रुपये को संभालने के लिए RBI का बड़ा कदम, तेल कंपनियों को बेचेगा डॉलर; विदेशी मुद्रा बाजार के नियम भी सख्त

सौरभ दीक्षित

10 Oct 2026 (अपडेटेड: Oct 10 2026 3:34 PM)

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट के बीच RBI ने बड़ा कदम उठाया है. भारतीय रिजर्व बैंक तीन सरकारी तेल कंपनियों को उनकी रोजाना की जरूरत के मुताबिक डॉलर उपलब्ध कराएगा. इसके साथ ही विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाई गई है और कुछ सौदों पर 20 फीसदी रिजर्व रखने का नियम लागू किया गया है. जानिए RBI के इन चार बड़े फैसलों का मकसद क्या है, रुपये पर इसका कितना असर पड़ सकता है और डॉलर की तेजी से आम आदमी की जेब पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.

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न्यूज़ हाइलाइट्स

रुपये की गिरावट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने कई अहम कदम उठाए

विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने के लिए कई कदमों का ऐलान किया

रिजर्व रखने और हेजिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है

RBI Rupee Measures: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने कई अहम कदम उठाए हैं. केंद्रीय बैंक तीन सरकारी तेल कंपनियों को उनकी रोजाना की जरूरत के मुताबिक डॉलर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू करेगा. इसके अलावा, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाने, जोखिम के लिए रिजर्व रखने और हेजिंग से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है.

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डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने के लिए कई कदमों का ऐलान किया है. इन उपायों में तीन सरकारी तेल कंपनियों को डॉलर उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू करना और विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ सौदों पर सख्ती करना शामिल है. इन कदमों का उद्देश्य डॉलर की सट्टा मांग को नियंत्रित करना और रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करने में मदद करना है.

तेल कंपनियों को सीधे उपलब्ध कराए जाएंगे डॉलर

RBI के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) के लिए एक विशेष डॉलर व्यवस्था शुरू की जाएगी. यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी.

इस व्यवस्था के तहत RBI नामित बैंकों के माध्यम से इन तीनों सरकारी तेल कंपनियों को अमेरिकी डॉलर उपलब्ध कराएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियां कच्चे तेल के आयात और अन्य विदेशी भुगतानों के लिए अपनी रोजाना की विदेशी मुद्रा जरूरत पूरी कर सकें.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का कारोबार मुख्य रूप से डॉलर में होता है. ऐसे में रुपये की कीमत गिरने पर तेल आयात के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. हालांकि, RBI ने इस विशेष व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले डॉलर की कुल मात्रा का खुलासा नहीं किया है.

विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाई

RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े कुछ डेरिवेटिव सौदों की सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी है. संशोधित सीमा रुपये से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर भी लागू होगी. डेरिवेटिव सौदों का इस्तेमाल कंपनियां भविष्य में मुद्रा विनिमय दरों में होने वाले बदलाव के जोखिम से बचने के लिए करती हैं. हालांकि, इनका इस्तेमाल बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव पर दांव लगाने के लिए भी हो सकता है.

केंद्रीय बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी मुद्रा बाजार में सौदे वास्तविक कारोबारी जरूरतों से जुड़े रहें और सट्टेबाजी के लिए बड़े सौदों का इस्तेमाल कम हो. केंद्रीय बैंक ने कुछ पात्र रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के लिए विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व यानी एफईआरआर की व्यवस्था भी शुरू की है.

यह नियम 20 लाख डॉलर से अधिक के सांकेतिक मूल्य वाले पात्र सौदों पर लागू होगा. इसके तहत रजिस्टर्ड डीलरों को संबंधित सौदे के रुपये मूल्य का 20 फीसदी नकद रिजर्व RBI के पास रखना होगा. यह नियम सभी विदेशी मुद्रा लेनदेन पर लागू नहीं होगा. इसका दायरा निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले सौदों तक सीमित है. इस कदम का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम को नियंत्रित करना और सट्टा गतिविधियों को हतोत्साहित करना है.

हेजिंग के नियम भी हुए सख्त

RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में शामिल ग्राहकों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया को भी सख्त किया है. अब रजिस्टर्ड डीलरों को ग्राहकों से एक वचन पत्र लेना और उसे अपने पास रखना होगा. इसमें ग्राहक को पुष्टि करनी होगी कि जिस जोखिम से बचने के लिए वह सौदा कर रहा है, उसी जोखिम की हेजिंग किसी दूसरे डीलर के माध्यम से पहले से नहीं की गई है. इस नियम का उद्देश्य एक ही जोखिम के लिए बार-बार हेजिंग करने की संभावना को कम करना और विदेशी मुद्रा बाजार में अनुशासन बढ़ाना है.