पिछले कुछ समय से आपको लोन सस्ता होने की खबरें मिल रही थीं। RBI ने ब्याज दरें घटाईं, बैंकों की उधारी की लागत कम हुई और उम्मीद थी कि सस्ता कर्ज अर्थव्यवस्था को रफ्तार देगा। लेकिन अब कहानी पलटती हुई दिखाई दे रही है। RBI करीब 4 साल बाद फिर से ब्याज दर बढ़ा सकता है। और इस बार वजह सिर्फ एक नहीं है। देश में महंगाई बढ़ रही है, अर्थव्यवस्था की ग्रोथ मजबूत बनी हुई है, रुपया दबाव में है और दुनिया के कई बड़े केंद्रीय बैंक भी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं। तो सवाल है कि क्या भारत में ब्याज दरें बढ़ाने का नया दौर शुरू होने वाला है? और अगर RBI ने रेपो रेट बढ़ाया, तो इसका असर आपकी EMI से लेकर शेयर बाजार और रुपये तक पर कैसे पड़ेगा? चलिए पूरी कहानी आसान भाषा में समझते हैं।
ADVERTISEMENT
सर्वे में हुआ खुलासा
सबसे पहले बाजार की उम्मीद देखिए। Reuters ने 61 अर्थशास्त्रियों के बीच सर्वे किया। इनमें से 35 यानी करीब 60 फीसदी अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि RBI अपनी बुधवार को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। लेकिन बाजार इससे भी ज्यादा आश्वस्त नजर आ रहा है। स्वैप मार्केट में ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद पहले ही काफी हद तक कीमतों में शामिल हो चुकी है।
अगर RBI सच में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करता है, तो ये करीब चार साल में पहली बार होगा जब RBI ब्याज दर बढ़ाएगा। फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी है और करीब 10 महीने से इसी स्तर पर है।
याद कीजिए, इससे पहले RBI ने 2025 में ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट यानी 1.25 फीसदी की कटौती की थी। रेपो रेट 6.5 फीसदी से घटकर 5.25 फीसदी पर आ गया था। लेकिन अब RBI के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है।
वो है महंगाई। साल की शुरुआत में महंगाई का माहौल काफी शांत था। इसलिए RBI के पास इंतजार करने की गुंजाइश थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। अगस्त में भारत की रिटेल महंगाई 4.82 फीसदी पर पहुंच गई। यानी RBI के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर। और लगातार तीसरे महीने महंगाई RBI के लक्ष्य से ऊपर रही।
एक और दिलचस्प बात है। महंगाई अब सिर्फ खाने-पीने की चीजों और ईंधन तक सीमित नहीं है। CPI की लगभग आधी बास्केट में कीमतें RBI के 4 फीसदी लक्ष्य के बराबर या उससे ऊपर बढ़ रही हैं। यानी महंगाई का दायरा फैल रहा है। लेकिन दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की ग्रोथ कमजोर नहीं हुई है।अप्रैल से जून की तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी।
तो RBI के सामने स्थिति कुछ ऐसी है। महंगाई ऊपर, लेकिन ग्रोथ भी मजबूत। ऐसे में अगर RBI बहुत देर तक ब्याज दर कम रखता है, तो महंगाई के और गहराने का खतरा बढ़ सकता है। BofA Global Research के इकोनॉमिस्ट का भी मानना है कि RBI के पास अब ज्यादा इंतजार करने की वजह नहीं बची है। उनके मुताबिक ग्रोथ की तस्वीर मजबूत है और महंगाई का दबाव अब व्यापक होता जा रहा है। और मामला सिर्फ भारत का नहीं है। दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक भी अब ज्यादा सख्त होते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान समेत कई बड़े केंद्रीय बैंकों ने अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े युद्ध के बाद के महीनों में ब्याज दरें बढ़ाई हैं। ऐसे माहौल में अगर RBI ब्याज दर नहीं बढ़ाता है, तो बाजार में इसका उल्टा असर भी हो सकता है।
आ सकता है बड़ा दबाव
बॉन्ड मार्केट के लंबे समय वाले हिस्से पर भी दबाव आ सकता है। और यहां एक और परेशानी है भारतीय रुपया। रुपया पहले से दबाव में है और मई में दर्ज अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से करीब 1 फीसदी ही ऊपर है। ऐसे में RBI के सामने महंगाई को संभालने के साथ-साथ रुपये और विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर भी चुनौती है। अब अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इसका फायदा क्या होगा?
एक फायदा ये हो सकता है कि भारतीय बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाएं। क्योंकि अगर भारत में ब्याज दर और यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड में निवेश करने का बेहतर रिटर्न मिल सकता है। लेकिन बड़ा सवाल है RBI कितनी बढ़ोतरी करेगा? यहीं एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है।
अब इसका सीधा असर आम आदमी पर क्या होगा? अगर रेपो रेट बढ़ता है तो आगे चलकर बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है। इसका असर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और दूसरे कर्जों की EMI पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ बचत और फिक्स्ड इनकम वाले निवेशों को ज्यादा ब्याज का फायदा मिल सकता है। शेयर बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि ज्यादा ब्याज दरों से कंपनियों की borrowing cost बढ़ती है और निवेशकों के लिए इक्विटी के मुकाबले बॉन्ड जैसे विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। तो कुल मिलाकर RBI के सामने इस वक्त एक मुश्किल संतुलन है।
महंगाई को काबू करना है, लेकिन ग्रोथ को नुकसान भी नहीं पहुंचाना है। रुपये को संभालना है, विदेशी पूंजी को आकर्षित करना है और साथ ही ये भी देखना है कि ब्याज दरें इतनी ज्यादा न बढ़ जाएं कि अर्थव्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ने लगे।
इसलिए बुधवार की RBI बैठक सिर्फ 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी या कटौती का फैसला नहीं होगी। बाजार की असली नजर RBI के आगे के संकेतों पर होगी। क्योंकि अगर RBI ने इस बार दर बढ़ाई और आगे भी बढ़ोतरी का संकेत दिया, तो भारत में करीब चार साल बाद शुरू हुआ ये Rate Hike Cycle आने वाले महीनों में लोन, EMI, रुपया, बॉन्ड और शेयर बाजार सबकी दिशा बदल सकता है।
ADVERTISEMENT

