज्यादा पैसा भारत आ गया।

और यहीं से RBI की रणनीति की सफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है। RBI ने इस सुविधा की डेडलाइन 30 सितंबर 2026 रखी थी।

लेकिन जब पैसा उम्मीद से बहुत तेजी से आने लगा, तो RBI ने करीब एक महीने पहले ही इस स्पेशल स्वैप फैसिलिटी की विंडो बंद कर दी।

अब सवाल है कि इसका भारत को फायदा क्या हुआ? सबसे बड़ा फायदा हुआ भारत के **फॉरेक्स रिजर्व** को। फॉरेक्स रिजर्व यानी देश के पास मौजूद विदेशी मुद्रा का भंडार।

कहां होता है इस्तेमाल

जब देश के पास ज्यादा डॉलर होते हैं, तो जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। 21 अगस्त तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर करीब **729.3 अरब डॉलर** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था।

कुछ हफ्ते पहले यानी 24 जुलाई को ये करीब **682 अरब डॉलर** था। यानी इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में काफी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। अब इसे ऐसे समझिए। अगर आपके घर में अचानक खर्च बढ़ जाए और आपके पास बैंक में ज्यादा बचत हो, तो मुश्किल समय में उस बचत से खर्च संभालना आसान होता है।

देश के लिए फॉरेक्स रिजर्व कुछ ऐसा ही काम करता है। अगर तेल की कीमत बढ़ जाए, विदेशी निवेश अचानक निकलने लगे या डॉलर की मांग बढ़ जाए, तो मजबूत फॉरेक्स रिजर्व देश को झटका सहने की क्षमता देता है। इसका फायदा रुपये को भी मिल सकता है। ज्यादा डॉलर उपलब्ध होने से डॉलर की कमी का दबाव कम हो सकता है और इससे रुपये को सहारा मिल सकता है।

कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव, अमेरिकी ब्याज दरें और दुनिया की अर्थव्यवस्था जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं। फिर भी संकट के समय देश के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होना एक बड़ी ताकत है। अब देखना होगा कि आगे भी NRI डिपॉजिट भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये को कितना सहारा देते हैं। फिलहाल RBI की ये रणनीति उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल होती दिखाई दे रही है।