अगर आपका होम लोन चल रहा है या आप नया होम लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो आरबीआई की एमपीसी बैठक आपके लिए अहम है. 3 अगस्त से शुरू हुई 3 दिन की बैठक का सबसे अहम फैसला 5 अगस्त को आएगा. इसी दिन साफ होगा कि रेपो रेट में बदलाव होगा या नहीं.
ADVERTISEMENT
अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या होम लोन की ईएमआई घटेगी. फिलहाल ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता और इसे 5.50 फीसदी पर बरकरार रख सकता है. ऐसा होता है तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर तुरंत राहत की उम्मीद कम रहेगी.
रेपो रेट का मतलब क्या है
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को पैसा उधार देता है. अगर यह दर घटती है, तो बैंकों के लिए पैसा सस्ता हो सकता है. इसके बाद बैंक होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन पर ब्याज कम कर सकते हैं. ऐसे में ईएमआई घटने की संभावना बढ़ती है. अगर रेपो रेट में बदलाव नहीं होता, तो आमतौर पर ईएमआई भी पहले जैसी रहती है.
इस बार क्या उम्मीद है
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार आरबीआई इंतजार करके हालात देखने वाला रुख अपना सकता है. उनका मानना है कि मौजूदा हालात में केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में ब्याज दर घटाने से बच सकता है.
दरें स्थिर रहने की बड़ी वजहें
जून में खुदरा महंगाई 4.38 फीसदी रही, जबकि आरबीआई का लक्ष्य करीब 4 फीसदी है.कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल, डीजल, ढुलाई और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं.पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.अगर मानसून कमजोर रहता है, तो फसलों और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने पर विदेशी निवेशकों का पैसा भारत से बाहर जा सकता है, जिससे रुपये और शेयर बाजार पर असर पड़ सकता है.
होम लोन और एफडी पर क्या असर होगा
अगर रेपो रेट 5.50 फीसदी पर ही रहता है, तो होम लोन की ईएमआई में तुरंत कमी की संभावना कम रहेगी. वहीं, ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने पर बैंकों की एफडी पर मिलने वाला मौजूदा ब्याज भी कुछ समय तक बना रह सकता है. यानी सुरक्षित निवेश पसंद करने वालों के लिए भी फिलहाल बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है.
नया होम लोन लेने वाले क्या देखें
अगर आप नया होम लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ इस उम्मीद में फैसला न टालें कि आरबीआई ब्याज दर घटा देगा. अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन स्प्रेड और दूसरे चार्ज की तुलना करना जरूरी है. कई बार रेपो रेट बदले बिना भी बैंक अलग दरों पर लोन देते हैं.
आगे क्या देखना होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि आगे का रास्ता महंगाई, तेल की कीमत, मानसून और दुनिया के हालात पर निर्भर करेगा. अगर आने वाले महीनों में महंगाई कम होती है, तेल की कीमतें काबू में रहती हैं और हालात सामान्य रहते हैं, तो आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती पर विचार हो सकता है. लेकिन अगर महंगाई फिर बढ़ती है या तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो आरबीआई दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है. फिलहाल पूरी नजर 5 अगस्त के ऐलान पर है, क्योंकि इस एक फैसले का असर होम लोन, कार लोन, एफडी, रुपये और शेयर बाजार पर पड़ सकता है.
ADVERTISEMENT

