SBI Research ने बजा दी बड़े खतरे की घंटी, RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट, जान लीजिए पूरा मामला!

सौरभ दीक्षित

• 01:51 PM • 17 Sep 2026

SBI Research ने RBI को रेपो रेट बढ़ाने की सलाह दी है. समझिए इससे होम लोन की EMI, नई FD और आपके महीने के बजट पर कितना असर पड़ सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गई

जुलाई से खुदरा महंगाई आठ महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची

थोक महंगाई 9.92 फीसदी रही और फ्यूल-पावर दबाव भी बढ़ा

आम आदमी को आने वाले दिनों में बड़ा झटका लग सकता है. बढ़ती महंगाई के बीच SBI Research की एक रिपोर्ट ने RBI के सामने ब्याज दर बढ़ाने का मुद्दा खड़ा कर दिया है. SBI Research ने RBI को अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट, यानी कुल 50 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट बढ़ोतरी की सलाह दी है.

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हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि RBI ने रेपो रेट बढ़ाने का फैसला कर लिया है. यह SBI Research की सलाह है. अब सवाल है कि अगर रेपो रेट बढ़ता है तो इसका आपकी EMI पर कितना असर पड़ेगा. साथ ही FD कराने वाले लोगों के लिए इसका क्या मतलब होगा.

अगस्त में बढ़ी रिटेल महंगाई

सबसे पहले महंगाई के आंकड़ों को समझते हैं. अगस्त में भारत की रिटेल महंगाई यानी CPI बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई. जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी. इस तरह अगस्त में रिटेल महंगाई 8 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.

महंगाई का असर सिर्फ सरकारी आंकड़ों में नहीं दिखाई देता. प्याज, लहसुन और अदरक जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घर के बजट पर पड़ता है.

वहीं, अगस्त में थोक महंगाई यानी WPI भी बढ़कर 9.92 फीसदी पहुंच गई.

महंगाई का दायरा बढ़ने के संकेत

SBI Research के मुताबिक महंगाई का दबाव अब ज्यादा चीजों तक फैलता दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक CPI में 90 फीसदी वेटेड कंट्रीब्यूशन को कवर करने वाली कमोडिटीज की संख्या जनवरी 2026 में 22 थी, जो जुलाई में बढ़कर 53 हो गई.यानी महंगाई का दबाव अब पहले के मुकाबले ज्यादा चीजों में दिखाई दे रहा है.

कच्चा तेल बना सबसे बड़ा रिस्क

SBI Research के विश्लेषण में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को एक बड़ा जोखिम बताया गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं. SBI Research के एक मॉडल के मुताबिक अगले 15 दिनों में क्रूड की कीमत 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है.

हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. 123 डॉलर प्रति बैरल वाला आंकड़ा SBI Research का सामान्य अनुमान नहीं है. यह एक स्ट्रेस सिनेरियो है. वहीं, दूसरे मॉडल में अगले 15 दिनों के दौरान क्रूड की औसत कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया है.

क्रूड महंगा होने का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहता. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ती है और कंपनियों की उत्पादन लागत पर भी दबाव पड़ता है. कंपनियां बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा सामान और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं.

अगस्त में थोक महंगाई के आंकड़ों में फ्यूल और पावर की महंगाई 22.93 फीसदी तक पहुंच गई थी.

इन सेक्टर्स पर भी बढ़ सकती है लागत का दबाव

SBI Research ने कुछ ऐसे सेक्टर्स की तरफ भी इशारा किया है, जहां इनपुट कॉस्ट यानी उत्पादन में लगने वाली लागत, आउटपुट प्राइस के मुकाबले तेजी से बढ़ रही है. इनमें क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस, बेवरेजेज, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर शामिल हैं. ऐसे में कंपनियों पर बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने का दबाव बढ़ सकता है.

अब समझिए EMI का पूरा गणित

इस पूरी कहानी का सीधा संबंध आपकी जेब से है. वह है आपकी EMI. फिलहाल रेपो रेट 5.25 फीसदी पर स्थिर है. अगस्त की बैठक में RBI ने लगातार चौथी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. लेकिन SBI Research ने RBI को अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की सलाह दी है. अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट में कुल 50 बेसिस पॉइंट यानी आधा फीसदी की बढ़ोतरी होगी.

अब इसे एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आपने 50 लाख रुपये का 20 साल का होम लोन लिया है और अभी ब्याज दर 8.25 फीसदी है. इस ब्याज दर पर आपकी EMI करीब 42,603 रुपये प्रति महीने बनती है. अब अगर रेपो रेट में कुल आधा फीसदी की बढ़ोतरी का पूरा असर बैंक ग्राहक तक पहुंचाता है और आपके लोन की ब्याज दर 8.25 फीसदी से बढ़कर 8.75 फीसदी हो जाती है, तो EMI करीब 44,186 रुपये हो सकती है.

यानी हर महीने करीब 1,583 रुपये ज्यादा देने पड़ सकते हैं. साल भर में देखें तो यह अतिरिक्त बोझ करीब 19 हजार रुपये का हो सकता है.

हालांकि, यह सिर्फ एक उदाहरण है. असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका बैंक ब्याज दर में कितनी बढ़ोतरी करता है और आपके लोन की रीसेट पॉलिसी क्या है.

FD कराने वालों के लिए क्या होगा

रेपो रेट बढ़ने का दूसरा पहलू FD कराने वाले लोगों से जुड़ा है. अगर बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं तो नई FD कराने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर पर पैसा लॉक करने का मौका मिल सकता है. यानी एक तरफ फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर ब्याज बढ़ने का दबाव हो सकता है, तो दूसरी तरफ नई FD कराने वालों के लिए ज्यादा ब्याज मिलने की संभावना बन सकती है.

अक्टूबर में RBI का फैसला अहम

फिलहाल RBI ने रेपो रेट बढ़ाने का कोई फैसला नहीं किया है. अब सबकी नजर RBI की अगली MPC बैठक पर रहेगी. यह बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होगी. इस बैठक में RBI महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ब्याज दर पर अपना अगला फैसला लेगा.

इसलिए आने वाले दिनों में महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बेहद अहम होगी.

पूरी कहानी को आसान भाषा में समझें तो SBI Research ने RBI को अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट बढ़ोतरी की सलाह दी है. लेकिन यह RBI का फैसला नहीं है.

अगर RBI भविष्य में रेपो रेट बढ़ाता है और बैंक उसका पूरा या कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन की EMI बढ़ सकती है. दूसरी तरफ नई FD कराने वालों को ज्यादा ब्याज दर मिलने की संभावना बन सकती है.

यानी आने वाले दिनों में महंगाई, क्रूड ऑयल और RBI की ब्याज दर नीति पर नजर रखना आम लोगों के लिए भी जरूरी होगा.