देश की करेंसी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि ये कोई नोटबंदी या पुराने नोटों को बंद करने वाला फैसला नहीं है. आपकी जेब में रखे मौजूदा नोट फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित हैं.दरअसल, पिछले महीने सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ था कि RBI जल्द ही कागज के नोटों को हटाकर उनकी जगह प्लास्टिक के नोट शुरू करने वाला है. हालांकि PIB की फैक्ट चेक टीम ने इस दावे को गलत बताया था और साफ किया था कि RBI ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है.
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लेकिन अब RBI के एक नए कदम ने पॉलीमर करेंसी यानी प्लास्टिक नोटों को लेकर चर्चा फिर तेज कर दी है. केंद्रीय बैंक ने नोटों की छपाई में इस्तेमाल होने वाली खास पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए हैं. इसके लिए अखबारों में विज्ञापन भी जारी किए गए हैं. इसके अलावा मीडिया सूत्रों के मुताबिक, भारत पॉलीमर करेंसी की दिशा में आगे बढ़ रहा है. माना जा रहा है कि पहले चरण में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है और इसके नतीजों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा. खबरों के मुताबिक, शुरुआत छोटे मूल्य वाले नोटों से हो सकती है. हालांकि, अभी तक RBI की तरफ से पॉलीमर नोट लॉन्च करने या कागज के नोटों को हटाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
क्या भारत में सच में आएंगे प्लास्टिक नोट?
RBI ने जिस पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई के लिए टेंडर मांगे हैं, उसका इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में पॉलीमर बैंक नोट बनाने के लिए किया जाता है.आसान भाषा में समझें तो पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तरह ही दिखते हैं, लेकिन इन्हें एक खास सिंथेटिक प्लास्टिक मटीरियल से तैयार किया जाता है.अभी भारत में ज्यादातर नोट कॉटन बेस्ड पेपर से बनाए जाते हैं. वहीं पॉलीमर नोट एक मजबूत प्लास्टिक बेस से तैयार होते हैं, जिनमें कई एडवांस सिक्योरिटी फीचर जोड़े जा सकते हैं.इन नोटों में पारदर्शी विंडो, खास सिक्योरिटी डिजाइन और ऐसे फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिनकी नकल करना मुश्किल होता है.यानी पॉलीमर नोट लाने का मकसद सिर्फ करेंसी का रूप बदलना नहीं है, बल्कि इसे ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बनाना भी है.
आखिर RBI को पॉलीमर नोटों की जरूरत क्यों पड़ सकती है?
भारत जैसे बड़े देश में आज भी कैश का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है. रोजाना करोड़ों लोग नोटों का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में नोटों का जल्दी खराब होना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.जेब में रखा नोट कभी बारिश में भीग जाता है, कभी फट जाता है और लगातार इस्तेमाल के कारण गंदा हो जाता है. इसके बाद RBI को खराब नोटों को सिस्टम से बाहर निकालकर नए नोट जारी करने पड़ते हैं.
RBI की Annual Report के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर खर्च बढ़कर करीब 6,372 करोड़ रुपये पहुंच गया. जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह खर्च करीब 5,101 करोड़ रुपये था. यानी करेंसी मैनेजमेंट पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोट RBI के लिए एक विकल्प हो सकते हैं.
पॉलीमर नोट आने से क्या फायदे होंगे?
1. ज्यादा लंबी उम्र
पॉलीमर नोट कागज के नोटों के मुकाबले ज्यादा मजबूत होते हैं. ये जल्दी फटते नहीं हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
इससे खराब नोटों की संख्या कम हो सकती है और बार-बार नए नोट छापने की जरूरत भी घट सकती है.
2. पानी और गंदगी से ज्यादा सुरक्षा
भारत जैसे देश में जहां अलग-अलग मौसम की स्थिति रहती है, वहां नोटों का खराब होना आम बात है.
पॉलीमर नोट पानी, नमी और गंदगी से ज्यादा सुरक्षित रहते हैं. बारिश या रोजमर्रा के इस्तेमाल का असर इन पर कम पड़ता है.
3. नकली नोटों पर लगाम लगाने में मदद
पॉलीमर नोटों में आधुनिक सिक्योरिटी फीचर शामिल किए जा सकते हैं. इससे नकली नोट तैयार करना मुश्किल हो सकता है.
हालांकि सिर्फ पॉलीमर नोट आने से नकली करेंसी की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा.
भारत पहले भी कर चुका है पॉलीमर नोटों का ट्रायल
भारत में पॉलीमर नोट कोई नया प्रयोग नहीं है.साल 2012 में RBI ने 10 रुपये के पॉलीमर नोटों के ट्रायल की योजना बनाई थी. इसके लिए कुछ शहरों में टेस्टिंग की तैयारी की गई थी.लेकिन यह प्रयोग आगे नहीं बढ़ पाया. इसके पीछे टेक्नोलॉजी से जुड़ी चुनौतियां, ऑपरेशनल दिक्कतें और नए सिस्टम की जरूरत जैसी वजहें थीं.अब पिछले कुछ वर्षों में तकनीक काफी आगे बढ़ चुकी है. यही वजह है कि RBI दोबारा पॉलीमर करेंसी की संभावनाओं को देख रहा है.
दुनिया के कई देशों में चल रहे हैं पॉलीमर नोट
भारत अकेला देश नहीं है जो पॉलीमर करेंसी की तरफ बढ़ रहा है.ऑस्ट्रेलिया ने साल 1988 में बड़े स्तर पर पॉलीमर करेंसी को अपनाने की शुरुआत की थी. इसके बाद कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, मलेशिया समेत कई देशों ने भी इसे अपनाया.आज दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में किसी न किसी रूप में पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है.
क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर पॉलीमर नोट आते हैं तो क्या मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे?इसका जवाब फिलहाल नहीं है.सूत्रों के मुताबिक, अगर RBI पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करता है तो शुरुआत सीमित स्तर पर होगी. छोटे मूल्य वाले नोटों से इसकी शुरुआत की जा सकती है.सबसे अहम बात ये है कि पॉलीमर नोट आने का मतलब पुराने नोटों को अचानक बंद करना नहीं होगा. दोनों तरह की करेंसी कुछ समय तक साथ चल सकती हैं.
पॉलीमर नोटों के सामने क्या हैं चुनौतियां?
हर नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं.पॉलीमर नोटों के लिए नई टेक्नोलॉजी, नई मशीनरी और नए सिस्टम की जरूरत होगी. इसके लिए शुरुआती निवेश भी ज्यादा हो सकता है.इसके अलावा भारत जैसे बड़े देश में करोड़ों नोटों को धीरे-धीरे बदलना एक लंबी प्रक्रिया होगी.
RBI के कदम से क्या संकेत मिलते हैं?
फिलहाल RBI ने सिर्फ पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई के लिए प्रक्रिया शुरू की है. इसे पॉलीमर नोट लॉन्च करने का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता.लेकिन इतना जरूर है कि RBI करेंसी को ज्यादा सुरक्षित, ज्यादा टिकाऊ और आधुनिक बनाने के विकल्पों पर काम कर रहा है.अब नजर इस बात पर होगी कि पायलट प्रोजेक्ट कब शुरू होता है और RBI पॉलीमर करेंसी को लेकर आगे क्या कदम उठाता है. आने वाले समय में भारत की जेब में रखे नोट कागज के होंगे या पॉलीमर के, इसका फैसला इसी प्रक्रिया से तय होगा.
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